समुद्री मोथ मछली जिससे बनती हैं कलात्मक वस्तुएं
समुद्री मोथ भारत में पायी जाने वाली एक सुंदर मछली है। इसे अंग्रेजी में सी मोथ कहते हैं। समुद्री मोथ की छाती के मीनपंख बहुत बड़े होते हैं तथा पंख जैसे लगते हैं। इसे दूर से देखने पर मोथ का भ्रम होता है। इसीलिए इसे समुद्री मोथ कहा जाता है। समुद्री मोथ एक लंबे समय से जीव वैज्ञानिकों के लिए पहेली बनी हुई है। इसकी शारीरिक संरचना देखने में समुद्री घोड़े के समान लगती है, अत: पहले जीव वैज्ञानिक समुद्री मोथ को समुद्री घोड़े का निकट संबंधी मानते थे, किंतु आधुनिक जीव-वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि समुद्री मोथ, समुद्री घोड़े की निकट तो क्या दूर की भी संबंधी नहीं है।
समुद्री मोथ हिंद प्रशांत और इसके आसपास के क्षेत्रों में बहुतायत से मिलती है। इसके साथ ही इसे दक्षिणी अफ्रीका से लेकर जापान तक के सागरों और महासागरों में भी देखा जा सकता है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि समुद्री मोथ दक्षिणी अफ्रीका के सागर तटों से लेकर हिंद महासागर के तटों के चारों ओर होती हुई पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और हिंद प्रशांत क्षेत्र तक पायी जाती है। उत्तर में इसे चीन और जापान तक देखा जा सकता है। समुद्री मोथ दक्षिण अफ्रीका, सोमालिया, सऊदी अरब, भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बर्मा, थाईलैंड, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, ताईवान, चीन, जापान, आस्ट्रेलिया और न्यूगिनी आदि के सागर तटों पर बहुत बड़ी संख्या में देखी जा सकती है।
समुद्री मोथ के संबंध में पहले यह कहा जाता था कि यह अपनी छाती के मीनपंखों को पंख की तरह फहराकर उड़ती है अथवा ग्लाइडिंग करती है लेकिन समुद्री मोथ का शरीर भारी होता है तथा इसके शरीर की मांसपेशियां बहुत कमजोर होती हैं अत: यह चाहकर भी न तो उड़ सकती है और न ग्लाइडिंग कर सकती है। समुद्री मोथ अपनी छाती के मीनपंखों को फैलाकर अपने शत्रु को डराने का कार्य करती है। समुद्री मोथ का कोई भी शत्रु जैसे ही इसके सामने आता है, वैसे ही यह अपनी छाती के मीनपंख फैला लेती है, इससे यह अपने वास्तविक आकार से बड़ी दिखाई देने लगती है। इससे इसका शत्रु डरकर भाग जाता है और यह बच जाती है।
समुद्री मोथ वास्तव में एक छोटी समुद्री मछली है, किंतु इसकी शारीरिक संरचना सागर की सामान्य छोटी मछलियों से पूरी तरह भिन्न होती है। समुद्री मोथ के शरीर की लंबाई 12 सेंटीमीटर से लेकर 15 सेंटीमीटर तक होती है, किंतु कभी-कभी 25 सेंटीमीटर लंबी समुद्री मोथ देखने को मिल जाती है। समुद्री मोथ की पीठ और शरीर के ऊपर के भाग का रंग फीका कत्थई होता है एवं इस पर सफेद रंग के धब्बे होते हैं। इसके पेट और शरीर के नीचे के भाग हल्के रंग के होते हैं, समुद्री मोथ का शरीर कुछ लंबा होता है एवं इस पर हड्डियों की प्लेटें होती हैं। इसका थूथुन बहुत लंबा होता है और थूथुन के नीचे के भाग में काफी पीछे की ओर इसका मुंह होता है। समुद्री मोथ का मुंह बहुत छोटा है तथा इसके दांत नहीं होते। इसके दोनों तरफ छाती के मीनपंखों के सामने गलफड़ों के छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। समुद्री मोथ के दोनों तरफ चार-चार गलफड़े होते हैं, जो त्वचा की एक पतली सी परत से ढंके रहने के कारण दिखाई नहीं देते हैं। समुद्री मोथ का भोजन और भोजन करने का ढंग बड़ा सरल होता है। यह सागर के तल में भोजन करने वाली मछली है अर्थात् सागर के तल में पाए जाने वाले छोटे-छोटे जीवों को अपना आहार बनाती है। समुद्री मोथ का प्रमुख भोजन सागर तल में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कृमि, क्रिस्टेशियन तथा इसी प्रकार के अरीढ़धारी जीव हैं।
समुद्री मोथ का समागम और प्रजनन सागर की सामान्य मछलियों की तरह होता है। इनमें बाह्य निषेचन पाया जाता है। प्रजननकाल में मादा समुद्री मोथ अंडे देती है तथा नर उन पर शुक्राणु डालकर उन्हें निषेचित करता है। समुद्री मोथ के अंडे परिपक्व होने पर फूटते हैं और इनसे छोटे-छोटे लारवे निकलते हैं। इसके नवजात लारवे लगभग एक मिलीमीटर लंबे होते हैं। समुद्री मोथ के लारवे के थूथुन नहीं होता, इसका ऊपर का जबड़ा ऊपर की ओर थोड़ा सा मुड़ा हुआ होता है तथा नीचे का जबड़ा ऊपर के जबड़े से कुछ आगे निकला हुआ होता है। समुद्री मोथ के नवजात बच्चे की छाती के मीनपंख जन्म के कुछ समय बाद ही निकलना आरंभ हो जाते हैं। इसके बाद इसके थूथुन का विकास होता है। समुद्री मोथ के नवजात बच्चे सागर के पानी में पाए जाने वाले प्लेंकटन के छोटे-छोटे जीव खाते हैं, इससे तेजी से इनका शारीरिक विकास होता है। सर्वप्रथम इनकी छाती के दोनों मीनपंखों का विकास होता है। इसके बाद इनका थूथुन आगे बढ़ता है और फिर पूरा तैयार होता है तथा अंत में दूसरे मीनपंख तथा शरीर के अन्य अंग विकसित होते हैं। इस प्रकार कुछ ही समय में यह वयस्कों के समान दिखाई देने लगता है। समुद्री मोथ बहुत लंबी-लंबी यात्राएं करती है। यह दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और जापान तक पायी जाती है, किन्तु अटलांटिक महासागर में यह नहीं मिलती। यह क्यों नहीं मिलती, यह एक शोध का विषय है।
समुद्री मोथ एक सुंदर मछली है। इसकी जानकारी लोगों को प्राचीनकाल से है, 15वीं शताब्दी से इसके सूखे शरीर का उपयोग एक अमूल्य कलात्मक वस्तु के रूप में किया जाता रहा है। इसके सूखे शरीर को घर में रखना और इससे घर सजाना बड़ी शान की बात समझी जाती है। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड तथा अफ्रीका के कुछ भागों में इसके शरीर से जेवर भी बनाए जाते हैं।
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