स्क्वाश के दो चमकते सितारे अनाहत सिंह और अभय सिंह
मात्र 18 वर्ष की आयु में अनाहत सिंह भारतीय स्क्वाश की अब सबसे चमकदार संभावना नहीं रह गईं हैं बल्कि वह उसका वर्तमान बन चुकी हैं। साल 2025 में उन्होंने प्रदर्शित किया कि वह क्या कुछ करने की क्षमता रखती हैं और फिर 2026 में उन्होंने प्रभावी विजयों से अपने असाधारण टैलेंट को साबित किया, जिसकी वजह से वह विश्व की टॉप 20 में शामिल हो गईं और इस समय वह भारत की ओर से ओलिंपिक पदक की सबसे मज़बूत दावेदार हैं। दिल्ली की इस लड़की ने 22 मार्च 2026 को अपना 16वां पीएसए खिताब जीता। उन्होंने मुंबई के क्रिकेट क्लब ऑ़फ इंडिया के ग्लास कोर्ट में आयोजित इंडियन ओपन स्क्वाश के महिला एकल फाइनल में मिस्र की हाना मोअताज़ को 3-1 (11-5, 11-6, 6-11, 11-6) से पराजित किया। इस खिताब को उन्होंने लगातार दूसरी बार जीता है। स्क्वाश में तेज़ गति से प्रगति करते हुए भी अनाहत ने अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना नहीं छोड़ा है; उन्होंने फ्लाइट्स पर पढ़ते हुए लास एंजेल्स 2028 के मार्ग को पकड़ा है।
जेएसडब्लू इंडियन ओपन स्क्वाश में भारत को पुरुष एकल में भी सफलता मिली। अभय सिंह, 27, ने अपने ही देशवासी वीर चोत्रानी को फाइनल में 3-0 (11-9, 11-8, 11-4) से पराजित किया। अभय पिछले साल भी इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचे थे, लेकिन खिताब हासिल करने से चूक गये थे। तब और अब में अंतर यह रहा कि भारत का यह नंबर एक खिलाड़ी तब विश्व रैंकिंग में 60वें पायदान पर था और अब 26वें पर है, जिससे मालूम होता है कि उन्होंने अपने खेल में ज़बरदस्त सुधार किया है। पिछले एक साल के दौरान अभय ने पीएसए टूर पर बहुत मज़बूती के साथ आगे कदम बढ़ाये हैं और फलस्वरूप वह न सिर्फ विश्व टॉप 30 में शामिल हुए बल्कि भारत के नंबर 1 खिलाड़ी बने। जबकि वर्षों से भारतीय स्क्वाश में यह टैग सौरव घोषाल के पास था, जो विश्व के पूर्व टॉप 10 खिलाड़ी हैं। सौरव का मानना है कि अभय एक ऐसे खिलाड़ी की बेहतरीन मिसाल हैं जो अपने लक्ष्य को पाने के लिए सीमा के अंत तक प्रयास करता है। सौरव के अनुसार, ‘अभय ने सही समय पर अच्छी मेहनत की है। टूर पर उन्होंने कुछ अच्छे मैच जीते। इस समय वह जिस रैंकिंग पर हैं, वह उसके पूर्णत: हकदार हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि वह इसी तरह आगे बढ़ते रहेंगे।’
अभय व सौरव की खेल शैली में अंतर है। सौरव का मानना है कि अभय को अपने खेल में अधिक गति लानी होगी। उनके अनुसार, ‘अभय जो गेम खेलते हैं उसमें थोड़ी ज्यादा गति की ज़रूरत है, क्योंकि टॉप लेवल पर हर कोई उच्च गति पर खेलता है और उन्हें अपना अटैक भी पैना करना होगा। इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि वह मुझसे या जेम्स से एकदम अलग खिलाड़ी हैं। इसलिए उन्हें वह रास्ता तलाश करना होगा जिससे आगे बढ़ा जा सकता है। चुनौती कठिन है, लेकिन असंभव नहीं। यह अच्छा है कि अभय अपना फोकस बनाये हुए हैं, अगर ऐसा न होता तो वह वहां न होते जहां वह हैं।’ लेकिन सबकी निगाहें तो अनाहत पर थीं, जो आग उगलती हुई कोर्ट पर उतरीं, दो शार्प अटैकिंग पॉइंट्स जीते और मैच का रुख एकदम से अपनी तरफ मोड़ दिया। उनके खेल में इतनी अधिक परिपक्वता देखने को मिली कि यह यक़ीन करना कठिन हो रहा था कि उन्होंने अभी अपने जीवन के सिर्फ 18 बसंत देखें हैं।
यह लड़की वास्तव में कमाल है। उसके खेल में केवल पॉवर ही नहीं है बल्कि नियंत्रण भी गजब का है। अनाहत प्लेसिंग पर विश्वास करती हैं, जिसकी वजह से हाना को कोने से कोने में मूव करना पड़ रहा था। अनाहत रैली को खत्म करने से पहले उसे लम्बा खींचती हैं ताकि प्रतिद्वंदी खिलाड़ी थक जाये। स्क्वाश स्टेमिना का खेल है। हालांकि तीसरे गेम में अनाहत की एकाग्रता भंग हुई, लेकिन चौथे गेम में उन्होंने हाना के लिए दरवाज़े बंद कर दिये। बहरहाल, अगर अनाहत एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत लेती हैं, जिसकी संभावनाएं प्रबल हैं, तो यह उनके लिए दोहरे लाभ की स्थिति होगी। स्क्वाश को अब ओलंपिक में शामिल कर लिया गया है। एशियन गेम्स में जो भी एशियन गोल्ड जीतेगा वह ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लेगा। अनाहत ने बताया, ‘यह निश्चितरूप से मेरा लक्ष्य है। अगर मैं एशियन गेम्स के माध्यम से क्वालीफाई कर लेती हूं तो यह बहुत शानदार होगा। अब मेरा लक्ष्य एशियन गेम्स में गोल्ड हासिल करना है।’
दरअसल, अब वह अपने हर कदम को एशियन गेम्स के लेंस से देख रही हैं। वह बताती हैं, ‘प्रत्येक सिंगल प्लेयर इसी प्रतियोगिता में दम लगायेगा। मैं एशियन गेम्स तक अपना 100 प्रतिशत देने का प्रयास करूंगी।’ अनाहत पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 ग्रेगोरी गौइटर के साथ ट्रेनिंग कर रही हैं, जो शिखर तक पहुंचने के हर रास्ते को जानते हैं। उनका अनाहत पर गहरा प्रभाव पड़ा है और अनाहत के खेल में तकनीकी सुधार आया है व मानसिक रूप से भी वह मज़बूत हुई हैं। वह प्राग में ट्रेनिंग करती हैं, जहां ग्रेगोरी रहते हैं। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर





