कबड्डी में बरकरार है भारत की बादशाहत

हिरामत्सु हिसामोटो, मंगा (जापानी कॉमिक्स) को जीवित होता हुआ देखने के लिए आये थे। नागोया के इस 16-वर्षीय किशोर ने कबड्डी को ‘बर्निंग कबड्डी’ के पन्नों पर खोजा था, जोकि पुरस्कार-विजेता जापानी उपन्यास है। इसी मंगा ग्राफिक नावेल ने कबड्डी को जापान में पॉपुलर किया है। चालीस मिनट तक भारत व ईरान के बीच फाइनल मुकाबले को देखने के बाद वह नये उत्साह के साथ लौटे कि स्वयं कबड्डी खेला करेंगे। भारत ने 40-33 से जीत दर्ज की और 2026 एशियन गेम्स की इस स्पर्धा (पुरुष कबड्डी) का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 
इससे पहले महिला वर्ग में भारत ने 2018 की चैंपियन ईरान को एक चुनौतीपूर्ण मुकाबले में 3 अंक (37-34) के मामूली अंतर से पराजित करके गोल्ड मेडल हासिल किया। इस प्रकार दोनों पुरुष व महिला वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर भारत ने कबड्डी में अपनी बादशाहत को बरकरार रखा, जिसका अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 10 सत्रों (पुरुष कबड्डी) में भारत का यह नवां गोल्ड मेडल है। वर्तमान एशियन गेम्स में कबड्डी के दो स्वर्ण पदक जीतने से यह भी सुनिश्चित हो गया है कि इन खेलों में कबड्डी भारत के लिए सबसे भरोसेमंद उम्मीद है। 
जिन लोगों ने कबड्डी को कॉमिक्स के ज़रिये खोजा है उनके लिए इसे लाइव देखना परम आनंद से कम नहीं है- रेडर्स का शिकंजों से बच निकलना, डिफेंडर्स का पैरों को जकड़े रहना, हाथ से लाइन को स्पर्श करना जब शेष शरीर दूसरी दिशा में खींचा जा रहा हो। यह सीन अक्सर ऐसा प्रतीत होता है जैसे सीधे मंगा से निकला हो। ‘अब मैं इसे अवश्य खेलूंगा,’ हिसामोटो ने कहा। 
स्वर्ण पदक के लिए फाइनल कबड्डी का मैच क्लासिक साबित हुआ। इस खेल को लेकर भारत व ईरान के बीच इतिहास भी है और यादें भी। भारत ने एशियन गेम्स (पुरुष वर्ग) में लगातार सात गोल्ड मेडल जीते थे और इस विजय रथ को ईरान ने 2018 के सेमीफाइनल में रोका। भारत को अपना खिताब वापस हासिल करने के लिए पांच साल तक प्रतीक्षा करनी पड़ी, और जब यह किया तो वह भी ईरान के खिलाफ ही था, 2023 हांगझोऊ में 33-29 की जीत के साथ। उस फाइनल में जब स्कोर 28-28 की बराबरी पर था, तो ज़बरदस्त तकरार, विरोध और एक घंटे तक खेल रुका रहा था। 
इसलिए 26 सितम्बर 2026 का मुकाबला केवल एक अन्य फाइनल नहीं था। एक पेंच फंसा था, जिसे निकालना था। एशियन गेम्स से पहले जब तैयारी करने के लिए ईरानी टीम ने पाकिस्तान की यात्रा की थी, तो मुहम्मद रज़ा शादलोई ने कहा था कि गोल्ड मेडल तो उन्हीं का होकर रहेगा। इस पर भारतीय कप्तान सुनील कुमार ने कहा था, ‘मैं उन्हें सिर्फ इतना याद दिलाना चाहता हूं कि वह भारत के विरुद्ध खेल रहे हैं।’ इस पृष्ठभूमि में फायर वर्क्स का होना लाज़मी था। हर रेड ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वह कुछ पिछली यादें लिए हुए हो। डिफेंडर्स रेडर्स के मुंह पर दांव का जश्न मना रहे थे। रेडर्स रुककर उकसा रहे थे और थाह ले रहे थे। हर प्वॉइंट के बाद खिलाड़ियों में तू-तू, मैं-मैं की हद तक कहा सुनी हो रही थी। प्रत्येक चुनौती पर दोनों भारतीय व ईरानी बेंचों की तरफ से प्रतिक्रिया हो रही थी। शुरुआती 20 मिनटों के दौरान तो ऐसा लगा जैसे कोई भी सिर्फ जीतना नहीं चाह रहा था बल्कि एक-दूसरे पर हावी होने का प्रयास कर रहा था। आखिरकार जीत भारत की हुई।
मैट पर बहस, उकसाने और पुराना हिसाब चुकता करने की कोशिशों के बावजूद, दोनों प्रतिद्वंदी, जो फाइनल में टकराते रहते हैं, एक-दूसरे को बेहतर करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं, आखिरकार ऐसे खेल का प्रदर्शन करते हैं,जो हमेशा के लिए यादों में समा जाता है। पवन सहरावत ने कहा, ‘हम हमेशा जी जान लगा देते हैं, चाहे हमारे सामने अपना भाई हो या ईरान हो।’ अंत में एक-दूसरे के लिए सम्मान भी रहता है; क्योंकि दोनों टीमों के सदस्य बहुत अच्छे खिलाड़ी भी हैं, तभी तो बार-बार भारत व ईरान फाइनल में पहुंच रहे हैं। जो जापानी मैच देखने आये थे, उन्होंने मंगा को ‘जीवित’ होते हुए देखा। वे स्टेडियम से इस चाहत के साथ बाहर निकले कि वे स्वयं भी कबड्डी खेलेंगे। इससे पहले भारत की महिला टीम को 2018 की चैंपियन ईरान से कड़ी चुनौती मिली। इस उतार-चढ़ाव वाले फाइनल में भारत की परियों ने 3 अंक के मामूली अंतर से स्वर्ण पदक जीता, जबकि पहले हाफ में भारत 22-16 पर 6 अंक की लीड लिए हुए था। दूसरे हाफ में ईरान अधिक आक्रमक हुआ और उसने अंतर को कम किया। 
लेकिन पूजा व संजू देवी ने कड़ी मेहनत करते हुए हर रेड पर एक अंक अर्जित किया और अंतिम सीटी बजने तक भारत ने अपनी बढ़त बनाये रखी, जिससे गोल्ड मेडल उसकी झोली में आ गया। भारत की जीत का श्रेय उसके रेडर्स की ताकत को दिया जा सकता है। ईरान का लेफ्ट डिफेंस काफी कमज़ोर था, जिसका भारत ने भरपूर फायदा उठाया। भारत की कप्तान पुष्पा राणा ने जीत के बाद कहा, ‘हम यहां फिर से गोल्ड लेने के इरादे से आयी थीं और एक टीम के रूप में हमने यह कर दिखाया है।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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