राहत कार्यों में और तेज़ी लाने की ज़रूरत
उत्तर भारत में आई बाढ़ से ज्यादातर स्थानों पर जन-जीवन प्रभावित हुआ है। पंजाब में बहती नदियां सतलुज, ब्यास और रावी ने कपूरथला, तरनतारन, होशियारपुर, अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट और ़फाज़िल्का आदि ज़िलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन क्षेत्रों में हज़ारों एकड़ ज़मीन पर बोई गई फसलों को बाढ़ के पानी ने पूरी तरह तबाह कर दिया है। गांवों में घिरे बहुत-से लोगों को अपने घर-बार छोड़ कर अन्य स्थानों पर शरण लेने के लिए विवश होना पड़ा है। चाहे प्रशासन द्वारा सरकारी मशीनरी को राहत कार्यों में लगा दिया गया है। सरकारी पक्ष सहित अलग-अलग विपक्षी पार्टियों के नेता अपने-अपने ढंग-तरीके से प्रभावित परिवारों की सुध लेने का यत्न कर रहे हैं।
सरकार ने यह विश्वास दिलाया है कि बाढ़ से प्रभावित लोगों को इस उजाड़े का मुआवज़ा ज़रूर मिलेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री ने गिरदावरी करवाने के निर्देश भी दिए हैं। राहत कार्यों और लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से निकालने के लिए सीमा सुरक्षा बल के साथ-साथ संकट से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विशेष रूप से गठित दल एन.डी.आर.एफ. और सेना की सहायता भी ली जा रही है। नावों और अन्य साधनों द्वारा पानी में घिरे लोगों को निकालने के यत्न किए जा रहे हैं, परन्तु विगत काफी दिनों से लगातार वर्षा होने के कारण और हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की घटनाएं बार-बार घटित होने के कारण इन क्षेत्रों के साथ-साथ निचले मैदानी क्षेत्रों में लगातार आ रहे पानी ने एक तरह से तबाही मचा दी है। चाहे प्रशासन द्वारा राहत के वायदे तो किए जा रहे हैं परन्तु क्या इतने बड़े नुक्सान के लिए राहत का प्रबन्ध हो सकेगा? इस संबंध में पहले ही प्रश्न-चिन्ह लगने शुरू हो गए हैं, क्योंकि विगत वर्षों में कई स्थानों पर वर्षा से हुए बड़े नुक्सान संबंधी भी लोगों को बहुत कम राहत पहुंचाई गई थी, जिसकी असंतुष्टि अभी भी लोगों के मन में कायम है।
इतने बड़े नुक्सान का सामना कर रहे लोगों की सहायता के लिए सरकार को प्रत्येक पक्ष से सतत् यत्न करने की ज़रूरत होगी। खज़ाना पहले ही खाली हुआ पड़ा है। सरकार को अपने काम चलाने के लिए लगातार ऋण लेना पड़ रहा है, जिससे प्रदेश की आर्थिकता को पहले ही भारी चोट लगी है और यह ऋण के बोझ तले दबा जा रहा है। अब सोचने वाली बात यह होगी कि ऐसी चुनौती का मुकाबला सरकार किस सीमा तक करने में समर्थ होगी? केन्द्र सरकार को भी इसके लिए अपने फज़र् निभाने की ज़रूरत होगी। चाहे प्रदेश सरकार के केन्द्र के साथ ज्यादा अच्छे संबंध बने दिखाई नहीं दे रहे परन्तु इस प्राकृतिक आपदा से जुड़े साझे मानवीय सरोकारों के दृष्टिगत सभी पक्षों को मिलजुल कर मुकाबला करने की ज़रूरत होगी, ताकि संकट में फंसे लोगों को ज़रूरी राहत मिल सके।
हम समझते हैं कि पंजाब में पिछले दशकों में भी कई बार बाढ़ ने बड़ी तबाही मचाई है। ऐसी तबाही के प्रभाव को कम करने के लिए नये सिरे से कोई पुख्ता प्रबन्ध करने की भी ज़रूरत होगी, जिनसे आई ऐसी आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सके। इसलिए इनसे संबंधित मूलभूत ढांचे को प्रत्येक पक्ष से मज़बूत करने की ज़रूरत होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द