वैभव सूर्यवंशी के राष्ट्रीय टीम की तरफ बढ़ते कदम

15 साल के वैभव सूर्यवंशी आईपीएल में अब तक दो सेंचुरी लगा चुके हैं। अंडर-19 वर्ल्ड कप में वह प्लेयर ऑ़फ द टूर्नामैंट रह चुके हैं। इसी साल जनवरी में सम्पन्न इस टूर्नामैंट के फाइनल में उन्होंने 175 रनों की पूरी दुनिया का ध्यान खींचने वाली पारी खेली थी। इसके साथ ही वह एशिया कप राइजिंग स्टार्स में भी खेल चुके हैं और लगभग हर टूर्नामैंट में वैभव ने अपनी चर्चा ही बढ़ायी है। यही कारण है कि पिछले एक साल से न केवल आम क्रिकेट प्रेमी बल्कि कई क्रिकेट के जानकार (हालांकि इस मामले में जानकारों की राय बंटी हुई है) भी कहना शुरु कर चुके हैं कि सचिन तेंदुलकर की तरह वैभव सूर्यवंशी को भी कम उम्र में राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बना लेना चाहिए क्योंकि वह विशेष प्रतिभा हैं। पिछले दिनों बीसीसीआई के पदाधिकारियों से भी कई बार सार्वजनिक तौर पर इस संबंध में सवाल पूछे गये हैं। उसी सबको देखते हुए वैभव ने अब धीरे-धीरे राष्ट्रीय टीम की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।
आईपीएल के तुरंत बाद जून 2026 में श्रीलंका में होने वाली ए टीमों की ट्राई सीरीज में वैभव इंडिया ए टीम का हिस्सा होंगे। भारत के अलावा इस ट्राई सीरीज में श्रीलंका और अफगानिस्तान की ए टीमें हिस्सा ले रही हैं। वैभव सूर्यवंशी पिछले दो बार से आईपीएल खेल रहे हैं। उन्होंने पहले सीजन में एक सेंचुरी लगायी थी और इस सीजन में भी अब तब एक सेंचुरी लगा चुके हैं। पहले सीजन में वैभव ने गुजरात के खिलाफ 36 बॉलों में और इस सीजन में हैदराबाद के खिलाफ 37 गेंदों में सेंचुरी लगा चुके हैं। जबकि कई दिग्गज बल्लेबाज सालों से खेलते होने के बावजूद अभी तक आईपीएल में सेंचुरी नहीं मार पाये। साल 2026 यानी मौजूदा सीजन में वैभव ने अभी तक आईपीएल में 11 मैचों में 237 की स्ट्राइक से 440 रन बनाये हैं। इसी दौरान उन्होंने जयपुर में हैदराबाद के खिलाफ 37 बॉलों में जो सेंचुरी लगायी, उसमें 12 छक्के, 5 चौके थे। कहने का मतलब यह है कि पिछले दो सालों से वैभव सूर्यवंशी दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों को चैन से बैठने नहीं दे रहे। लगातार उन्हें अपने खेल से दीवाना बनाये हुए हैं।
वैसे वैभव का 12 साल की उम्र में रणजी में डेब्यू हो गया था। साल 2024 में उन्होंने मुंबई और छत्तीसगढ़ के खिलाफ दो फर्स्ट क्लास मैचों में 31 रन बनाये थे। इस तरह उन्होंने सचिन तेंदुलकर और युवराज सिंह दोनों का फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। क्योंकि तेंदुलकर ने पहली बार 15 साल की उम्र में और युवराज ने 18 साल की उम्र घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था। जबकि वैभव ने 13 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंडर-19 यूथ टेस्ट सीरीज में सिर्फ 58 गेंदों पर शतक जड़कर तहलका मचा दिया था। यह अंडर-19 टेस्ट क्रिकेट में दूसरा सबसे तेज शतक था। इस तरह वैभव के साथ ‘होनहार बिरवान के होत चीकने पात...’ वाली जो कहावत जुड़ी हुई है, उसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ी बल्कि लगातार और तेज होती जा रही है। वैभव ने लिस्ट ए के 50 ओवर वाले अब तक 8 मैच खेले हैं, जिसमें 44.12 की औसत और 164.95 के स्ट्राइक से 353 रन बनाये हैं। उनका बेस्ट स्कोर 190 रन रहा है। सूर्यवंशी ने इस फॉर्मेट में भी एक शतक और एक अर्द्धशतक जड़ चुके हैं। इस तरह देखें तो सूर्यवंशी मैच दर मैच और मैदान दर मैदान तथा प्रतियोगिता दर प्रतियोगिता अपनी चमक बढ़ाते जा रहे हैं। 
