क्या सच में सूरज का रंग पीला होता है ?

‘दीदी, आज स्कूल में मेरे एक क्लासमेट ने एक कविता पढ़ी, जिसमें उसने सूरज को पीले रंग का बताया। अक्सर मुझे भी महसूस होता है कि सूरज का रंग पीला ही होता है। क्या सच में सूरज का रंग पीला होता है?’
‘नहीं।’ 
‘फिर वह किस रंग का है?’ 
‘सफेद रंग का।’ 
‘कैसे?’
‘वैज्ञानिकों के मुताबिक सूरज की रोशनी में इन्द्रधनुष के सातों रंग मौजूद होते हैं। जब यह सभी रंग एक साथ मिलते हैं, तो हमारी आंखों को सफेद रंग दिखायी देता है। दरअसल, अंतरिक्ष से देखने पर सूरज दूध जैसा चमकीला सफेद दिखायी देता है, उसमें पीलेपन की झलक नहीं होती।’
‘तो फिर सूरज हमें कभी नारंगी तो कभी लाल और कभी पीला क्यों दिखायी देता है?’
‘पृथ्वी का वायुमंडल सूरज के रंग को बदलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।’ 
‘वह किस तरह से?’
‘सूरज की किरणें जब हमारे वायुमंडल में प्रवेश करती हैं, तो गैस और धूल के कणों से टकराकर बिखर जाती हैं। इस प्रक्रिया को विज्ञान में प्रकीर्णन या स्कैटरिंग कहते हैं।’
‘अच्छा।’
‘चूंकि नीले व बैंगनी रंगों की वेवलेंथ छोटी होती है, इसलिए वह ज़्यादा बिखरते हैं और हमें आसमान नीला दिखायी देता है।’
‘इसका मतलब यह हुआ कि आसमान भी नीला नहीं है।’
‘हां। वह ग्रे है और सूरज की रोशनी के बिखरने से नीला दिखायी देता है।’
‘फिर सुबह और शाम सूरज लाल या नारंगी क्यों दिखायी देता है?’
‘चूंकि उस समय उसकी रोशनी को लम्बी दूरी तय करनी पड़ती है। लम्बी दूरी में नीली व हरी रोशनी बिखर जाती है, जबकि लाल और नारंगी रंग हमारी आंखों तक पहुंचते हैं। यह भी याद रखों कि सूरज के अंदर हाइड्रोजन से हीलियम बनने की परमाणु संलयन प्रक्रिया लगातार ऊर्जा पैदा करती है, जिससे यह इतना चमकीला और गर्म दिखायी देता है।’ -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

#क्या सच में सूरज का रंग पीला होता है ?