स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग : समय की ज़रूरत
आज 12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष
योग भारत की पुरातन विरासत है, यह शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। प्रत्येक वर्ष 21 जून को विश्व भर में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। प्रिय पाठको, आज के दौर में जहां इन्सान की उम्र बढ़ती है, वहीं सबसे बड़ी चुनौती इस बढ़ती उम्र में स्वयं को स्वस्थ, सक्रिय और खुशहाल रखने की है। बुढ़ापा बीमारी नहीं, ज़िन्दगी का स्वर्णिम दौर है। इसे दरपेश चुनौतियों से निपटने का सबसे उत्तम और प्राकृतिक हल है योग। बढ़ती उम्र के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक समस्या को हल करने के लिए इस वर्ष का अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस ‘स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग’ विषय के तहत मनाया जा रहा है।
आज की तेज़ रफ्तार ज़िन्दगी में लोग तनाव, माइग्रेन, ब्लड प्रैशर, शुगर, जोड़ों के दर्द और दिल की बीमारियों जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं। बढ़ती उम्र के साथ-साथ यह समस्याएं और भी अधिक गम्भीर रूप धारण कर लेती हैं। योग न सिर्फ शरीर को लचकीला और मज़बूत बनाता है, अपितु मन को शांत और एकाग्र भी रखता है। स्वस्थ बुढ़ापा न सिर्फ लम्बी उम्र की निशानी है, अपितु स्वस्थ, सक्रिय और खुशहाल जीवन जीने की एक कला है। इसका महत्त्व हमें स्वयं भी समझना चाहिए और अन्यों को भी समझाना पड़ेगा। बढ़ती उम्र के साथ-साथ शरीर और मन में कई तरह के बदलाव आते हैं। योग बुज़ुर्गों और बढ़ती उम्र के लोगों के लिए एक संजीवनी औषधि का काम करता है।
शारीरिक लचकता और मज़बूती
बुढ़ापा बढ़ने से जोड़ों के दर्द और जकड़न आम बात है। लचकता और ताकत एक-दूसरे के विरोधी नहीं। जितनी मांसपेशियां मज़बूत होंगी, उतने ही सुरक्षित ढंग से स्ट्रैच हो सकेंगी। योगा में स्ट्रैच, बैलेंस और मांसपेशियों को होल्ड करने से शरीर धीरे-धीरे खुलता है और शक्तिशाली बनता है। योगासन मांसपेशियों और टिशुओं को धीरे-धीरे खींचते हैं। प्रतिदिन 20-30 सैकेंड एक ही योग मुद्रा से मांसपेशी फाइबर लम्बे होते हैं। हिप्प, कंधे, रीढ़ के जोड़ों में साइनोवियल फ्लूइड बढ़ता है, जिससे खिचाव कम होता है। गहरी सांस लेने से शरीर रिलैक्स होता है और मांसपेशियां और खुलती हैं। ज़ोर लगाने से उल्टा अकड़ जाती हैं। लचकता बढ़ाने के लिए भुजंगासन, पश्चिमोत्तानासन, कपोतासन, त्रिकोणासन सबसे उत्तरम आसन हैं। इसलिए पहलवाल भी योग करते हैं। यह शारीरिक लचकता और मज़बूती के लिए बहुत प्रभावशील है।
मानसिक शांति और तनाव मुक्ति
बुढ़ापे में अकेलापन, चिंता और डिप्रैशन जैसी समस्याएं घेर लेती हैं। प्राणायाम (सांस लेने की क्रियाएं) और ध्यान (मैडीटेशन) मन को शांत रखते हैं और मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारते हैं। योग शरीर का तनाव दूर करता है, प्राणायाम मन का। दोनों मिलकर नर्वस सिस्टम को ‘फाइट और फ्लाइट’ से ‘रैस्ट एंड डाइजेस्ट’ मोड में लेकर आते हैं। मानसिक शांति और तनाव को दूर करने के लिए अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, बालासन, शवासन सबसे अच्छा और कारगर अभ्यास है।
बीमारियों से बचाव के लिए योग शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने, तनाव कम करने और अंगों को सही ढंग से काम करने में सहायता करता है। प्रतिदिन योग करने से ब्लड प्रैशर नियंत्रण में रहता है, दिल की बीमारियों का ़खतरा कम होता है और शुगर जैसी पुरानी बीमारी को कंट्रोल करना आसान हो जाता है। पाचनतंत्र मज़बूत करने के लिए भुजंगासन (यह फेफड़े खोलता, सांस नली साफ करता, छाती की इंफैक्शन से बचाता है), मत्स्यासन (यह थाइराइड) और पैराथाइराइड ग्लैंड एक्टिव, गले की इंफैक्शन कम करता है), सेतु बंधासन (खून का दौरा सुधारता है, दिल और फेफड़े मज़बूत करता है), त्रिकोणासन (यह पाचन ठीक करता है और कब्ज़ और एसीडिटी से बचाता है)। सांस के व्यायाम के लिए आप प्रतिदिन अनुलोम-विलोम (यह नाक की नली साफ करता है, ऑक्सीजन बढ़ाता है, फेफड़ों की कार्य समर्था बढ़ाता है और ज़ुकाम-खांसी को रोकता है), कपालभाती (यह पेट के आंतरिक अंग डीटोक्स, लीवर-किडनी साफ करता है और मोटापे से बचाता है), भसत्रिका (शरीर गर्म, खून साफ, थकावट दूर, ठंड में विशेष लाभदायक है) का अभ्यास करना चाहिए।
बुढ़ापा काटना नहीं, जीना है। प्रतिदिन सैर आपको दवाइयों से दूर और पौत्र-पौत्रियों से खेलने में योग्य बनाए रखेगी। पांव चलेंगे तो ज़िन्दगी चलेगी। बुढ़ापे में स्वस्थ रहने के लिए आपको जिम या महंगे साधनों की ज़रूरत नहीं। केवल एक चादर या मैट की ज़रूरत है जिस पर बैठ कर आपने योग करना है। हमारे बुज़ुर्ग अक्सर यह कहा करते थे ‘चलता पानी निर्मल, बहता पानी गंदा।’ 50 वर्ष से ऊपर की उम्र वालों के लिए प्रतिदिन की सैर दिल, हड्डियों और दिमाग तीनों को जवान रखती है।
इस वर्ष-2026 के अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य राष्ट्रीय समारोह पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक रैड रोड में आज अभिप्राय 21 जून, 2026 को हो रहा है। जहां भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस विशाल समारोह का नेतृत्व करेंगे, वहीं देश और विदेश से हज़ारों योग प्रेमी इस समारोह में भाग लेंगे।
योग किसी एक उम्र वर्ग के लिए नहीं, अपितु प्रत्येक व्यक्ति के लिए है। उम्र चाहे कोई भी हो, योग को अपनाकर हम सभी स्वस्थ, खुशहाल और ऊर्जावान जीवन व्यतीत कर सकते हैं। यदि युवा आज से ही योग अपना लें, तो वह भविष्य में कई बीमारियों से बच सकते हैं। इसी तरह बुज़ुर्ग प्रतिदिन योग कर अपनी शारीरिक समर्था और आत्म-विश्वास को बरकरार रख सकते हैं। आओ, इस योग दिवस पर हम सभी प्रण करें कि योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएंगे ताकि हमारा वर्तमान और भविष्य (बुढ़ापा) दोनों स्वस्थ और खुशहाल रहे और हमारा अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का उद्देश्य सफल हो सके।
-एफ.एम. 70, मॉडल हाऊस, जालन्धर।
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