‘आप’ की पहलकदमी से राजनीति और गर्माई

यह बात लगभग स्पष्ट होने लगी है कि आगामी फरवरी-मार्च में पंजाब सहित उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर आदि राज्यों के चुनाव होने जा रहे हैं। अलग-अलग तिथियों को होने वाले इन चुनावों के परिणाम इकट्ठे ही निकलने की संभावना है। पंजाब ही एक ऐसा प्रदेश है, जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है। पिछले विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को भारी समर्थन मिला था। इस समय इसकी 117 सदस्यों वाली विधानसभा में 95 सीटें हैं। नए पंजाब के इतिहास में इस तरह समर्थन शायद ही किसी पार्टी को मिला होगा। इसका एक बड़ा कारण पूर्व सरकारों से लोगों में पैदा हुई निराशा थी। इतने बड़े बहुमत से जीतने के कारण पंजाबियों को यह उम्मीद थी कि इस नई पार्टी की बनी सरकार प्रत्येक क्षेत्र में सन्तोषजनक ढंग से कार्य करने में सफल हो जाएगी।
चुनावों को मात्र तीन महीने का समय रह गया है। विगत पूरी अवधि में लोग सरकार द्वारा बनाई योजनाओं और उन पर हो रहे क्रियान्वयन को बड़ी उम्मीद और ध्यान से देखते हैं। जहां सरकार ने लगातार लोगों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए अपनी शुरू की जन-कल्याण योजनाओं को पूरी तरह सफल करार दिया है, वहीं विपक्षी पार्टियां इसकी कार्यशैली और उपलब्धियों पर लगातार बड़ा किन्तु-परन्तु करती रही हैं। पूर्व सरकारों ने भी कई जन-कल्याण नीतियों पर अमल शुरू किया था, जिनमें मुफ्त की योजनाएं भी शामिल थीं। मौजूदा सरकार ने इन्हें आगे बढ़ाते हुए बहुत सी और नई मुफ्त की योजनाओं को सफल बनाने का यत्न किया है परन्तु इसके साथ प्रदेश पर विगत लम्बी अवधि से चढ़ते आ रहे कज़र् में और भी भारी वृद्धि हुई है। अब भी सरकार यह प्रभाव दे रही है कि उसके पुन: सत्ता में आने पर अपनी जन-कल्याण योजनाओं को निरन्तर जारी रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में भी अपनी उपलब्धियां गिना रही है। मुख्यमंत्री स्वयं भी लगातार प्रदेश भर में दौरे करके इसके संबंध में लोगों को बताते रहे हैं और लोगों के साथ जुड़ने का भी यत्न करते रहे हैं। जबकि इसी समय में ज्यादातर विपक्षी पार्टियों ने लगातार इन विषयों पर अपने आलोचनात्मक स्वर को ऊंचा उठाए रखा है।
चुनावों के संबंध में चर्चा तो विगत लम्बी अवधि से होने लगी थी, परन्तु जैसे-जैसे समय नज़दीक आ रहा है, पार्टियां अपनी चुनावी रणनीति बनाने के लिए लगातार सक्रिय दिखाई दे रही हैं, परन्तु आम आदमी  पार्टी ने सबसे पहले अपने उम्मीदवारों के नामों की पहली सूची जारी करके अपनी बढ़त बनाने का यत्न किया है। उसने यह भी कहा है कि अन्य पार्टियां अपने-अपने कारणों के दृष्टिगत और विशेष रूप से पार्टियों के भीतर ब़गावत होने की आशंका को लेकर अभी उम्मीदवार घोषित करने में संकोच कर रही हैं। इस संबंध में सूची जारी करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत  मान ने भी कहा है कि पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों की घोषणा इसलिए समय से पहले की है, ताकि इसके उम्मीदवारों को लोगों में जाकर सरकार की उपलब्धियां बताने के लिए पूरा समय मिल सके। विगत अवधि में सरकार ने गांवों की सड़कों, तालाबों और मूलभूत विकास कार्यों के लिए जो कार्य किया है, वह लोगों को बताया जा सके और इसके अतिरिक्त रोज़गार, आम आदमी क्लीनिक और सरकारी स्कूलों के भीतर किए गए बड़े बदलावों को लोगों के समक्ष पेश किया जाए। उन्होंने यह दावा किया कि पार्टी गांवों और शहरों में करवाए गए अपने विकास कार्यों को लेकर ही जनता में जाएगी।
सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा उम्मीदवारों के संबंध में की गई घोषणा के सामने आने से आगामी दिनों में राजनीतिक हलचल के और भी अधिक तेज़ होने की सम्भावना बन गई है। दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों द्वारा आगामी समय में प्रदेश में नशे और अपराधों को लेकर भी सत्तारूढ़ पार्टी को कटघरे में खड़ा किया जाएगा। हम समझते हैं कि प्रदेश के विकास के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। इसलिए सभी राजनीतिक पार्टियों में प्रतिबद्धता पैदा होना ज़रूरी है। पिछले समूचे घटनाक्रम के दृष्टिगत और राजनीतिक पार्टियों  एवं राजनीतिज्ञों के चरित्र को सामने रख कर ही लोगों को पूरी बुद्धिमत्ता से प्रदेश के विकास को प्राथमिकता देते हुए अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना पड़ेगा।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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