धूप सेकने वाली शाकाहारी शार्क
धूप सेंकने वाली शार्क विश्व की दैत्याकार मछलियों में से एक है। यह ह्नेल शार्क के बाद सबसे बड़ी मछली मानी जाती है। यह सागर में बहुत बड़ी संख्या में मिलती है तथा इसे इसके विशालकाय गलफड़ों की दरारों के द्वारा सरलता से पहचान लिया जाता है। धूप सेंकने वाली शार्क मछली विश्व के प्राय: सभी सागरों एवं महासागरों में पायी जाती है, किन्तु समशीतोष्ण सागरों में यह बहुतायत से देखने को मिलती है। उत्तरी अटलांटिक सागर, आयरलैंड के पश्चिमी तटों पर तथा स्कॉटलैंड के सागर तटों पर इसकी संख्या सर्वाधिक है। यहां इसे व्यावसायिक रूप से पकड़ा जाता है। इसके साथ ही यह न्यू इंग्लैंड, केलीफोर्निया, पेरू और इक्वाडोर के सागर तटों पर भी पर्याप्त संख्या में मिलती है व इन स्थानों पर भी यह व्यावसायिक उद्देश्य से पकड़ी जाती है। धूप सेकने वाली शार्क अपना अधिकांश समय सागर की सतह पर व्यतीत करती है। इस समय इसे देखने पर ऐसा लगता है, मानो यह धूप सेंक रही हो। इसीलिए इसे यह नाम दिया गया है। इसका शिकार भी समुद्र की सतह पर तैरते समय ही हारपून द्वारा किया जाता है। धूप सेंकने वाली शार्क का शिकार मुख्य रूप से इसके यकृत के लिए किया जाता है। इसके यकृत से निकला हुआ तेल ‘कोड-लिवर आयल’ बड़ा उपयोगी होता है और मुख्य रूप से चमड़ा निर्माण में काम आता है।
धूप सेंकने वाली शार्क एक आलसी समुद्री जीव है। यह गर्मियों के मौसम में अकेली, जोड़े में या साठ-सत्तर के झुंड में सागर की सतह पर आती है और बहुत धीमी गति से तैरती है। धूप सेंकने वाली शार्क सर्दियों में कभी नहीं दिखाई देती। अत: यह भोजन करना बंद कर देती है और गहराई में चली जाती है तथा लंबे समय के लिए गहरी शीतकालीन निद्रा लेती है। धूप सेंकने वाली शार्क एक दैत्याकार मछली है। इसकी लंबाई आठ मीटर से लेकर साढ़े तेरह मीटर तक होती है। नौ मीटर लंबी शार्क सामान्य रूप से और बहुतायत से मिलती है। धूप सेंकने वाली शार्क के शरीर का रंग नीले-भूरे से लेकर भूरा-कत्थई तक होता है। कभी-कभी काले रंग की धूप सेंकने वाली शार्क भी देखने को मिल जाती है, किंतु सभी का, पेट के आसपास का हिस्सा अर्थात नीचे का भाग सफेदी लिए हुए होता है। इसका ऊपर का जबड़ा नीचे के जबड़े से काफी आगे निकला रहता है, अत: थूथन बहुत लंबा दिखाई देता है। धूप सेंकने वाली शार्क की पीठ के दो मीनपंख एवं पेट का एक मीनपंख होता है। इसका यकृत बहुत बड़ा होता है और वजन में पूरे शरीर के दसवें भाग के बराबर होता है। इसी के सहारे यह सागर की सतह पर बिना कोई श्रम के तैरती रहती है। धूप सेंकने वाली शार्क मछली की रीढ़ की हड्डी में वृक्षों के तनों के समान छल्ले पाए जाते हैं। इन छल्लों के आधार पर इसे दो आयु वर्गों में बांटा जा सकता है। पहला, तीन से पांच आयु वर्ग तथा दूसरा, आठ से नौ आयुवर्ग। दोनों प्रकार के छल्ले जन्म से होते हैं, किन्तु पहले आयुवर्ग के छल्ले दूसरे आयु वर्ग के छल्लों से पूरी तरह भिन्न होते हैैं। इन छल्लों का अध्ययन करके जीव वैज्ञानिकों ने इसके समागम, प्रजनन, जीवन-चक्र एवं आदतों के संबंध में अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की हैं। धूप सेंकने वाली मछली एक शाकाहारी मछली है। यह भोजन प्राप्त करने के लिए सागर की सतह पर अपना मुंह खोल कर धीरे-धीरे आगे बढ़ती है, जिससे ढेर सारा पानी इसके मुंह में समा जाता है। यह पानी इसके गलफड़ों से बाहर निकल आता है, किन्तु गलफड़ों से निकलने के पहले यह संकीर्णकों के संपर्क में आता है। इसके संकीर्णक फिल्टर का कार्य करते हैं। ये पानी से भोजन को अलग कर देते हैं तथा यही भोजन इसके द्वारा निगल लिया जाता है। धूप सेकने वाली शार्क की एक घंटे में 650 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती हे और 410 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।
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