भारत का हमेशा सहयोगी और मित्र रहा है जापान
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जापान यात्रा कई पक्षों से बेहद भावपूर्ण है। विश्व के दूसरे बड़े युद्ध के बाद जापान के पांव उखड़ गए थे। अमरीका द्वारा इसके दो शहरों हीरोशीमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने के बाद इसने हथियार डाल दिए थे। उस समय यह जर्मनी और इटली का भागीदार था, जिन्हें तत्कालीन सोवियत यूनियन, पश्चिमी यूरोप के ज्यादातर देशों और अमरीका ने मिल कर हरा दिया था। यह बेहद दिलचस्प बात है कि वह हुए ऐसे विनाश और नमोशीजनक हार के बाद पुन: इस तरह उठा कि पूरे विश्व को हैरान कर दिया। आज जापान की संख्या कुछ एक विकसित देशों में होती। इसी समय में भारत को मिली आज़ादी के बाद पिछले 7 दशकों में दोनों देशों के आपसी सहयोग और मित्रता में निरन्तर वृद्धि हुई है।
जापान टैक्नोलॉजी के पक्ष से बुलंदियां छू रहा है। 40 वर्ष पहले जापान द्वारा लाई गई मारूति सुज़ूकी ने कारों के क्षेत्र में भारत में एक तरह से क्रांति ला दी थी। इसने भारत के वाहन, इस्पात, सैमी कंडक्टर, अंतरिक्ष अनुसंधान और भवन निर्माण के क्षेत्रों के अतिरिक्त भारत के मूलभूत ढांचे को मज़बूत करने में भी अपना बड़ा योगदान डाला है। आज भी जापान की लगभग 1400 कम्पनियां भारत के औद्योगिक और अन्य क्षेत्रों में अपना बड़ा योगदान डाल रही हैं। भारत की पिछली परम्परा को जारी रखते हुए, विगत 11 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने भी जापान के साथ अपना सहयोग बनाए रखा है और प्रत्येक वर्ष भारत-जापान शिखर सम्मेलनों में पहले की तरह अपनी विशेष साझेदारी बनाए रखी है। वर्ष 2014 के बाद यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जापान की 18वीं यात्रा है। इस समय जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा हैं, परन्तु इससे पहले जापान के प्रधानमंत्रियों येशीहिदे सुगा और फोमियो किशिदा के साथ भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अच्छे संबंध रहे हैं। जापान के सहयोग से ही मुम्बई-अहमदाबाद के बीच हाई स्पीड रेल जिसे ‘बुलेट ट्रेन’ भी कहा जाता है, चलाने के लिए काम चल रहा है। जापान जाकर मोदी ने कहा कि जापान के साथ हमारी ज्यादातर क्षेत्रों में अच्छी साझेदारी चल रही है। कारों के अतिरिक्त बैटरियों, रोबोट्स, सैमी कंडक्टर, समुद्री जहाज़ों के निर्माण और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देश अपनी पूरी साझेदारी बढ़ा रहे हैं।
जापान में बड़े उद्योगपतियों के साथ श्री मोदी की बैठक बेहद भावपूर्ण थी। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी 10 वर्षों में जापान की कम्पनियां भारत में 68 अरब डॉलर का निवेश करेंगी। सुज़ूकी मोटर आगामी 6 वर्षों में यहां 8 अरब डॉलर का निवेश करेगी। इन कम्पनियों में हज़ारों ही भारतीय प्रत्येक स्तर पर कार्य करेंगे। श्री मोदी की दो दिवसीय यह यात्रा उस समय हुई है, जब टैरिफ को लेकर भारत की अमरीका के साथ बड़ी कशमकश चल रही है। भारत ने पहले इंग्लैंड और फ्रांस के साथ आपसी समझौते किए हैं। जापान के साथ भी भारतीय मेल-मिलाप में और तेज़ी आ सकती है। अपने ऐसे दृष्टिकोण से भारत अमरीका की ओर से दी गईं चुनौतियों के दौरान भी अपनी सफलतापूर्वक यात्रा जारी रख सकेगा। जापान और भारत का मेल-मिलाप दशकों से स्थापित संबंधों में एक और मज़बूत कड़ी जोड़ने के समर्थ होगा।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द