बड़ी दिलचस्प है मैराथन दौड़ की कहानी 

मैराथन दौड़ की कहानी बड़ी दिलचस्प है। यूनान के ओलंपिया स्टेडियम में 776 ई.पू. इलिस नगरवासी नग्न कोरोवस को यूनानियों ने 200 गज की दौड़ में सर्वप्रथम विजयी होते देखा पर मैराथन दौड़ आज की सर्वाधिक संघर्षपूर्ण दौड़ है। प्राचीन ओलंपिक खेलों में मैराथन नहीं थी। सन् 1896 ई. के आधुनिक ओलंपिक के प्रथम आयोजन स्थल एथेन्स नगर से यह आरम्भ की गई। 480 ई.पू. यूनान के एथेन्स नगर से 26 मील दूर मैराथन के युद्ध क्षेत्र में दस हजार यूनानी सैनिक लगभग एक लाख पर्शियन सैनिकों से अपनी मातृभूमि के रक्षा के लिए जूझ रहे थे। यह निर्णायक युद्ध था। यूनानी योद्धाओं ने पर्शियनों को परास्त कर खदेड़ दिया। यूनानी सेना में प्रसिद्ध धावक फीडीपीडस था। विजय का महान धावक अपने कवच टोप उतार कर एथेन्स की ओर दौड़ पड़ा। वह युद्ध से बेहद थका था। फिर भी पहाड़ों, जंगलों, कंटीले झाड़ झंखाड़ भरे रास्ते को बिना कहीं रूके पार करता आगे भागता ही रहा।  एथेन्स नगर में जब उसने प्रवेश किया, उसके पैर लहूलुहान हो चुके थे। उसकी सांस उखड़ रही थी। जमीन पर गिरने से पूर्व वह जोर से चिल्लाया ‘देशवासियों हम युद्ध जीत गये है। खुशियां मनाओ’ तुरन्त वह गिर कर ढेर हो गया। इस वीर धावक की यादगार में मैराथन दौड़ का समावेश आधुनिक ओलंपिक जो 1896 से आरम्भ हुआ, से किया गया। यह समारोह का अंतिम इवेंट रहता है।
मैराधन दौड़ की दूरी 26 मील है और मैराथन तथा एथेन्स की दूरी भी लगभग इतनी है। यह 26 मील की दूरी 1908 ई. के लंदन ओलंपिक में, 26 मील 365 गज हो गई। इटली का धावक दोरांदो पियेत्री 1908 के मैराथन दौड़ के स्वर्णपदक से वंचित रह गया परन्तु उसकी दौड़ चिरस्मरणीय थी।
56 धावक मैदान में थे। दौड़ के बीच में दक्षिण अफ्रीका के चार्ली हेफरसन, सबसे आगे हो गये। अन्तिम स्थान पर पहुंचने के लिए छ: मील बाकी था। पियेत्री काफी पीछे था। वह हेकरसन को दबाना चाहता था। पियेत्री ने पूरी ताकत लगा दी। उसका दम उखड़ने लगा। बेहद थकावट और मानसिक तनाव के कारण बाएं मुड़ने के बजाय वह दाएं भाग से स्टेडियम में प्रवेश कर गया। इस गलती की सूचना उसे दी जाये, इससे पहले ही वह लड़खड़ा कर गिर गया लेकिन वह फिर उठा, गिरा और फिर उठा। खेल भावना से उसने दौड़ पूरी की। हैकरसन जो आगे था, पिछड़ गया। अमरीकी धावक जॉनी हाऊस ने, हैकरसन को पीछे छोड़ दिया। 2 घंटे 25 मिनट 1804 सेकंड में जानी यह दौड़ जीत सका। गिर पड़ने और गलत दिशा से स्टेडियम में प्रवेश करने के कारण पियेत्री को दौड़ में अमान्य कर दिया गया लेकिन ब्रिटिश पत्रकारों ने पियेत्री की शौर्यगाथा को बहुत सराहा। मजबूर होकर ओलंपिक समिति ने उसे एक विशेष पुरूस्कार प्रदान किया। वस्तुस्थिति यह थी कि 26 मील की दौड़ में लंदन के आयोजकों ने 365 गज स्टेडियम के प्रवेश द्वार से उस विशेष कक्ष की दूरी को जोड़ दिया था जिसमें इंग्लैंड की रानी एलेक्लेन्ड्रा बैठी थी। प्रवेश द्वार तक पियेत्री आगे था। पियेत्री स्वर्णपदक जीत लेता यदि वह अतिरिक्त दूरी जोड़ी न जाती। अब मैराथन में दूरी हमेशा के लिए 26 मील 365 गज हो गई। (उर्वशी)

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