देश भर में 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे होते हैं शारीरिक शोषण के शिकार


पटियाला, 16 अक्तूबर (अ.स.) : हिन्दूस्तान में शारीरिक शोषण जुर्म के मामले सिर्फ महिलाओं व लड़कीयों के साथ ही नहीं बल्कि छोटी बच्चियों के साथ भी घटनाएं घटती सामने आती रहती हैं। भारत में 41 प्रतिशत आबादी 18 साल से कम उम्र के बच्चों की है। देश भर में बच्चों के साथ शारीरिक शोषण अपराध में पिछले सालों में बढ़ौतरी होना देशवासियों के लिए गंभीर चिन्ता का विषय है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा साल 2007 से करवाए एक सर्वे अनुसार देश के तररीबन 50 से ज्यादा प्रतिशत बच्चों को जीवन काल में किसी न किसी रूप में शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ता है। हिन्दुस्तान में बच्चों के साथ शारीरिक शोषण संबंधी 2007 में जारी पहली रिपोर्ट अनुसार 72 प्रतिशत बच्चों द्वारा शारीरिक शोषण संबंधी किसी के पास शिकायत नहीं की गई व सिर्फ 3 द्वारा इस संबंधी पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई गई। 31 प्रतिशत शारीरिक शोषण संबंधी आरोपी निकट संबंधी व पड़ोसी पाए गए। शरीरिक शोषण की रोकथाम संबंधी साल 2012 में स्पैशल कानून लाया गया। जिसके अनुसार 18 साल से कम उम्र के लड़के व लड़कियों के साथ किसी भी तरह का शारिरिक शोषण एक संगीन अपराध माना जाएगा। एलोपैथिक डाक्टरों की राष्ट्रीय संस्था इंडियन मैडीकल एसोसिएशन द्वारा यूनिसैफ के सहयोग के साथ कुछ साल पहले डाक्टरों व आम लोगों को इस संबंधी जागरुक करने व इसकी रोकथाम हेतु राष्ट्रीय स्तर पर चेतना प्रोग्राम चलाया गया। केन्द्र सरकार कि हिदायतों अनुसार शारीरिक शोषण व और कई तरह से शिकार महिलाओं के लिए पंजाब सरकार द्वारा वन स्टाफ सैंटर खोले गए हैं। ऐसे सैंटरों द्वारा जरुरतमंद सेवाएं तसल्लीवख्श तरीके के साथ दी जा रही हैं, इस बारे पटियाला के ऐसे सैंटर से पता चला है कि यह सैंटर सिर्फ नाम के ही हैं व यहां जरुरी सुविधाएं व स्टाफ अधूरे ही हैं। इस संबंधी फौरेंसिक मैडीसन महिरों की राज्य इकाई पंजाब अकादमी ऑफ फौरेंसिक मैडीसन एंड टैक्नोलोजी के चौथी बार बने प्रधान व नैशनल फैलोशिल अवार्डी डा. डी. एस. भूल्लर का कहना है कि महिलाओं व बच्चों के साथ शारीरिक शोषण संबंधी सुनवाई, इलाज व कानूनी सेवाएं देने संबंधी ऐसे सैंटर पटियाला के मैडीकल कालेज में स्थापित किया जाना जरुरी है, जहां ऐसी सेवाएं देने हेतु हर तरह के डाक्टर किसी भी समय मौजूद रहते हैं। डा. भुल्लर अनुसार साल 2015 में केन्द्र सरकार स्वास्थ्य व परिवार भलाई विभाग द्वारा चंडीगढ़ में दो दिनों का ट्रैनिंग कैंप आयोजित किया गया था, जिसमें मैडीकल कालेज व राजिन्दरा अस्पताल के फौरेंसिक मैडीसन,  व मानसिक विभाग के डाक्टरों को इस ट्रैनिंग के लिए खास तौर पर भेजा गया था। परन्तु ट्रैनिंग उपरांत आज तक उन डाक्टरों की सेवाएं इस संबंध में नहीं ली गई व सरकार द्वारा लाखों रुपए खर्च कर डाक्टरों की दी ऐसी ट्रैनिंग व्यर्थ सिद्ध हो रही है। डा. भू्ल्लर अनुसार अकादमी द्वारा अपने इस साल दो लक्ष्यों के अधीन पंजाब सरकार द्वार राजिन्द्रा अस्पताल में नई बनी इमारत में ऐसा सैल लोक हित में स्थापित कर के लिए जल्द मैमोरैंडम भेजा जाएगा जिससे पीड़ितों को मौके पर सही इलाज व इंसाफ दिया जा सके।