धमाका बाबू को शादी का टैंशन

कल धमाका बाबू लड़की देखने के लिए गए थे। आज की जमाने की नारी सबके ऊपर भारी है। लड़की ने उनके सामने दो शर्तें रखी थी। धमाका बाबू आधुनिक युग को समझते हैं। और उसके बदलते नियम कायदों को भी समझते हैं। इसलिए उन्होंने दोनों शर्तें मान ली। 
लेकिन लड़की उसके बावजूद भी उनके मुंह पर उन्हें न बोलकर चली गई। अब यह क्या बात हुई। बेचारे कल से माथापच्ची कर रहे हैं कि उनसे गलती हुई तो आखिर हुई कहां पर अभी तक उन्हें अपनी गलती समझ में नहीं आई है। खैर उसकी पहले शर्त थी कि मैं अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हूं। मैं मजबूत लड़की हूं नए जमाने की लड़की हूं। किसी का सहारा नहीं लेना चाहती।
और उसकी दूसरी शर्त थी कि मैं तुम्हारे मां-बाप की सेवा नहीं कर पाऊंगी, घर का काम नहीं कर पाऊंगी। बाकी मुझे कब कहीं जाना है, कब आना है, कब घर में रहना है, मैं किस से बात करती हूं, किससे मेरा लगाव है। इन सब चीजों में भी तुम्हारा कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा।
धमाका बाबू समझदार प्राणी थे। वह जानते थे कि सीधी साधी लड़की और ईमानदार अधिकारी आजकल नहीं मिलते हैं। वह जानते थे कि कोई लड़की सास-ससुर के साथ नहीं रहना चाहती है। आजकल की लड़कियां सास-ससुर को वैसे ही ना पसंद करती है। जैसे अपनी मोटापे को ना पसंद करती हैं। अगर वह सास-ससुर के साथ रहने की शर्त रखेंगे तो इस जीवन में शादी होना मुश्किल है। और बाकी की शर्तें भी नहीं मानने पर शादी होना मुश्किल है। इसलिए उन्होंने समझदारी दिखाते हुए सारी शर्तें मान ली और वह बोले। 
तुम कहती हो कि तुम्हें जॉब करनी है। मैं कहता हूं कि तुम्हें जाब करना ही पड़ेगा। क्योंकि घर संभालना तुम्हारे बस की बात नहीं है। मेरा भी सपना है कि मुझे कमाऊ पत्नी मिले। वह आर्थिक रूप से मजबूत मिले। तो इसके लिए मैं अपने मां बाप को भी छोड़ना मंजूर करता हूं। मैं चाहता हूं कि तुम अपने पैरों पर ही नहीं मेरे पैरों का भी सहारा बनकर रहो। मैं चाहता हूं कि तुम मुझसे नहीं मैं तुमसे मांगू और खर्च करूं। 
तुम्हें तो मेरे मां-बाप की सेवा करने की ज़रूरत नहीं है। क्योंकि यह सेवा के लायक लोग ही नहीं है। मैं भी सेवा के लायक नहीं हूं। तुम्हारा स्तर हम लोगों के स्तर से बहुत ऊंचा है। तुम खूब कमाओ घर चलाओ और मैं घर संभाल लूंगा। चौका बर्तन झाड़ू पोछा किसी भी चीज की टेंशन लेने की तुम्हें कोई ज़रूरत नहीं है तुम तो बस कमाने पर ध्यान देना।
ज़िंदगी बढ़िया चलेगी तुम 1 तारीख को सैलरी लेकर आना और मैं दूसरी तारीख को तुम्हारे पास चला आऊंगा। उसमें से तुम कुछ पैसे दे देना। जिससे कि महीने का खर्चा चल सके। अगले महीने में फिर एक तारीख को आऊंगा और तुम्हें बिल्कुल डिस्टर्ब नहीं करूंगा।
तुम चाहे तो पूरी ज़िंदगी अपने मायके में रहना मैं कभी परेशान नहीं करूंगा। अगर तुम्हारा मुझसे मन उब जाए या मैं तुम्हें लगे कि पति बनने लायक नहीं हूं। तो कोई बात नहीं कोई दिक्कत नहीं है। तुम खुशी-खुशी मुझे छोड़ कर चली जाना। बस मुझे ड्राम में भरने का प्लान मत बनाना। या पहाड़ से नीचे धक्का देने का मन मत बनाना। अपने मां-बाप की इकलौती संतान हूं। उनको मुझसे धन-दौलत या सेवा-सुविधा नहीं चाहिए। बस वह दूर से मुझे जिंदा देखना चाहते हैं। अब इतनी ख्वाहिश तो उनकी पूरी करना मेरा भी फर्ज है।
तुम एक बार कहना मैं देखना तुम्हें छोड़कर चला जाऊंगा। 
धमाका बाबू ने सोचा कि इतनी शर्त मानने के बाद शादी होना पक्का है। क्योंकि उनके जन्म के दुश्मन रिश्तेदारों ने उन्हें शादी करने के लिए पूछ-पूछ कर परेशान करके रखा था लेकिन धमाका बाबू की फूटी हुई किस्मत थी। लड़की इसके बावजूद भी उनके मुंह पर उन्हें न बोलकर धिक्कार कर चली गई।
अब उन्हें अपनी गलती समझ में नहीं आ रही है जिसके कारण वह एक बार फिर से अपनी शादी को लेकर घनघोर टेंशन में है।
-मो. 8736863697 

#धमाका बाबू को शादी का टैंशन