सोनिया द्वारा कांग्रेसियों को एकजुट होकर चुनाव लड़ने का निर्देश


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दिल्ली की कांग्रेस अध्यक्ष की खाली हुई कुर्सी पर किसी योग्य नेता को बिठाने के लिए गत कुछ सप्ताहों से दिल्ली के बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार मिल रही हैं। उल्लेखनीय है कि गत दिनों शीला दीक्षित के निधन के कारण दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी खाली हो गई थी। ऑल इंडिया कांग्रेस वर्किंग कमेटी की दिल्ली इकाई के प्रभारी पी.सी. चाखो जो इन बैठकों में शामिल थे, का कहना है कि सोनिया गांधी को नेताओं ने आश्वासन दिया है कि उनके द्वारा लिया गया फैसला समूची दिल्ली कांग्रेस के नेताओं द्वारा स्वीकार कर लिया जायेगा। कांगे्रस के सूत्रों के अनुसार सुभाष चोपड़ा और जयप्रकाश माकन स्वास्थ्य से जुड़े मामलों के कारण इस पद पर बैठने के इच्छुक नहीं हैं। दिल्ली के आगामी विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बहुत अहम हैं, क्योंकि यह कांग्रेस के लिए दिल्ली में पुन: अपने पांवों पर खड़े होने का अहम अवसर है। 
ममता का एन.आर.सी. के विरुद्ध मोर्चा
एन.आर.सी. की सूची जारी होने के बाद सभी पार्टियों द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि इस सूची से बाहर रखे जाने वाले 19.07 लोगों में से 12 लाख से ज्यादा लोग बंगाली हिन्दू हैं। यह दोष लगाया जा रहा है कि गणना की गलत प्रक्रिया के कारण असम में एन.आर.सी. को अपडेट करने की प्रक्रिया में रुकावट पड़ सकती है। अब सर्वोच्च न्यायालय मामले पर सुनवाई करेगा। भाजपा नेतृत्व के इस ऐलान कि यदि वह पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव जीत जाती है तो दो वर्ष के भीतर राज्य में एन.आर.सी. पर अमल किया जायेगा, के बाद यह मुद्दा राजनीतिक तौर पर गर्मा गया है। भाजपा के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने कहा है कि किसी भी कीमत पर राज्य में एन.आर.सी. लागू नहीं किया जायेगा और असम में एन.आर.सी. जारी करने के लिए केन्द्र सरकार पर दोष लगाया है।
ममता ने दावा किया है कि असम में एन.आर.सी. में से वहां के कानूनी नागरिकों को निकाल दिया गया है। उन्होंने इस बात पर भी हैरानी प्रकट की कि लगभग 1 लाख गोरखा लोगों को भी एन.आर.सी. से बाहर रखा गया है। 
ममता बैनर्जी ने एन.आर.सी. के विरुद्ध रोष-प्रदर्शन करने के लिए वरिष्ठ नेता और शहरी विकास मंत्री फिराद हकीम और राज्यसभा के उप-नेता सुखेन्दु शेखर राय को ज़िम्मेदारी सौंपी है। इस मामले पर पूर्वी राज्यों के सम्पर्क में रहने के लिए उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के नेता और सांसद सुदीप बन्धोपाध्याय को ज़िम्मेदारी सौंपी है कि उत्तर-पूर्वी राज्यों की अलग-अलग पार्टियों तथा देश स्तरीय पार्टियों को एन.आर.सी. के विरुद्ध मोर्चे पर एकजुट किया जाए। 
सोनिया गांधी पुन: सक्रिय
कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद सोनिया गांधी अब उन राज्यों के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं से मिल रही हैं, जहां शीघ्र ही विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इस प्रक्रिया में सोनिया गांधी हरियाणा कांग्रेस की समस्या हल कर रही है और शीघ्र ही दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष का नाम भी घोषित कर देगी। इसी तरह उन्होंने नेतृत्व और राजनीतिक सहायकों से संबंधित मामलों पर अंतिम राय देने के लिए महाराष्ट्र तथा झारखंड के प्रमुख कांग्रेस नेताओं को बुलाया है।  हरियाणा में कुमारी शैलजा ने राज्य कांग्रेस की ज़िम्मेदारी संभाल ली है और राज्य के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर तथा किरण चौधरी अनुपस्थित रहे। परन्तु भुपेन्द्र सिंह हुड्डा, गुलाम नबी आजाद और कुमारी शैलजा ने मौजूद भीड़ को यह आश्वासन दिलाया है कि वह एकजुट होकर ही भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। शैलजा ने ऐलान किया है कि वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव निकट हैं, वहां सोनिया गांधी ने वहां के नेतृत्व को एक-साथ मिलकर चुनाव लड़ने का निर्देश दिया है। सोनिया गांधी ने कहा है कि समय की कमी और चुनौतियां ज्यादा होने के कारण सभी बिना किसी विवाद के एकजुट होकर चुनाव लड़े और अपने-अपने राज्य में बढ़िया परिणाम प्राप्त करें। 
राजस्थान में नौकरशाहों के तबादले
राजस्थान में इस समय शक्ति के दो केन्द्र हैं। पहला राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और दूसरा पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट। इस सब को देखते हुए राज्य के सभी अधिकारी दुविधा में हैं कि अपनी पोस्टिंग के लिए वह किस गुट का संरक्षण लें, क्योंकि मुख्यमंत्री राज्य के प्रशासन में तेज़ी लाने और कानून व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों के अधिकारियों के तबादले करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि ज्यादातर उच्चाधिकारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी हैं और उनको लम्बे समय से जानते हैं। वहीं युवा अधिकारी सचिन पायलट का सहारा देख रहे हैं।  गत दिनों उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट के जन्मदिन पर हज़ारों ही कार्यकर्ता, समर्थक और नेता जयपुर में कांग्रेस के कार्यालय में सचिन पायलट को उनके 42वें जन्मदिवस की बधाई देने पहुंचे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी जैसलमेर यात्रा पर थे, परन्तु उन्होंने ट्वीट द्वारा पायलट को बधाई दी। बहुत सारे अधिकारियों ने पायलट के निवास पर जाकर उनको बधाई दी और वहां पहुंचे कई विधायकों के हाथों में उन अधिकारियों की सूची थी, जिनको वह अपने क्षेत्र या ज़िले में लाना चाहते हैं। इस सूची में सबसे अधिक नाम जयपुर का है, जहां अधिकारियों का तबादला करने की सलाह विधायक महेश जोशी, परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खचारिया और कृषि मंत्री लाल चंद कटारिया द्वारा दी गई है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सभी विधायक यह चाहते हैं कि उनके अधिकारियों का तबादला जयपुर होना चाहिए। (आई.पी.ए.)