यातायात नियमों में संशोधन से बढ़ेगी जवाबदेही
पंजाब में सड़क दुर्घटनाओं और इनमें होने वाले हताहतों की संख्या पर अंकुश लगाने के लिए यातायात नियमों में परिवर्तन तथा इन्हें और कड़ा किये जाने की कवायद से नि:संदेह अच्छे परिणामों की आशा की जा सकती है। पंजाब परिवहन विभाग की ओर से हाल ही में यातायात नियमों में सुधार करके कुछ ज़रूरी नियमों को जुर्माना अधिनियम से इतर करार दिया गया है जिसके तहत यातायात नियमों के कुछ मामलों में अब सिर्फ जुर्माना भर देने अथवा चालान भुगतने मात्र से छुटकारा नहीं होगा, अपितु इनके लिए बाकायदा अदालतों में मुकद्दमा चलाया जा सकेगा। परिवहन विभाग के एक स्पष्ट निर्देश के अनुसार ऐसे उल्लंघन मामलों को लेकर अब अदालतें ही यह तय करेंगी कि किस मामले में कैसी सज़ा का प्रावधान किया जाना चाहिए। यह भी कि किस मामले में जुर्माने तक की सज़ा मिलनी चाहिए अथवा कौन-सा मामला कानून की नज़र में गम्भीर प्रकृति का है, और कि उसमें कितनी अवधि की जेल का दण्ड दिया जाना चाहिए। इस संबंध में अदालती कार्रवाई मोटर-व्हीकल कानून के तहत चलेगी, और मामले की गम्भीरता को सामने रख कर ही फैसले का महत्व निर्धारित किया जाएगा।
नि:संदेह यह फैसला बहु-पक्षीय और बहु-उद्देश्यीय हो सकता है। इस फैसले के दृष्टिगत एक ओर जहां प्रदेश में यातायात नियमों एवं कानूनों के उल्लंघन की घटनाओं में कमी आने की सम्भावना बनती है, वहीं इसके पालन से प्रदेश में सम्भावित सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आ सकती है। बेशक मौजूदा ढीली कानून व्यवस्था और मौजूदा पीढ़ी के लोगों विशेषकर युवाओं में यातायात नियमों एवं कानूनों के प्रति लापरवाह रवैये के कारण सड़क दुर्घटनाओं में भारी वृद्धि हुई है। पहले तो बड़ी सड़कों पर ही अक्सर ऐसी दुर्घटनाओं की खबरें सुनी जाती थीं, किन्तु अब तो शहरों के भीतरी भागों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसी दुर्घटनाओं की भरमार हो गई है। इन दुर्घटनाओं में मृत्यु होने के समाचार भी अक्सर मिलते रहते हैं। ऐसी दुर्घटनाएं यदा-कदा रोड-रेज़ का रूप भी धारण कर जाती हैं, जिनका परिणाम कई बार लड़ाई-झगड़ों का रूप भी धारण कर जाता है। पंजाब में यातायात नियमों के उल्लंघन के प्रतिदिन 7,000 से अधिक चालान कटते हैं। हरियाणा में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। पंजाब में विगत मास के एक पखवाड़े में गलत वाहन-चालन की 125 रिपोर्ट दर्ज की गईं। गोया निष्कर्ष यह कि यातायात नियमों के छोटे-छोटे उल्लंघन कई बार गम्भीर घटनाओं/दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं जिन पर अंकुश लगाये जाने की अक्सर ज़रूरत महसूस होती रहती है।
इन नये एवं संशोधित नियमों को लागू करने का फैसला बेशक विगत 17 जून से लागू हो चुका है, किन्तु इनके सख्ती से पालन की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो पाई। इसके तहत जहां मौका पर चालान-जुर्माना आदि की तत्काल प्रक्रिया लागू होगी, वहीं ई-प्रक्रिया के अन्तर्गत चालान घरों में भेजे जा सकेंगे। इस संबंधी जारी अधिसूचना के अनुसार चौकों में लाल बत्ती नियमों के उल्लंघन, नशा करके वाहन चलाने, गलत दिशा से गाड़ी चलाने अथवा गति-सीमा का उल्लंघन करने पर वाहन-चालक को भविष्य में कड़े नियमों के अन्तर्गत कार्रवाई किये जाने हेतु तैयार रहना होगा। नये नियमों के तहत कुछ यातायात उल्लंघनों को ़गैर-समझौता-योग्य अपराध की श्रेणी में शुमार किया गया है।
नि:संदेह इन नये संशोधनों के तहत वाहन-चालकों को यातायात नियमों का उल्लंघन बहुत महंगा पड़ सकता है। भविष्य में जहां जुर्माना की राशि बढ़ाई जा सकती है, वहीं अदालती प्रक्रिया के अन्तर्गत जेल की सज़ा का प्रावधान भी सहन करना पड़ सकता है। असल में यातायात नियमों के उल्लंघन का मामला अब कोई वैयक्तिक नहीं रहा, अपितु संस्थागत हो गया है। उल्लंघन करने वाले सोचते हैं, चलो कोई बात नहीं। अगली बार पालन कर लेंगे। वहीं प्रशासनिक तंत्र पर भी कोई जवाबदेही लागू नहीं होती। कर्मचारी चालान करने लगें, तो आटे के साथ घुन को भी पीस देते हैं, अन्यथा उनके सामने से पहाड़ भी चल कर गुज़र जाए, तो किसी की नींद नहीं खुलती। हम समझते हैं कि व्यवस्था में सुधार लाने हेतु एक ओर जहां कानून के धरातल पर ऐसी प्रतिबद्धता की बड़ी आवश्यकता थी, वहीं सामाजिक और जन-साधारण के बीच नियमों/कानूनों के पालन की जागृति पैदा करना भी उतना ही लाज़िमी है। लोगों विशेषकर युवा वर्ग को कानून के प्रति अवहेलना और तिरस्कार की भावना का त्याग करना बहुत ज़रूरी है। कानून का पालन करने की आदत से राष्ट्र-निर्माण की भावना का उपजना भी स्वत: बहुत स्वाभाविक हो जाता है। हम समझते हैं कि यातायात नियमों में किया गया मौजूदा संशोधन भविष्य में कई पक्षों से लाभकारी हो गुज़रने की बड़ी सम्भावना है।