साल 2025 में एशिया कप राइजिंग स्टार्स टी-20 के चार मैचों में 59.75 की औसत से 243.87 के स्ट्राइक रेट से 239 रन बनाये थे और इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर 144 रहा था। इसलिए न सिर्फ दर्शकों की तरफ से बल्कि क्रिकेट के अनेक जानकारों का भी लगातार कहना था कि हमारे पास जो एक विशेष प्रतिभा है, उसका राष्ट्रीय टीम में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अगले महीने जून में श्रीलंका में शुरु होने वाली ट्राई सीरीज में इंडिया ए में उनका चयन वास्तव में राष्ट्रीय टीम में चुने जाने के पहले की औपचारिकता जैसा है। अगर अब तक वह हर टूर्नामैंट में जिस तरह प्रदर्शन करते रहे हैं, अगर वैसा ही प्रदर्शन श्रीलंका में भी कर दिया, जिसकी बहुत ज्यादा उम्मीद है, तो लगभग तय हो जायेगा कि वह तेंदुलकर से भी पहले राष्ट्रीय टीम में चुने जाकर एक विशेष रिकॉर्ड बनाएंगे। तिलक वर्मा की कप्तानी में श्रीलंका जा रही इंडिया ए टीम में उनके अलावा प्रियांश आर्य, रियान पराग, आयुष बडोनी, प्रभसिमरन सिंह, यश ठाकुर, अंशुल कंबोज और अरशद खान भी होंगे। इन सब खिलाड़ियों ने भी हाल के दिनों में चमकदार क्रिकेट का प्रदर्शन किया है। इसलिए 9 जून से 21 जून के बीच होने वाली टीम ए सीरीज में उनके प्रदर्शन पर देशभर की निगाहें लगी रहेंगी। 
इस तरह बेहद मासूम उम्र में वैभव ने जिस तरह का आत्मविश्वास, तकनीक और आक्रामक क्रिकेट का प्रदर्शन किया है, उससे उसने अभी तक पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियों का अपनी ओर ध्यान तो खींचा ही है, ज्यादातर लोगों को उम्मीद है कि भारतीय टीम में आकर वह अपनी चमक और तेजी से बिखेरेंगे और भारतीय क्रिकेट के उज्जवल भविष्य बनेंगे। वैभव सूर्यवंशी का हालांकि अभी सीनियर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में परीक्षण होना बाकी है, लेकिन अभी तक उन्होंने जैसा दमदार प्रदर्शन किया है, उसे देखकर तो लगता है कि शायद हमें सचिन जैसा या कहें कि सचिन से भी ज्यादा आक्रामक और रनों का भूखा बैट्समैन मिल गया है। क्योंकि इतनी कम उम्र में भी वैभव ने जिस तरह से खेल की परिस्थितियाें को पढ़ने और दबाव में टिके रहने का जज्बा दिखाया है, वो इस बात का सबूत है कि वह बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं। आने वाले दिनों में उन्हें ऐसे बड़े मैच बड़ी तादाद में मिलेंगे। बस ज़रूरत ये है कि वैभव अपनी इसी अनुशासन, मेहनत और निरंतरता के साथ आगे बढ़ते रहें। अपने प्रदर्शन को कायम रखें और भारतीय क्रिकेट द्वारा उनसे लगायी गई उम्मीदों को पूरा करें।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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