ज़ोजिला टनल का महत्व क्या है ?

‘दीदी, मैंने सुना है कि भारत ने ऊंचाई पर संसार का सबसे लम्बा टनल बनाने में कामयाबी हासिल की है।’
‘हां, यह सफलता ज़ोजिला टनल के निर्माण से 9 जून 2026 को मिली।’
‘ज़ोजिला टनल कितनी ऊंचाई पर और कितना लम्बा टनल है?’
‘यह 11,578 फीट की ऊंचाई पर बना 13.14 किमी लम्बा टनल है और इसे बनाने की लागत 6,800 करोड़ रूपये आयी है। यह कश्मीर घाटी व लद्दाख को हर मौसम में जोड़े रखेगा, जबकि इस क्षेत्र में यात्रा करना बहुत कठिन हुआ करता था। टनल का निर्माण भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए ऐतिहासिक है।’ 
‘किस लिहाज़ से?’
‘ज़ोजिला टनल भारत का पहला सबसे लम्बा एकल-ट्यूब  द्वि-दिशा टनल है और अनेक कारणों से इंजीनियरिंग शाहकार है। कठिन भौगौलिक स्थितियों की वजह से अंडरग्राउंड कार्य बहुत अधिक चुनौतीपूर्ण था। दरअसल, ज़ोजिला टनल के आसपास का पश्चिमी हिमालय रेंज इंजीनियरों और योजनाकारों के लिए मुश्किल स्थान रहा है, भंगुर भू-संरचना, संवेदनशील चट्टान संरचना, हिमस्खलन की आशंका वाला भूभाग और कठोर जाड़ों की वजह से, जिससे प्रोजेक्ट को पूरा करना जटिल था।’ 
‘यह तो वास्तव में बहुत बड़ी चुनौती थी।’
‘ज़ोजिला टनल केंद्रीय कश्मीर के गंदरबल ज़िले में सोनमर्ग के बालटाल को लदाख के ड्रास ज़िले में मीनामर्ग को जोड़ता है। बालटाल में ज़ोजिला टनल तक सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए सोनमर्ग में अतिरिक्त सड़कें, तीन पुल और दो टनल भी भी बनाने पड़े 31 किमी की दूरी पर। इन्हें इस तरह से डिज़ाइन किया गया है ताकि जाड़ों की कठिनाई, हिमस्खलन व स्नो स्लाइड्स को बर्दाश्त किया जा सके, जो इस क्षेत्र में अक्सर रिपोर्ट होते हैं।’ 
‘स्थानीय लोगों के लिए तो ज़ोजिला टनल बहुत फायदेमंद होगा।’
‘इसका महत्व सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं है बल्कि सेना के लिए भी बहुत अधिक है। जाड़ों में खराब मौसम की वजह से लदाख 4-6 माह के लिए कश्मीर घाटी से कटा रहता था। अब ऐसा नहीं होगा। फिर 1947 से ही भारत का चीन व पाकिस्तान से सैन्य टकराव रहा है, जिनमें इस क्षेत्र में खराब कनेक्टिविटी के कारण हमारी सैन्य प्रतिक्रिया प्रभावित होती थी। यह कमी भी दूर हो जायेगी।’
‘क्या ज़ोजिला टनल नागरिकों के लिए खुल गया है?’ 
‘अभी दो वर्ष का समय और लगेगा क्योंकि अभी काफी काम शेष है, जैसे पानी के रिसाव को रोकना, बेंचिंग (मिट्टी धंसने से रोकने के लिए खुदाई करते समय सीढ़ीनुमा कटाई करना और इलेक्ट्रॉनिक लेआउट।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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