राजनीतिक गतिविधियां
ज्यों-ज्यों पंजाब विधानसभा के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं वैसे-वैसे प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों में भी वृद्धि होती जा रही है। इस समय भिन्न-भिन्न स्तर पर राजनीतिक पार्टियां चुनावों की तैयारी के लिए कार्यशील हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पंजाब के तीन दिवसीय दौरे पर आए हुए हैं। उन्होंने पहले दिन अमृतसर से अपने दौरे की शुरूआत करते हुए श्री हरिमंदिर साहिब और दुर्ग्याना मंदिर में अपनी श्रद्धा के पुष्प अर्पित किए हैं। जालन्धर और लुधियाना में भी उन्होंने कई कार्यक्रमों में भाग लेना है। अमृतसर में उनके आगमन पर जिस तरह भाजपा से संबंधित नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा गर्मजोशी से उनका स्वागत किया गया है, उससे ये संकेत मिलते हैं कि भाजपा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के पंजाब के इस पहले दौरे को पार्टी के प्रचार के लिए अधिक से अधिक उपयोग करने का यत्न कर रही है। नि:संदेह नितिन नबीन के इस दौरे से भाजपा के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में चुनाव के लिए और अधिक उत्साह पैदा हो जाएगा।
दूसरी तरफ पंजाब कांग्रेस जिसकी पिछले समय में चुनाव के पक्ष से प्रदेश में बहुत कम सक्रियता देखी गई है, आगामी दिनों में उसके भी अधिक सक्रिय होने की सम्भावनाएं हैं। विगत दिवस नई दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब विधानसभा के चुनाव में पार्टी को सक्रिय करने के लिए और पार्टी की आंतरिक गुटबंदी को खत्म करने के लिए कई बैठकें की हैं। वरिष्ठ नेताओं से लेकर निचले स्तर तक के नेताओं को दिल्ली में बुला कर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति संबंधी और कांग्रेस पार्टी की सम्भावनाओं के बारे में चर्चा की गई है। पंजाब के कांग्रेसियों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए पार्टी हाईकमान द्वारा 3 आब्ज़र्वर भी नियुक्त किए गए थे। इन आब्ज़र्वरों ने विचार-चर्चा पूर्ण करके हाईकमान को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। उम्मीद की जा रही है कि अब किसी भी पल कांग्रेस की हाईकमान द्वारा पंजाब कांग्रेस के संबंध में अहम फैसले लिए जा सकते हैं। भिन्न-भिन्न नेताओं के चयन के दृष्टिगत अलग-अलग ज़िम्मेदारियां लगाई जा सकती हैं। पार्टी के संगठन में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। इस कवायद के बाद प्रदेश में नि:संदेह कांग्रेस की गतिविधियों में तेज़ी आएगी। पंजाब की पुरानी क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणि अकाली दल चाहे इस समय कई गुटों में विभाजित है परन्तु उसके अलग-अलग गुटों ने भी अपने-अपने रूप में चुनाव के लिए तैयारी शुरू की है। शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे) और शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) ने चुनाव में एक दूसरे से तालमेल करने के लिए अपने-अपने स्तर पर पुन: कमेटियां बनाने की घोषणा की है। इन दलों के बीच एकता और तालमेल के पहले किए गए यत्न असफल रहे थे, परन्तु अब उनकी ओर से चुनाव के लिए तालमेल करने के लिए पुन: गम्भीरता से यत्न शुरू किए गए हैं।
प्रदेश में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी विधानसभा चुनाव को लेकर पहले ही बहुत सक्रियता से काम करती आ रही है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविन्द केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा विगत दिवस प्रदेश के व्यापारियों और उद्योगपतियों के साथ कुछ बैठकें की गई हैं। इसके अतिरिक्त कुछ स्थानों पर रोड शो भी किए गए हैं। पार्टी ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को पुन: मुख्यमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी क्षेत्र में बैठकें और रैलियां करने के लिए भी तैयारियां कर रही है।
राजनीतिक पार्टियों की उपरोक्त गतिविधियों के दृष्टिगत हम कह सकते हैं कि पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए लगभग प्रदेश की अब सभी प्रमुख पार्टियां सक्रिय हुई दिखाई दे रही हैं। इस समय के दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और प्रदेश के सिख मंत्रियों और विधायकों संबंधी जो कुछ आदेश दिए गए हैं और इस कारण प्रदेश में जो धार्मिक और राजनीतिक विवाद पैदा हुआ है, किसी न किसी स्तर पर यह भी चुनाव को प्रभावित कर सकता है।
परन्तु पंजाब की बेहतरी चाहने वाले लोगों की यह इच्छा है कि प्रदेश के सभी राजनीतिक और धार्मिक संगठन अपने-अपने कार्य क्षेत्रों तक सीमित रह कर काम करें और ़गैर-कानूनी टकराव से बचने का यत्न करें। पंजाब विधानसभा चुनाव प्रदेश के लोगों के ज्वलंत मुद्दों पर ही लड़े जाएंगे। सभी राजनीतिक पार्टियां जो पंजाब में चुनाव लड़ना चाहती हैं, उन्हें पंजाब के विकास संबंधी और पंजाब को दरपेश समस्याओं के हल संबंधी अपने-अपने कार्यक्रम लेकर लोगों के सामने आना चाहिए। चुनाव के संबंध में एक स्वस्थ संवाद की सृजना की जानी चाहिए और उस संवाद में सभी पार्टियों को समुचित ढंग से भाग लेना चाहिए। इस तरह ही पंजाब विधानसभा के चुनाव को बेहतर ढंग से लड़ा जा सकेगा और प्रदेश के विकास के लिए एक बेहतर सरकार बनने की उम्मीद की जा सकती है।

