नदियों के नाम महिलाओं के नाम पर ही क्यों रखे गये ?
‘दीदी, अपने देश में जो नदियां बहती हैं उनके बारे में आपको एक राज़ की बात मालूम है क्या?’
‘कौन सी?’
‘यही कि सभी नदियों के नाम महिलाओं के नाम पर रखे गये हैं।’
‘सभी के तो नहीं, लेकिन अधिकतर नदियों के नाम महिलाओं के नाम पर हैं।’
‘गंगा, नर्मदा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, कावेरी... सभी नदियों के नाम तो महिलाओं के नाम पर हैं।’
‘लेकिन ब्रह्मपुत्र, सोन आदि भी हमारे ही देश की नदियां हैं और इनके नाम पुरुषों के नाम पर हैं।’
‘हां, यह बात भी है।’
‘दरअसल, हमारे यहां नदियों को पूजनीय माना जाता है और भारत में नदियां हिमालयी व प्रायद्वीपीय प्रणालियों में विभाजित हैं, जो कृषि, जल, परिवहन व ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण और देश के जीवन का आधार हैं।’
‘हिमालयी व प्रायद्वीपीय नदियां कौन-कौन सी हैं?’
‘हिमालयी नदियों में गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र आदि आती हैं व प्रायद्वीपीय श्रेणी में गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा आदि आती हैं।’
‘लेकिन मुझे अभी तक यह बात समझ में नहीं आयी कि अधिकतर नदियों के नाम महिलाओं के नाम पर क्यों हैं?’
‘भारतीय संस्कृति में नदियों को जीवनदायिनी, पालनहार, माता स्वरूप और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। ठीक वैसे ही जैसे मां जीवन देती है, नदियां भूमि को उपजाऊ बनाती हैं और जीवन का पोषण करती हैं, इसलिए उन्हें मां के रूप में पूजते हैं, जैसे गंगा मैया या नर्मदा मैया। यह भारतीय संस्कृति में नदियों को देवी के समान दर्जा देने और जीवन-पोषण क्षमता से जुड़ा है। इसलिए अधिकतर नदियों के नाम महिलाओं के नाम पर हैं।’
‘और कुछ नदियों को पुरुषवाचक क्यों माना जाता है?’
‘ब्रह्मपुत्र और सोन जैसी नदियां अपनी विशालता व शक्ति के कारण पुरुष रूप में मानी जाती हैं।’
‘मैंने सुना है है कि मध्य प्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है।’
‘हां, चूंकि इस प्रदेश से नर्मदा, चंबल, बेतवा, ताप्ती, सोन और माही जैसी प्रमुख नदियां निकलती हैं, इसलिए मध्य प्रदेश को नदियों का मायका या जन्मभूमि कहते हैं।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर

