शहरों के नाम ‘पुर’, ‘बाद’ व ‘गंज’ पर खत्म क्यों होते हैं ?

दीदी, अपने देश का नक्शा देखते हुए मैंने एक खास बात नोट की है कि बहुत से शहरों के नाम ‘पुर’, ‘बाद’ या ‘गंज’ पर समाप्त होते हैं।’
‘हां यह बात तो है, जैसे कानपुर, नागपुर आदि ‘पुर’ पर अंत करते हैं।’
‘मुरादाबाद, गाज़ियाबाद आदि ‘बाद’ पर खत्म होते हैं।’
‘और फिर किशनगंज (बिहार), शाहगंज (उत्तर प्रदेश) आदि भी हैं।’
‘यह सब तो सही है, मगर ऐसा है क्यों?’
‘इन सबके खास कारण हैं। दरअसल, ‘पुर’, ‘बाद’ व ‘गंज’ किसी भी क्षेत्र के शहरों के ऐतिहासिक, भाषाई व सांस्कृतिक युगों को प्रतिविम्बित करते हैं, जहां वह स्थापित हुए।’
‘मसलन?’
‘पुर संस्कृत शब्द पुरम से लिया गया है, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है। इसका अर्थ होता है किलाबंद शहर यानी जहां शासक का किला हो और शहर चार दीवारी के अंदर हो, जैसे जयपुर, उदयपुर आदि। शासकों के किले तो अब भी बहुत जगह मौजूद हैं, शहरों के विस्तार के कारण अब उनकी दीवारें लगभग लुप्त हो गईं हैं। वैसे आधुनिक युग में दीवारों की ज़रूरत भी नहीं है। फिर इन शाही शहरों से प्रेरित होकर उन शहरों, कस्बों या गांवों के नामों में भी पुर लगा दिया गया, जहां राजा का किला न था।’
‘बाद क्यों लगाया जाता है?’
‘बाद फ़ारसी शब्द आबाद से लिया गया है, जिसका अर्थ वैसे तो यह होता है कि जहां लोग रहते हों, लेकिन इसे विशेषरूप से आब यानी पानी से जोड़ा जाता है। मतलब यह है कि वह आबादी जो पानी के पास बसी हो। इसलिए तुम देखोगे कि जिन शहरों के नाम में बाद लगा होता है वह अक्सर नदी के किनारे या उसके आसपास बसे होते हैं।
‘जैसे अहमदाबाद साबरमती के पास, गाज़ियाबाद हिंडन नदी के पास, हैदराबाद हुसैन सागर के पास।’
‘इलाहाबाद का नाम अब तो प्रयागराज कर दिया गया, लेकिन वह भी गंगा किनारे बसा है।’
‘और गंज क्यों लगाया जाता है?’ 
‘गंज भी ़फारसी शब्द है। जिस जगह राजा का खज़ाना रखा जाता था, उस जगह के नाम के आगे गंज लगाया जाता था। लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आ गया है। अनाज मंडी, कमर्शियल हब या व्यापार केंद्रों को भी गंज कहा जाने लगा है। यह परिवर्तन खासतौर से अंग्रेजों के ज़माने में आया।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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