बढ़ रहीं राजनीतिक गतिविधियां

पंजाब में चुनाव मैदान पूरी तरह गर्माना शुरू हो गया है। अलग-अलग पार्टियों के उम्मीदवारों द्वारा बड़े उत्साह एवं धूमधाम से अपने नामांकन पत्र दाखिल करवाए जा रहे हैं। कुछ दिनों में ही यह प्रक्रिया भी पूर्ण हो जाएगी। एक ओर भीषण गर्मी पड़नी शुरू हो गई है। दूसरी ओर संबंधित राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में दिन-रात मतदाताओं से सम्पर्क करने में व्यस्त हैं। चाहे ये लोकसभा के चुनाव ही हैं, परन्तु इसके बावजूद इस बार पंजाब में प्रशासन चला रही आम आदमी पार्टी की इन चुनावों से परीक्षा भी होगी। 
लगभग विगत दो वर्ष से यहां भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार है। दो वर्ष पहले पंजाब के लोगों ने इस पार्टी के प्रति भारी समर्थन दिया था इसलिए विधनसभा में इसे अपनी उम्मीद से भी अधिक सीटें मिली थीं। आम लोगों ने सरकार से बड़ी उम्मीदें रखी थीं। विगत दशकों की तत्कालीन सरकारों ने अपने समय में चाहे प्रदेश की बेहतरी के लिए अपना योगदान डालने का यत्न अवश्य किया था, परन्तु इसके बावजूद प्रदेश के हालात में व्यापक सुधार न किया जा सका। इसकी ज़रूरतें पूरी नहीं हो सकीं, अपितु ये कमियों में बदल गईं। प्रत्येक चरण पर, हर तरफ फैले भ्रष्टाचार ने जन-साधारण के नाक में दम कर दिया था। नशे पंजाब की जवानी को निगल रहे थे। बेरोज़गारी ने अधिकतर युवाओं को विदेशों में जाने के लिए मजबूर कर दिया था। हर तरफ अव्यवस्था के दृश्य दिखाई दे रहे थे। रेत-बजरी तथा शराब के क्षेत्र में इस प्रकार भ्रष्टाचार फैल गया था कि उसने प्रदेश की आर्थिकता को भारी नुकसान पहुंचाया था। 
तत्कालीन सरकारों ने लोगों को लुभाने के लिए मुफ्त की रेवड़ियां देने की घोषणाएं अवश्य की थीं, परन्तु क्रियात्मक रूप में ये प्रदेश के लिए बहुत घाटे वाला सौदा रहा है। इस छोटे से प्रदेश पर इतना अधिक ऋण चढ़ चुका है कि यहां प्रत्येक पैदा होता बच्चा कज़ाई ही पैदा होता है। इसे गलत योजनाबंदी की निशानी ही कहा जा सकता है। ऐसे हालात में बड़ी आशाओं तथा उम्मीदों से लोगों ने नई सरकार को चुना था, परन्तु उनकी आशाएं इतनी जल्दी इस कद्र निराशा में बदल जाएंगी और उम्मीदें इतनी जल्दी ध्वस्त हो जाएंगी, इसकी उन्हें आशा नहीं थी। पिछली सरकारों की भांति इस सरकार ने भी मुफ्त की योजनाओं की घोषणाओं से लोगों को भ्रमित करने का यत्न अवश्य किया है, परन्तु अपनी ओर से किये जा रहे अथाह खर्च को सीमित न कर सकने तथा आय से कोई अच्छे तथा उचित तरीके न ढूंढ सकने के कारण आज प्रदेश  आर्थिक मंदी में विचरण करने लगा है। दो वर्षों की अवधि में ही इस सरकार ने अपने काम चलाने के लिए इतना ऋण ले लिया है कि आज यह बड़ी चिन्ता का विषय ही नहीं अपितु लोगों में निराशा का कारण भी बन चुका है। 
सरकार की ओर से बयानों के माध्यम से बड़ी-बड़ी डींगें हांक कर उपलब्धियां गिनाई जा रही हैं, परन्तु क्रियात्मक रूप में इनका कोई निष्कर्ष निकला दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे माहौल में इन चुनावों में लोगों को इस सरकार को उसका सही रूप दिखाने का अवसर अवश्य मिला है। नि:संदेह उन्हें अपने इस अधिकार का इस्तेमाल खुल कर करना चाहिए। इस संबंध में यदि कोई वर्ग या संगठन बाधा डालने की यत्न करते हैं तो वे ऐसा करके लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही आघात पहुंचा रहे होंगे। किसी भी पार्टी के विरुद्ध रोष प्रकट करने वाले पक्षों को अपनी सीमा में रह कर ही ऐसा करना चाहिए। इस संबंध में पंजाब के मुख्य चुनाव अधिकारी सिबिन सी. ने कुछ भावपूर्ण बातें कही हैं तथा कड़े निर्देश भी दिये हैं। उन्होंने यह कहा है कि भारतीय निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित बनाई जानी चाहिए। प्रदेश में किसी को भी कानून व्यवस्था भंग करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती  तथा न ही प्रचार में किसी तरह का विघ्न डाला जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिये हैं कि प्रदेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा बिना किसी दबाव के चुनाव करवाये जाना ज़रूरी है।
हम समझते हैं कि चुनावों के दौरान किसी भी संबंधित पक्ष के लोकतांत्रिक अधिकारों में विघ्न नहीं डाला जाना चाहिए। इसके साथ ही जहां लोग स्वतंत्रतापूर्ण अपने मत के अधिकार का उपयोग कर सकेंगे, वहीं प्रदेश का धूमिल हुआ दृश्य भी बड़ी सीमा तक साफ एवं स्पष्ट हो सकेगा।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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