परछाई दिन में घटती बढ़ती क्यों है?
बच्चो! क्या तुमने कभी ध्यान दिया है कि जब धूप खिल रही हो तो हमारी अपनी परछाई हमारा अपना पीछा कैसे करती है? या दिनभर परछाई का आकार कैसे बदलता रहता है? लेकिन इन सवालों के जवाब से पहले यह जान लो कि परछाई क्या है? जब रोशनी के स्रोत, जैसे सूरज, से निकलने वाली रोशनी किसी वस्तु से ब्लॉक हो जाती है तो एक डार्क शेप बनती है। यह परछाई है। अब आज के परछाई को ट्रेस करने वाले विज्ञान प्रयोग में हम यह जानेंगे कि परछाई कैसे बनती है और दिन के अलग-अलग हिस्सों में वह कैसे बदलती रहती है।
इस प्रयोग के लिए हमें चाक, फ़्लैशलाइट और एक छोटा खिलौना या कप, जिससे रोशनी पार न होती हो। जब यह प्रयोग आउटडोर करना हो तो धूप खिली हुई होनी चाहिए। अपने प्रयोग को रिकॉर्ड करने के लिए वर्कशीट की भी ज़रूरत पड़ेगी। सबसे पहले अपने वास्तविक ऑब्जेक्ट, मसलन कप, को बाहर समतल सतह पर ऐसी जगह रख दें जहां उस पर धूप पड़ रही हो। फिर चाक से कप से जो अलग-अलग परछाई बनें उन्हें ट्रेस कर लें और समय को लिख दें। आपको अवलोकन दिन के अलग-अलग समय पर करना है- सुबह, दोपहर और शाम को- यह देखने के लिए कि परछाई कैसे बदलती है। हर बार नई परछाई शेप को ट्रेस करें। मैंने दिन में 12, 1, 3 व 5 बजे रिकॉर्ड की थी, लेकिन आप सुबह भी रिकॉर्ड करना सुनिश्चित करें। अंत में अपने रिकॉर्ड की तुलना करें। अपनी ट्रेसिंग को देखें। परछाई ने अलग दिशा व अलग आकार कैसे लिया?
सूरज रोशनी का स्रोत है और पृथ्वी के घूमने की वजह से ऐसा प्रतीत होता है कि वह आसमान में घूम रहा है। सुबह व शाम के समय सूरज आसमान में नीचे होता है जिससे बड़ी परछाई बनती है। नून यानी 12 बजे परछाई सबसे छोटी होती है; क्योंकि सूरज एकदम सिर पर होता है। यह पैटर्न रोज़ाना दोहराया जाता है और यह ही सनडायल का आधार है, जोकि समय बताने का सबसे पुराना तरीका है। रोशनी अलग-अलग चीज़ों की किस तरह की परछाई बनाती है? लकड़ी, धातु या कार्डबोर्ड ऐसी चीज़ें हैं जिनसे रोशनी पार नहीं होती, वह रोशनी को पूरी तरह से ब्लॉक कर देते हैं, इसलिए उनकी मज़बूत परछाई बनती है। पारदर्शी वस्तुएं जैसे ग्लास, पानी आदि से रोशनी पार हो जाती है, इसलिए उनसे मज़बूत परछाई नहीं बनती है।
ट्रांसलुसेंट वस्तुएं जैसे वैक्स पेपर, फ्रॉस्टेड ग्लास आदि कुछ रोशनी को बाउंस करते हैं, जिससे हल्की, धुंधली परछाई बनती है। सबसे लम्बी परछाई सवेरे और देर दिन में बनती है। जब बादल छाये हों तो परछाई कम बनती है क्योंकि बादल रोशनी को फैला देते हैं। चंद्र ग्रहण पर चांद की परछाई पृथ्वी पर पड़ती है। इससे परछाई के दो क्षेत्र बन जाते हैं- अंबरा (पूर्ण परछाई, डार्क सेंटर) और पेनम्ब्रा (आंशिक परछाई, हल्के किनारे)। फ़्लैशलाइट की मदद से यह प्रयोग घर के अंदर भी किया जा सकता है।
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