देवी के नौ रूपों को समर्पित हैं चैत्र नवरात्र

नवरात्रि देश का एक बहुत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है जिसे पूरे भारत में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। नवरात्रि शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है, जिसका अर्थ है नौ रातें। नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा नियम अनुसार करनी चाहिए। हर साल चार नवरात्रि शरद्, चैत्र, माघ और आषाढ़ के महीने में नवरात्रि पड़ती है, लेकिन चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्त्व बताया गया है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार विक्रमी संवत की चैत्र माह की पहली प्रतिपदा अर्थात 19 मार्च 2026 से नवरात्रि की शुरुआत होगी और इसी दिन से हिन्दू नववर्ष का भी आरंभ होता है। 
हिंदी पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रही है और नवरात्रि का समापन 27 मार्च रामनवमी के दिन होगा। भगवान राम का जन्म भी इसी अवधि में हुआ था, इसलिए इस नवरात्रि को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दौरान की गई पूजा अर्चना विशेष फलदायी होती है और जीवन में सकारात्मकता लाती है। इस दिन से लोग लगातार 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 स्वरूपों यानी कि शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा बड़े ही विधिविधान के साथ करते हैं। चैत्र नवरात्रि की प्रथम तिथि को कलश स्थापना की जाती है। 
उसके बाद 9 दिनों तक उस कलश का पूजन किया जाता है। इस बार नवरात्र गुरुवार से शुरू हो रहे हैं, इसलिए माता हाथी पर सवार होकर आएंगी। शास्त्रों में देवी की हाथी की पालकी को बहुत शुभ माना गया है। इसके साथ ही नवरात्रि पर अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है, जिससे भी ये 9 दिन और शुभ हो जाते हैं। नवरात्रि की अष्टमी व नवमी को छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानते हुए कन्या भोज कराया जाता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां दुर्गा की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं यथाशीघ्र पूर्ण होती हैं। 
 इस बार नवरात्रि में कई विशेष योग बन रहे हैं। इनमें सर्वार्थ सिद्धि योग- यह पूरे नौ दिनों में किसी न किसी दिन रहेगा, जिससे पूजा का प्रभाव और बढ़ेगा। अमृत सिद्धि योग- देवी साधना के लिए श्रेष्ठ समय, गजकेसरी योग- आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए लाभदायक होगा शामिल है। 
नवरात्रि भारत के विभिन्न प्रदेशों में अलग ढंग से मनायी जाती है। गुजरात में नवरात्रि समारोह डांडिया और गरबा के रूप में धूमधाम से मनाया जाता  है। यह पूरी रात भर चलता है। देवी के सम्मान में भक्ति प्रदर्शन के रूप में गरबा, आरती से पहले किया जाता है और डांडिया समारोह उसके बाद। पश्चिम बंगाल में यह पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित किया जाता है। इस पावन माह में माता रानी की पूजा अर्चना की जाती है। नवरात्र में देवी और नवग्रहों की पूजा का कारण इस लिये भी है ताकि ग्रहों की दशा पूरे वर्ष अनुकूल रहे और जीवन में खुशहाली बनी रहे।
देशवासी नवरात्र मनाने की तैयारियां कर रहे है। इस दौरान मां दुर्गा के नवरूपों की उपासना की जाती है। इसमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा अलग-अलग दिन होती है। नवरात्र के पहले दिन देवी को शरीर में लेप के तौर पर लगाने के लिए चंदन और केश धोने के लिए त्रिफला चढ़ाना चाहिए। त्रिफला में आंवला, हर्रड़ और बहेड़ा डाला जाता है। 
दूसरे दिन केषों को ठीक स्थान पर रखने के लिए माता को रेशम की पट्टी दी जाती है। तीसरे दिन पैरों को रंगने के लिए आलता, सिर के लिए सिंदूर और देखने के लिए दर्पण दिया जाता है। चौथे दिन देवी को शहद, मस्तक पर तिलक लगाने के लिए चांदी का एक टुकड़ा और आंख में लगाने का अंजन, यानि कि काजल दिया जाता है। नवरात्र के पांचवें दिन देवी मां को अंगराग, यानि सौन्दर्य प्रसाधन की चीजें और अपने सामर्थ्य अनुसार आभूषण चढ़ाने का विधान है। नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की उपासना की जायेगी और बेल के पेड़ के पास जाकर देवी का बोधन किया जायेगा। 
नवरात्र के सातवें दिन मंत्रोच्चारण के साथ बेल के पेड़ से लकड़ी तोड़कर लाई जाती है। इन दिनों में देवी पूजा के साथ ही दान-पुण्य भी करना चाहिए। ज़रूरतमंद लोगों को भोजन और धन का दान करें। नवरात्रि में व्रत करने वाले लोगों को फल जैसे केला, आम, पपीता आदि का दान करें।

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