हास्य और खलनायिका की भूमिका निभाने वाली मनोरमा 

एरिन इसाक डेनियल्स का नाम सुना है? नहीं। इसी उत्तर की उम्मीद थी। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आप उन्हें अच्छी तरह से जानते हैं और आपने उन्हें बड़े पर्दे पर ज़रूर देखा है, कभी हंसाते हुए तो कभी जुल्म करते हुए, जिससे सिनेमाघर से निकलने के बाद आपके दिल में उनके लिए नफरत के भाव ही उभरे होंगे क्योंकि उनका अभिनय था ही इतना सशक्त। साथ ही उन्होंने बॉलीवुड में एक नई अभिनय विधा को जन्म दिया- हास्य खलनायिका। अब भी नहीं समझे कि एरिन इसाक डेनियल्स कौन थीं, तो चलो हम ही बता देते हैं कि हम मनोरमा का ज़िक्र कर रहे हैं, जो ‘सीता और गीता’ (1972), ‘एक फूल दो माली’ (1969) व ‘दो कलियां’ (1968) में अपनी यादगार अदाकारी के लिए हमेशा याद रखी जायेंगी और यह तो उनकी लगभग 160 फिल्मों में से सिर्फ तीन का ही संदर्भ दिया गया है। ‘हाफ टिकट’ में मधुबाला के साथ और ‘बॉम्बे टू गोवा’ में महमूद के साथ उनकी हास्य भूमिकाओं को भी कोई नहीं भूला है। इनके अतिरिक्त ‘दस लाख’, ‘झनक झनक पायल बाजे’, ‘मुझे जीने दो’, ‘महबूब की महंदी’, ‘कारवां’, ‘लावारिस’ आदि भी उनकी यादगार व कामयाब फिल्में हैं। 
एरिन इसाक डेनियल्स का जन्म 16 अगस्त, 1926 को लाहौर, पंजाब, ब्रिटिश इंडिया में हुआ था, जिससे 2026 उनका शताब्दी वर्ष हो जाता है। उनकी मां आयरिश थीं और पिता भारतीय ईसाई थे, जो लाहौर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर थे। उन्होंने अपना फिल्मी करियर बेबी आईरिस के नाम से 1936 में लाहौर में आरंभ किया। उस समय वह क्लासिकल गायन व नृत्य भी सीख रही थीं और रेड क्रॉस के लिए स्टेज शोज भी कर रही थीं। जब वह एक कंसर्ट में परफॉर्म कर रही थीं तो रूप के शोरी ने उन्हें स्पॉट किया और अपनी फिल्म ‘खजांची’ (1941) में उन्हें रोल दिया। शोरी ने ही उन्हें स्क्रीन नेम मनोरमा दिया। जल्द ही मनोरमा लाहौर की सबसे सफल व सबसे महंगी अदाकारा बन गईं। उन्हीं दिनों मनोरमा व एक्टर राजन हक्सर के बीच इश्क परवान चढ़ने लगा। दोनों ने शादी कर ली। देश विभाजन के बाद मनोरमा व राजन हक्सर लाहौर से बॉम्बे (अब मुंबई) शिफ्ट हो गये, जहां दोनों को नये सिरे से संघर्ष आरंभ करना पड़ा।
एक्टर चन्द्रमोहन, जो मनोरमा को अच्छी तरह से जानते थे, ने बॉम्बे के अनेक निर्माताओं से उनके नाम की सिफारिश की। हालांकि मनोरमा ने बतौर हीरोइन सुपरहिट पंजाबी फिल्म ‘लछी’ दी, लेकिन ‘घर की इज्ज़त’ (1948) में उन्हें दिलीप कुमार की बहन की भूमिका ही मिल सकी और इसके बाद उनके पास अधिकतर चरित्र भूमिकाओं के ही ऑफर आये, विशेषकर इसलिए भी क्योंकि उन दिनों निर्माता शादीशुदा अदाकारों को हीरोइन की भूमिका में लेना पसंद नहीं करते थे। राजन हक्सर बॉम्बे में निर्माता बन गये। मनोरमा व राजन हक्सर के घर में एक बेटी रीटा हक्सर ने जन्म लिया, लेकिन इसके बाद दोनों पति-पत्नी के बीच संबंध तनावपूर्ण रहने लगे और अनेक वर्षों की शादी का परिणाम आखिरकार तलाक के रूप में निकला। रीटा हक्सर ने बतौर हीरोइन संजीव कुमार के साथ फिल्म ‘सूरज और चांद’ में काम किया, जो असफल रही और उनका फिल्मों से मोह भंग हो गया। रीटा हक्सर ने एक इंजीनियर से शादी की और गल्फ में जा बसीं। बहरहाल, अपना गम भुलाने के लिए मनोरमा हास्य व खलनायिका की भूमिकाएं करने लगीं, खासकर इसलिए भी क्योंकि टुन टुन (उर्फ उमा देवी, ‘अफसाना लिख रही हूं दिले बेकरार का’ वाली) की तरह उनका भी वज़न आवश्यकता से अधिक बढ़ गया था। बहरहाल, अकबर खान की ‘हादसा’ (1983) फिल्म करने के बाद मनोरमा ने अपना ध्यान टीवी सीरियलों की तरफ केंद्रित कर लिया और वह पांच साल के लिए दिल्ली शिफ्ट हो गईं। 
दिल्ली में मनोरमा ने ‘दस्तक’ सीरीज में काम किया, जिसमें शाहरुख खान ने भी अदाकारी की थी। मनोरमा ने महेश भट्ट की फिल्म ‘जुनून’ (1992) के लिए भी शूटिंग की थी, लेकिन एडिटिंग की मेज़ पर उनके रोल को काट दिया गया। 2001 के आसपास मनोरमा बालाजी टेलीफिल्मस के सीरियलों ‘कश्ती’ व ‘कुंडली’ में काम करने लगीं। उन्होंने सीरियल ‘कुटुंब’ में हितेन तेजवानी की दादी की भूमिका भी निभायी थी। मनोरमा की अंतिम फिल्म दीपा मेहता की ‘वाटर’ (2005) थी, जिसमें अपने अभिनय से उन्होंने हॉलीवुड के आलोचकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया था और वे उनकी प्रशंसा में बड़े-बड़े लेख लिख रहे थे। इस फिल्म में मधुमति की भूमिका निभाने के लिए वह दीपा मेहता की पहली व अंतिम पसंद थीं। इस फिल्म का निर्माण कार्य बनारस में रोक दिया गया था और फिर पांच साल बाद इसे श्रीलंका में शूट किया गया। तब तक फिल्म की पूरी कास्ट को बदल दिया गया था, सिवाय मनोरमा के। मनोरमा को 2007 में ब्रेन स्ट्रोक पड़ा। हालांकि वह इससे ठीक हो गई थीं, लेकिन उन्हें बोलने में तकलीफ होने लगी और कुछ अन्य जटिलताओं का भी उन्हें सामना करना पड़ा। आखिरकार 15 फरवरी 2008 को मनोरमा का चारकोप, मुंबई में निधन हो गया।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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