सावधान! आप कैमरे की नज़र में हैं
इन दिनों कैमरे के लेंस की जिम्मेदारी राष्ट्रप्रधान से भी अधिक बढ़ गई है। बेचारे को वह सब देखना पड़ता है, जिसे खुली आंखें भी देखने से इनकार कर दें। फर्क बस इतना है कि जो दृश्य आंखें झेल नहीं पातीं, वही दृश्य देखने के लिए लोग देर रात तक मोबाइल स्क्रीन पर मचलते रहते हैं।
एक समय था जब रील वाले कैमरे हुआ करते थे, अब रीलों के लिए कैमरे हुआ करते हैं।
तब याशिका के कैमरे में 36 या 40 फ्रेम की फिल्म रील उजाले में लगाई जाती थी और अंधेरे में निकाली जाती थी। अब हालात उलटे हैं, अंधेरे में रिकॉर्ड किए गए दृश्य उजाले में वायरल किए जाते हैं।
प्रगति का पहिया घूमते-घूमते कुछ ज्यादा ही घूम गया है। पहले कैमरे स्टूडियो, विवाह या पर्यटन स्थलों पर शालीनता से दिखाई देते थे। अब तो हर हाथ में मोबाइल है और हर मोबाइल में कैमरा।
स्थिति यह है कि सभी समारोहों में इंसानों से ज्यादा मोबाइल कैमरे उपस्थित मिलते हैं। ऊपर से सीसीटीवी और हिडन कैमरे तो ऐसे तैनात हैं कि दीवारें भी अब शर्माने लगी हैं।
बहरहाल, तुलनात्मक अध्ययन छोड़िए, सीधे मुद्दे पर आते हैं। कैमरे के लेंस पर पड़ने वाले नैतिक और अनैतिक भार की चर्चा करें। लेंस में अद्भुत सहनशक्ति है। वह महात्मा गांधी के ‘बुरा मत देखो’ वाले बंदर का कट्टर विरोधी है। उसे जो दिखता है, वह सब देखता है, नि:संकोच, बिना लेंस को विराम दिए।
बेडरूम के रहस्य, पार्कों एवं सिनेमा हॉल के ‘प्रकृति-प्रेम’, रिश्वत लेते कर्मियों की कर्मठता, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता-अभियान की पोल, रील बनाने को आतुर युवतियों का फूहड़ एटीट्यूड से लेकर चोरी, छीनतई एवं अपराध की लाइव कवरेज तक। मज़े की बात यह है कि लेंस केवल देखता ही नहीं, प्रसारित भी कर देता है- ‘जो देखा, वही दिखाया।’ अब सत्य का स्थान ‘वायरल’ ने ले लिया है।
वैसे इन कैमरों का एक शुभचिंतक मानव समुदाय भी है, जो चाहते हैं कि कैमरे के लेंस को वह सब ना देखना पड़े, जो अनुचित है, अमर्यादित है। इसलिए उनके द्वारा जगह-जगह बोर्ड लगवाया जाता है, ‘सावधान! आप कैमरे की निगरानी में हैं।’
फिर भी कैमरे को सब कुछ देखना पड़ता है बिना थके बिना रुके।
हालांकि इन दिनों एआई जनित वीडियो और तस्वीरों ने कैमरे की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब लेंस बेचारा सोच में है- ‘जो मैंने देखा, वह भी सच नहीं और जो सच है, वह मैंने देखा नहीं!’
कुल मिलाकर, सभी प्रकार के मानवीय गतिविधियों को कैद करने वाला कैमरे का लेंस आधुनिक युग का सबसे बड़ा ‘दर्शक’ और ‘दोषी’ दोनों बनता जा रहा है।
-मो. 7765954969

