अपने दफ्तर में खुद को यूं बनाएं इम्पोर्टेंट इम्प्लॉयी
सीधी सी बात है कि इम्पोटेंट इम्प्लॉयी सिर्फ आंख मूंदकर मेहनत करने से नही बन सकते। क्योंकि गधे की तरह मेहनत करने वाला कर्मचारी ज़रूरी नहीं है कि ऑफिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण कर्मचारी भी हो। इम्पोटेंट या महत्वपूर्ण कर्मचारी बनने का पैमाना यह है कि खुद को ऐसा बनाएं कि आपके बिना काम रुक जाए या हर ज़रूरी फैसले के समय आपको उसमें शामिल करना ऑफिस के लिए ज़रूरी हो जाए। याद रखिए यह पोजीशन किसी को खुद ब खुद नहीं मिल जाती बल्कि इस स्थिति में पहुंचने के लिए हमें कुछ खास करना होता है। वह खास क्या होता है, आइये क्रम से जानें।
हर दफ्तर के दो तरह के कर्मचारी होते हैं, एक जो काम करते हैं, दूसरे जिनके बिना ऑफिस के कई काम अटक जाते हैं। आपको यह दूसरा कर्मचारी बनना है ताकि आपकी गिनती ऑफिस के सबसे महत्वपूर्ण कर्मचारी में हो। ऐसा बनने के कई उपाय हैं, आप कोई भी रास्ता अपना सकते हैं। जैसे दफ्तर के किसी एक महत्वपूर्ण काम के या उस काम की प्रोसेस के एक्सपर्ट बन जाएं। ऐसी स्किल में कमांड हासिल करें, जो ऑफिस में दूसरे लोगों के पास न हो या हो तो सिर्फ कुछ एक लोगों के पास हो। अधिकतर लोग समस्या बताने में बहुत माहिर होते हैं। आप किसी से पूछिये दफ्तर में क्या समस्याएं हैं, तो वह दर्जनों समस्याएं बिना क्षण गंवाये गिना देंगे। लेकिन ऐसे लोग इम्पोटेंट नहीं होते। भले बॉस कई बार ऐसे कर्मचारियों को सजग और ऑफिस के लिए तात्कालिक महत्वपूर्ण मान ले। लेकिन स्थायी रूप से इम्पोटेंट कर्मचारी वो होता है, जो बॉस को समस्याएं नहीं बताता, हर जगह दिक्कतें ही नहीं पकड़ता बल्कि महत्वपूर्ण कर्मचारी वो है, जो प्रॉब्लम तो बताए, साथ यह भी कहे कि इस प्रॉब्लम में मैं यूं हल कर दूंगा। वास्तव में इन्हीं से फर्क पड़ता है। हर बॉस को अपने अंडर ऐसा कर्मचारी चाहिए होता है, जो गलतियां तो चाहे जितनी निकाले, पर उन गलतियों को हल करने का माद्दा भी रखे। अगर आप सिर्फ समस्याओं की तरफ इशारा करते हैं, समस्याओं को हल करने में आपकी कोई रुचि या सामर्थ्य नहीं है, तो आप दफ्तर के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं।
जी हां, दफ्तर में वो कर्मचारी भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, जो जिम्मेदारी उठाते हैं। जो भी काम आपको मिले, उसे अपनी जिम्मेदारी समझें और उसे न करने के तार्किक बहाने न दें बल्कि नतीजा दें और शायद यह कहना ज़रूरी नहीं है कि महत्वपूर्ण कर्मचारी वही होता है, जो काम को डेडलाइन पर पूरा करे। तय समय सीमा के भीतर अगर काम नहीं होता, तो काम करने का भी कोई महत्व नहीं है। जब आपको लेकर दफ्तर में कई जिम्मेदार लोग यह कहने लगें या मानने लगें कि यह काम आपको दे दिया जायेगा, तो आप समय पर कर ही लेंगे, तो समझिये आप दफ्तर के महत्वपूर्ण कर्मचारी हो चुके हैं।
जी हां, दफ्तर में अपनी विजिबिल्टी बढ़ाइये। चुपचाप काम करना नहीं होता। क्योंकि यह भी सच है कि अगर आप दिखेंगे नहीं, तो आप महत्वपूर्ण भी नहीं माने जाएंगे। इसलिए काम करें और दफ्तर में महत्वपूर्ण समय पर मौजूद रहें। अपने किये हुए काम की अपडेट उन लोगों तक पहुंचाएं, जिनको आपके द्वारा किये गये काम से मतलब है। बॉस के साथ होने वाली मीटिंग में बोलें और अपनी बात को संक्षिप्त व स्पष्ट तरीके से रखें। क्योंकि वैल्यू और विजिबिल्टी मिलकर ही किसी को महत्वपूर्ण बनाती हैं।
बॉस का गो टू पर्सन बनना मुश्किल नहीं है, सिर्फ ये करना है कि बॉस द्वारा दिये गये काम को समय पर, साफ-सुथरा ढंग से और पूरी ईमानदारी से करें ताकि बॉस के काम को आप आसान बना सकें और बिना कहे उनकी प्राथमिकता को समझें ताकि जब भी बॉस किसी महत्वपूर्ण काम के लिए सोचें कि इसे किसे दूं, तो उनके दिमाग में आपका ही ख्याल आए।
कई लोग इसलिए नहीं पीछे रह जाते कि वो काम कम करते हैं, कि वह अक्लमंद कम होते हैं बल्कि कुछ लोग अपनी कामकाजी ज़िंदगी में इसलिए कई लोगों से पीछे रह जाते हैं, क्योंकि उन्हें अपने किये हुए को या अपनी कर सकने की क्षमता को सही तरीके से बताना नहीं आता यानी इनकी कम्युनिकेशन स्किल मजबूत नहीं है। अगर दफ्तर का महत्वपूर्ण कर्मचारी बनना है तो संवाद कला में माहिर होना भी ज़रूरी है। बात साफ और संक्षिप्त करें। अपने ई-मेल और मैसेज प्रोफेशनल रखें। लोगों को कोई चीज समझानी हो तो इस तरह समझाएं कि उन्हें आसानी से आपकी बात समझ में आ जाए। अगर आपमें यह क्षमता है, तो आप दफ्तर के महत्वपूर्ण कर्मचारी हैं।
चाहे जितना एआई का जमाना हो, चाहे जितना प्रोफेशनल दौर हो, लेकिन पर्सनल कनेक्शन का मजा ही कुछ और होता है। जहां भी रहें, वहां हमेशा महत्वपूर्ण लोगों के साथ अपना एक कनेक्ट डेवलप करें। अगर किसी कंपनी के एक विभाग में काम कर रहे हैं, तो ज़रूरी नहीं कि उस विभाग के बाहर से किसी व्यक्ति से कोई संबंध ही न रखें। यही नहीं अगर रोज एक ही रास्ते से और एक ही समय पर सार्वजनिक वाहन में सफर करते हैं, तो ऐसे ही रोज सफर करने वालों से जान पहचान बनाएं। कौन कब काम आ जाता है, कोई नहीं जानता। ये कुछ ऐसे गुण हैं, जिनके होने पर आप सिर्फ एक कुशल कर्मचारी ही नहीं बनेंगे बल्कि अपने दफ्तर के महत्वपूर्ण कर्मचारी भी साबित होंगे।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर




