प्रधानमंत्री की सक्रियता
कोविड महामारी विश्व भर के लिए एक बहुत बड़ी और दर्दनाक चुनौती बन गई थी, जिसकी भेंट लाखों ही लोग चढ़ गए थे। भारत में भी इस नामुराद वायरस ने बड़ा नुकसान पहुंचाया था और एक बार तो देश भर में प्रत्येक तरह का कामकाज ठप्प होकर रह गया था। उस समय गम्भीर हालात के दृष्टिगत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बड़ी चिंता के साथ-साथ इस काम को समर्पित होकर पूरी सक्रियता दिखाई थी। अनेकानेक कठिनाइयों और भारी नुकसान के बावजूद देशवासियों को ढाढस दिया था। कोविड के टीके ईजाद होने से और अपने देश में भी इस संबंध में सम्बद्ध कम्पनियों को उत्साहित करके जहां भारी संख्या में लोगों का टीकाकरण किया गया था, वहीं विदेशों के ज्यादातर लोगों को भी इस काम में भागीदार बनाया गया था।
भिन्न-भिन्न देशों को भारी मात्रा में टीकों की खेप भेजने से भारत का अन्तर्राष्ट्रीय प्रभाव बढ़ा था। अब पश्चिम एशिया में हो रहे भयावह युद्ध और इससे पैदा होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर घातक प्रभावों से भारत भी नहीं बचा, परन्तु इस समय भी प्रधानमंत्री मोदी की ओर से दिखाई जा रही सक्रियता और की जा रही योजाबंदी देशवासियों में बड़ा विश्वास पैदा करने वाली रही है। विगत दिवस श्री नरेन्द्र मोदी ने चल रहे संसद के अधिवेशन में पहले 23 मार्च को लोकसभा में और फिर अगले दिन राज्यसभा में इस गम्भीर मामले के प्रति जहां सरकार की पहुंच और उसकी ओर से किए जा रहे प्रत्येक स्तर पर यत्नों का विवरण दिया, वहीं देशवासियों को एकजुट होकर इस संकटमय समय का दृढ़ता और विश्वास के साथ सामना करने का संदेश भी दिया। इस संकट से उभरे मामलों को भी पारदर्शी ढंग से सभी के साथ साझा किया। कुछ ज़रूरी उभरे मामलों में उन्होंने तेल, खादों और दक्षिण एशिया में रह रहे लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिकों संबंधी भी स्थिति को स्पष्ट किया और कहा कि सरकार यह सुनिश्चित बना रही है कि आम परिवारों को कम से कम मुश्किलों का सामना करना पड़े। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के निकट होर्मुज जलडमरू में व्यापारिक जहाज़ों का गुज़रना मुश्किल हो गया है, इसलिए इसको खोला जाना ज़रूरी है परन्तु तेल और गैस की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भिन्न-भिन्न देशों के सप्लाइयरों के साथ लगातार सम्पर्क किया जा रहा है। इसके साथ ही युद्ध प्रभावित क्षेत्र में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए भी बड़े यत्न किए जा रहे हैं।
सरकार लगातार यह यत्न कर रही है कि तेल और गैस की सप्लाई जहां तक भी सम्भव हो सके, जारी रहे। यह भी कि देश के सभी पॉवर प्लांटों के पास कोयला का उचित भंडार है, यह भी कि भारत के पास 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक पैट्रोलियम भंडार हैं और इन्हें और बढ़ाने के लिए लगातार प्रबंध किए जा रहे हैं। राज्यसभा में सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों ही ज़रूरतमंद लोगों को गरीब कल्याण योजना का लाभ मिलता रहेगा। चाहे पूरे विश्व में गम्भीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है परन्तु भारत यह यत्न कर रहा है कि इसका अधिक प्रभाव देश पर न पड़े। उन्होंने कालाबाज़ारी और जमाखोरी पर चिंता ज़रूर प्रकट की और चिंता प्रकट करते हुए सभी को इसमें सहयोग देने की अपील की। विगत दिवस राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केन्द्र शासित प्रदेशों के उप-राज्यपालों के साथ बैठक करते हुए भी उन्होंने विश्वास दिलाया कि प्रत्येक स्थिति नियंत्रण में है। दरपेश सख्त समस्याओं का मुकाबला सभी को मिल-जुल कर करना चाहिए। इस संबंध में राज्यों की ज़िम्मेदारी अधिक बनती है कि कैसे वे लोगों को विश्वास में लेकर इस स्थिति का मुकाबला करते हैं।
कृषि के क्षेत्र में उन्होंने कहा कि खाद्य भंडारण और इसका वितरण सचेत रूप में किया जाना ज़रूरी है और यह भी कि ज़रूरी वस्तुएं उपलब्ध भी हों और इनकी कीमतें भी स्थिर रखने का यत्न किया जाये। हम महसूस करते हैं कि आज समूचे देश को एक साझे मंच पर एकत्रित होकर एक समर्पित भावना से इस सकंटमय समय का मुकाबला करने की ज़रूरत होगी, क्योंकि आपसी सहयोग से ही ऐसा काम सफल हो सकता है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

