पाकिस्तान का अफगानिस्तान से टकराव

पाकिस्तान के संकट कम हो ही नहीं रहे। इनमें कुदरत के दिए संकट कम, लेकिन पाकिस्तान के अपने तैयार किये संकट कहीं अधिक हैं। भारत के साथ उसने जन्म-जात की दुश्मनी पाल रखी है। गरीबी, महंगाई, बेरोज़गारी के दलदल में वह धंसता चला गया है। बलोच विद्रोहियों पर उसकी पकड़ नहीं बन पा रही। अब अफगानिस्तान के साथ मोर्चाबंदी पर आ गया है। इतिहास के ज़रिये देखें, जब तीन महा-शक्तियां अपनी ताकत का लोहा मनवा रही थीं। उन्होंने अ़फगानिस्तान को दबाने की कोशिश की, परन्तु बुरी तरह असफल रहे। 19वीं सदी के मध्य में ब्रिटेन से 1925 के बाद सोवियत संघ ने, 2011 में अमरीका ने 9/11 के बाद। अब अगर पाकिस्तान खुद को इन सबसे ऊपर और सशक्त मानता है तो उसे भी अपने दर्पण में निहार लेना चाहिए।
पाकिस्तान अफगानिस्तान के भीतर घुसकर बमबारी कर रहा है, बेकसूर नागरिकों की जान जा रही है। एक बार एक ही परिवार के 18 लोग मारे गये। वह एक ऐसा इलाका बताया जाता है जहां की आबादी कुछ इस तरह है कि इस सहस्त्राब्दी के शुरू से ही संबंध ताकतवर सैन्य शक्ति वाले अमरीका के लिए भी स्टीक बमबारी एक कल्पना ही रही यानि काफी जोखिम भरी। कश्मीर में वर्षों से अलगाववादी गतिविधियां जारी हैं। लेकिन अफगानिस्तान कभी भी कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ नहीं जुड़ा। लगभग सभी आतंकवादी पाकिस्तानी सैनिकों की तरह मुस्लिम पंजाबी बिरादरी से हैं। अमरीका को लग रहा था कि कहीं सोवियत संघ अफगानिस्तान पर नियंत्रण न बना ले, उसने अपना पूरा ज़ोर अफगानिस्तान में दबाव बनाने पर लगा दिया। अपनी पूरी जासूसी ताकत, अपने तमाम उपग्रह, टोही यंत्रों, ड्रोनों और स्टीक हमलों के बावजूद, उत्तम सैन्य हथियारों के बावजूद उसने मस्जिदों, कबीले के बड़े परिसरों में नागरिकों को भौएं की नींद सुलाना, खाली बड़ी गुफाओं को तबाह किया। इन हमलों में अफगानिस्तान के इक्का-दुक्का कमांडर भी मारे गए, लेकिन अमरीका को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे हमलों के बाद तालिबान को फैलने की जगह मिलती रही। प्रभावित कबीलों के नये लड़कों ने प्रतिशोध की कसमें खाईं। अंतत: अमरीका को हटना पड़ा।
भारत को दोनों मोर्चों पर जोखिम उठाना पड़ रहा है। पाकिस्तान की आतंकवाद को बढ़ावा देने की योजनाबंदी सामने है। चीन के साथ भीतर ही भीतर क्या  पक रहा है, कभी साफ नहीं हो पाया। बेहतर संबंधों में भी घात लगाने की उम्मीद छोड़ी नहीं जा सकती। एक बार धोखा जो खा चुके हैं।  यह सच है कि भारत और अफगानिस्तान के बीच भौगोलिक वास्तविकता के अनुसार काफी दूरी है, लेकिन दिल पास-पास हो रहे हैं। बीच में है पाकिस्तान के कब्ज़े वाला इलाका। भारत पर पाकिस्तान में जो भ्रम फैलाया जाता है वह यह कि भारत छदम युद्ध शुरू करता रहा है। इस आरोप का आधार इतना मात्र है कि भारत अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम को बढ़ावा देता रहा है। अफगानिस्तानी टीम के खिलाड़ी भारत में आई.पी.एल. खेलते हैं जबकि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के नहीं।
किसी को बड़े-बड़े ख्वाब देखने से कौन रोक सकता है? जिनमें एक तो यह है कि वह अफगानिस्तान में अपनी रणनीतिक मज़बूती बना सकता है। लेकिन ख्वाब आंख बंद कर देखे जाते हैं। आंख खुलने पर दुनिया बदली हुई होती है और सचमुच की होती है जहां धौंस या हमले नहीं चलते। 

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