विज्ञान व तकनीक ने दूरसंचार को नई दिशा दी
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हर वर्ष 17 मई को विश्व भर में वैश्विक दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के महत्व को रेखांकित करना और डिजिटल असमानताओं को कम करने के प्रति जागरूकता फैलाना है। इस दिन का ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि 17 मई, 1865 को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार दिवस पर अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की स्थापना हुई थी। वर्ष 1969 से इसे विश्व दूरसंचार दिवस के रूप में मनाया जाने लगाए और 2005 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे ‘विश्व सूचना समाज दिवस’ के रूप में मान्यता दी। बाद में दोनों को मिलाकर वर्तमान स्वरूप दिया गया।
प्राचीन काल में संदेशों के आदान-प्रदान के लिए पत्र, ध्वनि संकेत, झंडे, ड्रम और हेलीओग्राफ जैसे साधनों का उपयोग किया जाता था। समय के साथ विज्ञान और तकनीक के विकास ने संचार के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया। टेलीफोन, रेडियो, टेलीविजन और कंप्यूटर जैसे उपकरणों के आगमन ने दूरियों को कम कर दिया। आज इंटरनेट, मोबाइल फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने संचार को त्वरित, सरल और वैश्विक बना दिया है।
भारत में दूरसंचार की औपचारिक शुरुआत 1881 में हुई थी, जब कलकत्ता (कोलकाता), बाम्बे (मुम्बई) और मद्रास (चेन्नई) में टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित किए गए। यह भारतीय संचार क्रांति की आधारशिला साबित हुआ। और वर्तमान समय में दूरसंचार क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहा है। 3जी, 4जी और अब 5जी तकनीक ने इंटरनेट की गति और क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है। आने वाले समय में 6जी तकनीक की दिशा में भी तेजी से कार्य हो रहा है। 5जी तकनीक न केवल तेज़ इंटरनेट प्रदान करती है, बल्कि स्मार्ट सिटी, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव ला रही है।
कोविड-19 महामारी के दौरान दूरसंचार तकनीक का महत्व और अधिक बढ़ गया था। वर्क फ्राम होम, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल सेवाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिक जीवन में दूरसंचार अनिवार्य हो चुका है। आज क्लाउड कम्युनिकेशन और डेटा सेंटर तकनीक संचार व्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। विश्व भर में अधिकांश व्यवसाय डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्लाउड सेवाओं पर निर्भर होते जा रहे हैं। डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास ने न केवल संचार को तेज बनाया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सूचना के आदान-प्रदान को भी सुगम किया है।
दूरसंचार तकनीक ने शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन लाए हैं। आज इंटरनेट के माध्यम से कोई भी व्यक्ति घर बैठे शिक्षा प्राप्त कर सकता है और अपनी बात विश्व तक पहुंचा सकता है। जहां पहले लोगों के बीच संवाद के लिए वर्षों का अंतराल होता था, वहीं आज कुछ ही सेकेंड में दुनिया के किसी भी कोने से सम्पर्क स्थापित किया जा सकता है। यह तकनीक ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों को भी मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विश्व दूरसंचार दिवस का मुख्य उद्देश्य है—डिजिटल विभाजन को कम करना, ग्रामीण क्षेत्रों तक संचार सुविधाएं पहुंचाना, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना और वैश्विक कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना।
विज्ञान और तकनीक के समन्वय ने दूरसंचार को एक नई दिशा दी है। आज यह केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, शिक्षा और वैश्विक सहयोग का आधार बन चुका है। विश्व दूरसंचार दिवस हमें यह संदेश देता है कि तकनीक का उपयोग मानवता के कल्याण और समावेशी विकास के लिए किया जाना चाहिए। (एजेंसी)



