जंगल बैंक में हड़ताल
वाइटी खरगोश ने चंपक वन के जंगल बैंक में अपना बचत खाता खुलवाया था वह अपने बचत खाते में बराबर पैसे जमा करता रहता था।
एक बार उसे कुछ पैसों की ज़रूरत पड़ी। वह पैसे निकालने जंगल बैंक गया तो देखा कि बैंक के दरवाजे पर एक बड़ा सा ताला लटक रहा है।
‘अरे, यह बैंक अभी तक क्यों बंद है?’ वाइटी खरगोश ने अपनी कलाई घड़ी देखते हुए हैरानी से कहा, ‘बैंक खुलने का समय तो हो चुका है’।
बैंक के दरवाजे पर पहरा दे रहे रोबोट ने जवाब दिया, ‘यह बैंक आज नहीं खुलेगा। आज इस बैंक में हड़ताल है। क्या तुम्हें बैनर नहीं दिखाई देता’।
‘हड़ताल है तो हम अपने पैसे बैंक से कैसे निकालेंगे?’ वाइटी ने कहा, ‘मुझे पैसों की आज बहुत ज़रूरत है’।
‘ज़रूरत है तो किसी दूसरे बैंक में जाओ’, रोबोट बोला, ‘यहां भीड़ मत लगाओ’।
‘कैसी बात करते हो तुम, ‘वाइटी ने गुस्से से कहा, ‘क्या हम अपने पैसे इसीलिए इस बैंक में जमा करते हैं कि हमें समय पर पैसा न मिले।’
तभी वहां कुछ और जानवर अपने अपने पैसे निकालने पहुंच गए।
‘आज बैंक में हड़ताल है’ का बड़ा से बैनर और दरवाजे पर ताला देखकर वे लोग भी हो हल्ला करने लगे।
रोबोट ने सबको शांत करते हुए कहा, ‘यहां हो हल्ला मचाने से कुछ नहीं होगा। जाओ, जब हड़ताल खत्म हो जाएगी, तब आकर अपने पैसे निकालना।’
‘मगर यह हड़ताल कब खत्म होगी?’ वाइटी खरगोश ने जानना चाहा।
‘यह तो मैं नहीं बता सकता,’ रोबोट ने कहा, ‘लेकिन बैंक के कर्मचारी कह रहे थे कि जब तक उनकी मांगें नहीं पूरी होंगी, हड़ताल खत्म नहीं होगी।’
यह सुनकर वाइटी का मन बुझ गया। दूसरे जानवर भी उदास हो गए और वहां से धीरे-धीरे लौटने लगे। वाइटी भी लौट गया।
‘अरे दोस्त, तुम इस तरह मुंह लटकाए कहां से चले आ रहे हो?’ रास्ते में वाइटी के दोस्त जंपी बंदर ने पूछा।
वाइटी ने उसे सारी बात बताई।
वाइटी की बात सुनकर जंपी ने पूछा, ‘क्या तुम्हारे पास बैंक का एटीएम कार्ड नहीं है?’
‘नहीं, मैंने एटीएम कार्ड नहीं लिया है’ वाइटी बोला।
‘यही तो तुमने गलती की,’ जंपी ने कहा, ‘बैंक में खाता खुलवाते समय ही तुम्हें एटीएम कार्ड के लिए फार्म भर देना चाहिए था।’
‘इससे क्या होता?’ वाइटी ने पूछा।
‘इससे आज पैसे के लिए जो तुम्हें परेशानी हुई, वह नहीं होती’ जंपी ने उसे समझाते हुए कहा, ‘बैंक में हड़ताल होने के बावजूद एटीएम कार्ड से पैसा निकाला जा सकता है। आज का जमाना एटीएम का जमाना है।’
यह कहकर उसने वाइटी को अपना एटीएम कार्ड निकालकर दिखाते हुए कहा, ‘चलो, इससे मैं तुम्हें पैसा निकाल कर दिखाता हूं। मैं पैसा ही निकालने जा रहा था।’
जंपी वाइटी को एक एटीएम बूथ पर ले गया। उसे 5 हजार रूपए निकालने थे। उसने मशीन में कार्ड डालकर रूपए निकाले तो वाइटी हैरान रह गया।
‘अरे वाह,’ वाइटी बोला, ‘अब तो मैं भी एटीएम कार्ड ज़रूर लूंगा।’
इतना कहकर वाइटी जाने लगा तो उसे रोकते हुए जंपी ने पूछा, ‘दोस्त, तुम्हें कितने रूपयों की ज़रूरत थी?’
वाइटी ने सकुचाते हुए बताया, ‘1 हजार रूपयों की’
जंपी ने उसे 1 हजार रूपए देकर कहा, ‘तुम इसे रख लो। मुझे बैंक से निकाल कर बाद में दे देना।’
वाइटी ने उसका शुक्रिया अदा किया।
(उर्वशी)



