राजस्थान के सौ द्वीपों का शहर बांसवाड़ा

राजस्थान का नाम आते ही मन में रेगिस्तान, किलों और उबड़ खाबड़ मैदानों की तस्वीरें उभरने लगती हैं। लेकिन इस राज्य के सबसे दक्षिणी हिस्से में इससे एकदम विपरीत तस्वीर सामने आती है, जिसमें हरी भरी पहाड़ियां हैं, बहता हुआ स्वच्छ पानी है और नदी की झील में छोटे छोटे द्वीप हैं। यह जगह है बांसवाड़ा, जिसे सौ द्वीपों का शहर भी कहते हैं क्योंकि माही नदी के बैकवाटर्स में द्वीपों का एक ़गज़ब का पैटर्न दिखायी देता है। यह द्वीप माही बांध और उसके रिजर्वायर के निकट बनते हैं। इस क्षेत्र के प्राकृतिक सुंदरता, पेड़ों से भरी पहाड़ियां और नदियां इतना सुंदर नज़ारा पेश करती हैं कि एक पल को यह लगता ही नहीं कि आप राजस्थान में हैं। दरअसल, अधिकतर लोग अपने मन में राजस्थान की एक ऐसी छवि बनाये हुए हैं जैसे वह अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में हों। बांसवाड़ा इस छवि पर विराम लगाता है। 
माही बजाज सागर प्रोजेक्ट के निर्माण के बाद जिस तरह से माही नदी का पानी बहा व फैला उससे बांसवाड़ा का नाम सौ द्वीपों का शहर पड़ गया। जब पानी नदी के बेसिन को भर देता है तो वह अनेक छोटे-छोटे द्वीपों में टूट जाता है और वह लैंडस्केप को ऐसे भर देते हैं जैसे पानी पर जगह-जगह बड़े बड़े हरे बिंदु बन गये हों। यह फीचर अपने आप में इतना अनोखा है कि प्राचीन साहित्य में भी इस क्षेत्र के नदी द्वीपों का उल्लेख मिलता है, जिससे बांसवाड़ा की द्वीप शहर छवि बन जाती है। यह पैटर्न मानसून के महीनों में विशेषरूप से मुखर हो जाता है, जब बारिश बहुत अधिक बरसती है और नदी का विस्तार हो जाता है। राजस्थान में सबसे ज्यादा बारिश बांसवाड़ा में ही पड़ती है और पानी की अधिकता बैकवाटर्स में वृद्धि करने लगती है, जहां यह द्वीप बनते हैं। पर्यटकों के लिए यह नज़ारा मंत्रमुग्ध करने वाला होता है कि शांत पानियों के बीच में, हरी पहाड़ियों के फ्रेम में जड़े हुए यह द्वीप न सिर्फ ताज़गी का एहसास कराते हैं बल्कि बल्कि ऐसा नज़ारा पेश करते हैं जिसकी कम से कम राजस्थान के अन्य भागों में कल्पना करना कठिन है। 
बांसवाड़ा दक्षिण राजस्थान के वागड़ क्षेत्र में है, गुजरात व मध्य प्रदेश की सीमाओं के करीब। यह एक ऐसी जगह है जहां संस्कृतियों का संगम होता है और प्रकृति अपने यौवन को पहुंचती है। यह ज़िला उपजाऊ ज़मीन, जंगलों और पहाड़ियों का मिश्रण है। इस जगह का नाम बांसवाड़ा इसलिए पड़ा क्योंकि एक दौर था जब यहां बांस बहुत बड़ी संख्या में उगते थे। राजस्थान के अन्यों हिस्सों के विपरीत बांसवाड़ा पानी की नदियां, तालाब, झीलें हैं और हरियाली भी है। यही वजह है कि इसे अक्सर ‘राजस्थान का चेरापूंजी’ भी कह दिया जाता है, स्थानीय संदर्भों में- आमतौर से सूखे राज्य के बीच असामान्य वर्षा पैटर्न। माही नदी के बैकवाटर्स में अनेक द्वीप बांसवाड़ा को एक अलग पहचान प्रदान करते हैं। बहरहाल, बांसवाड़ा में पर्यटकों को नदी नज़ारों से अलग भी बहुत कुछ देखने को मिलता है। इस क्षेत्र में ऐतिहासिक मंदिर हैं, प्राचीन खंडहर हैं और प्राकृतिक स्थल हैं, जो आकर्षण का केंद्र बनते हैं। मसलन, आनंद सागर झील, जो सदियों पहले बनी, वह बगीचों व प्रतीकात्मक समाधियों से घिरी हुई है। पवित्र स्थल भी हैं जैसे अब्दुल्लाह पीर की दरगाह जहां देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं और पहाड़ियों में प्राचीन मंदिर व आध्यात्मिक स्थल हैं। अंदेश्वर पार्श्वनाथजी का विख्यात जैन मंदिर कुशालगढ़ तहसील में एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है, जिसके दर्शन करने के लिए धर्मभीरु पर्यटक आते हैं। एक अन्य दिलचस्प साईट राम कुंड है, जोकि एक पहाड़ी के नीचे एक गहरी गुफा है। एक अन्य ऐतिहासिक स्थल राज मंदिर है, जिसे सिटी पैलेस भी कहते हैं। इसका निर्माण 16वीं शताब्दी की राजस्थान शैली में किया गया है। एक प्राकृतिक गुफा में पहाड़ी के ऊपर विख्यात शिव मंदिर, मदारेश्वर मंदिर, है, जो दोनों दर्शन व देखने योग्य है। बांसवाड़ा से मात्र 10 किमी के फासले पर एक अजीबो-गरीब गांव सिंगपुरा है जो ताज़गी भरी ऑ़फ बीट छुट्टियों का अनुभव प्रदान करता है। यह गांव सुंदर झील, प्रभावी पहाड़ियों, हरे भरे जंगलों और दूर तक फैली हरियाली से घिरा हुआ है। यह एकदम लीक से हटकर पर्यटन स्थल है। दरअसल, बांसवाड़ा इतना सुंदर पर्यटन स्थल है कि यह स्थानीय जीविकापार्जन का आधार बन गया है। 
प्राकृतिक जल सुंदरता, हरी भरी पहाड़ियों, ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत के कारण बांसवाड़ा राजस्थान के विशिष्ट शहरों में शामिल हो गया है। मानसून के सीजन में द्वीप जो माही नदी के बैकवाटर्स में ‘तैरते’ हैं, हमें याद दिलाते हैं कि भारत का भूगोल हमें उन राज्यों में भी आश्चर्यचकित कर देता है जो अपने सूखे के लिए जाने जाते है। सौ द्वीपों का शहर इस अनोखे आकर्षण का सबूत है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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