देश की वित्तीय समावेश यात्रा का आधार ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’
वित्तीय समावेश का वास्तविक उद्देश्य व्यक्तियों और व्यवसायों को सशक्त बनाने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, गरीबी कम करने और सामाजिक समानता को प्रोत्साहन देने की इसकी क्षमता में निहित है। वित्तीय समावेश 2030 के लिए निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में से कम से कम 7 को प्राप्त करने के प्रमुख कारकों में से एक है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए सरकार समर्थित वित्तीय समावेश अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका कारण है— देश की अत्यधिक विविधता, भौगोलिक स्थिति और जनसंख्या। इन बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 28 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) की शुरुआत की थी, जो उनके द्वारा घोषित सबसे पहली योजनाओं में से एक थी। इस योजना का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच प्रदान करना था, ताकि प्रत्येक परिवार का, विशेष रूप से कमज़ोर और आर्थिक रूप से वंचित समुदाय के लोगों का, औपचारिक वित्तीय प्रणाली में भाग लेना सुनिश्चित हो सके।
पिछले 11 वर्षों में पीएमजेडीवाई दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय समावेश कार्यक्रम के रूप में विकसित हुआ है, जो बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच की सुविधा के बीच की खाई को पाटकर जीवन में बदलाव ला रहा है। आरबीआई के एफआई-सूचकांक का मूल्य मार्च 2017 के 43.4 से बढ़कर मार्च 2025 के लिए 67.0 हो गया है। सूचकांक में वृद्धि वित्तीय समावेश और वित्तीय साक्षरता पहलों के सुदृढ़ होने का संकेत देती है।
पीएमजेडीवाई से पहले, देश के केवल 59 प्रतिशत परिवारों और 35 प्रतिशत वयस्कों के पास बैंक खाते थे जबकि योजना के 11 वर्षों के बाद लगभग 100 प्रतिशत परिवारों और 90 प्रतिशत से अधिक वयस्कों के पास बैंक खाते हैं। पीएमजेडीवाई का प्रभाव अभूतपूर्व रहा है। 56.2 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जो मार्च 2015 की तुलना में लगभग 4 गुनी वृद्धि है। इसमें ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्रों में 37.5 करोड़ और शहरी क्षेत्रों में 18.7 करोड़ खाते शामिल हैं। इनमें से 56 प्रतिशत खाते (लगभग 31.3 करोड़) महिलाओं के हैं, जो लैंगिक-समावेश को दर्शाता है और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है।
पीएमजेडीवाई खातों में कुल जमा राशि 2.68 लाख करोड़ रुपये है, जो 2015 की तुलना में 17 गुनी वृद्धि है और यह बैंकिंग प्रणाली में बढ़ते विश्वास को प्रतिबिंबित करती है। इसने एक ही सप्ताह (23-29 अगस्त, 2014) में 1,80,96,130 खाते खोलने का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया जिसमें अकेले उद्घाटन के दिन 15 मिलियन खाते खोले गए थे। 16.2 लाख से ज़्यादा बैंक मित्र दूर-दराज के इलाकों में बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं, जिससे ग्रामीण भारत में वित्तीय सेवाएं सुलभ हो रही हैं। पीएमजेडीवाई खातों ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी)को सुव्यवस्थित किया है, जिससे सब्सिडी और राहत भुगतान बिना किसी बिचौलिए के लाभार्थियों तक पहुंचते हैं। विमुद्रीकरण और कोविड-19 संकट के दौरान, पीएमजेडीवाई खातों ने तेज़ी से वित्तीय सहायता की सुविधा दी, जिससे आर्थिक संकट और महामारी के समय में उनकी उपयोगिता साबित हुई।
2014 में पीएमजेडीवाई की शुरुआत के समयए लगभग 7.5 करोड़ परिवारों के पास बैंक खाते नहीं थे। 2018 में, हमने परिवारों के पास बैंक खाते की सुविधा का उच्चतम स्तर हासिल किया और अपना ध्यान सभी वयस्कों को बैंक खाते की सुविधा देने पर केंद्रित कर दिया। विश्व बैंक की फाइंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के संदर्भ में खाता स्वामित्व 2014 के 53 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 89 प्रतिशत हो गया है। भारत में खाता स्वामित्व एशिया में सर्वश्रेष्ठ है और खाता स्वामित्व में पुरुष-महिला अंतर भी नगण्य हो गया है। एनएसएस सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसारए देश में 94.65 प्रतिशत वयस्कों के पास बैंक खाते हैं।
प्रधानमंत्री जन धन योजना भारत की वित्तीय समावेश यात्रा की आधारशिला रही है, जिसने लाखों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में शामिल किया है और उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता के साधनों से सशक्त बनाया है। 56 करोड़ से अधिक खातों, 2.68 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि और बैंक मित्रों के एक मजबूत नेटवर्क के साथ पीएमजेडीवाई ने गरीब लोगों के लिए वित्तीय सेवाओं तक पहुंच को फिर से परिभाषित किया है। हालांकि निष्क्रिय खाते और पुन: केवाईसी आवश्यकता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन इस योजना के परिवर्तनकारी प्रभाव, जिसे गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, विश्व बैंक, आईएमएफ आदि द्वारा विश्व स्तर पर मान्यता दी गयी है, को अतिशयोक्ति नहीं कहा जा सकता है। चूंकि भारत 2025 में पीएमजेडीवाई के 11 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है, यह समावेशी शासन की शक्ति का प्रमाण है तथा सार्वभौमिक वित्तीय समावेश प्राप्त करने हेतु विश्व के लिए एक आदर्श है।
-लेखक भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग में सचिव हैं।