जीवन भर पानी नहीं पीते जलग्राही मेंढक

जलग्राही मेंढक को अंग्रेजी में वाटर होल्डिंग फ्रॉग कहते हैं। इस मेंढक और टोड की एक प्रमुख विशेषता यह है कि ये अपनी त्वचा द्वारा तेजी से पानी सोख सकते हैं और निकाल भी सकते हैं। यही कारण है कि ये जीवनभर पानी नहीं पीते। मेंढक और टोड की शारीरिक संरचना इस प्रकार की होती है कि इनकी मांसपेशियों और त्वचा के मध्य पानी एकत्रित हो जाता है। इनके ब्लेडर में भी काफी पानी एकत्रित किया जा सकता है तथा इस पानी को पूरे शरीर में पहुंचाया जा सकता है। जब किसी मेंढक या टोड को दबाया जाता है, तो उसके भीतर से एक द्रव पदार्थ निकलता है। यह द्रव पदार्थ मुख्य रूप से पानी होता है। रेगिस्तानी तथा सूखे क्षेत्रों में रहने वाले मेंढक अपने शरीर में अधिक पानी एकत्रित कर सकते हैं अत: इन मेंढकों को जलग्राही मेंढक कहते हैं, किन्तु वास्तविक जलग्राही मेंढक केवल ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह एक विशिष्ट मेंढक है तथा इसके शरीर में पानी ग्रहण करने की क्षमता विश्व के सभी मेंढकों से अधिक होती है। इसी मेंढक को विश्व में जलग्राही मेंढक के नाम से जाना जाता है। ऑस्ट्रेलिया के जलग्राही मेंढक की पानी सोखने की क्षमता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि अफ्रीका का पानी में रहने वाला पंजे वाला मेंढक अपने शरीर में केवल एक प्रतिशत पानी एकत्रित कर सकता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया का जलग्राही मेंढक 50 प्रतिशत तक पानी अपने शरीर में एकत्रित कर सकता है। 
जलग्राही मेंढक ऑस्ट्रेलिया का एक विशिष्ट मेंढक है। यह देखने में सामान्य मेंढक जैसा नहीं दिखाई देता बल्कि यूरोप के सामान्य टोड की तरह दिखाई देता है। इसीलिये ऑस्ट्रेलिया के बाहर जलग्राही मेंढक को टोड कहते हैं। जलग्राही मेंढक की अनेक जातियां हैं। सभी जातियां दक्षिणी आस्ट्रेलिया के उत्तरी भाग, मध्य ऑस्ट्रेलिया, न्यू साउथ वेल्स तथा क्वींस लैंड में बहुतायत से पायी जाती हैं। जलग्राही मेंढक अत्यंत शुष्क स्थानों में रहने वाला मेंढक है। यह शुष्क मौसम में किसी नम स्थान की खोज करता है और फिर मिट्टी में लगभग तीन फुट गहरा गड्ढा बनाता है। इसी गड्ढे में यह पूरा शुष्क मौसम व्यतीत करता है। जलग्राही मेंढक गड्ढे के भीतर अपने शरीर के चारों तरफ एक विशेष प्रकार के कोकून का आवरण तैयार करता है। इसकी त्वचा और आवरण के मध्य पानी एकत्रित होता रहता है। जलग्राही मेंढक के कोकून की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह मेंढक के चारों ओर भरे पानी को वाष्पीकृत नहीं होने देता, जिससे मेंढक शुष्क मौसम में भी नम बना रहता है। जलग्राही मेंढक गड्ढे के भीतर कुछ भी नहीं खाता-पीता और निष्क्रिय पड़ा रहता है। जलग्राही मेंढक के लिये वर्षा नया जीवन लेकर आती है। वर्षा के आरंभ होते ही यह अपना कोकून छोड़कर सतह पर आ जाता है और खूब कीड़े-मकोड़े खाता है। इसी समय इसकी त्वचा बहुत सा पानी ग्रहण करती है। जलग्राही मेंढक की शारीरिक संरचना सामान्य मेंढकों की तरह होती है। यह एक छोटे आकार का मोटे शरीर वाला मेंढक है। इसकी लंबाई लगभग 6 सेंटीमीटर होती है। जलग्राही मेंढक का रंग हरापन लिये हुए ग्रे होता है एवं इसकी पीठ के मध्य में प्राय: एक गहरी रेखा होती है। इसकी त्वचा पर मस्से भी होते हैं। जलग्राही मेंढक का सिर इसके शरीर की तुलना में छोटा होता है। इसके आगे के पैर काफी छोटे और मजबूत होते हैं तथा पीछे के पैर मोटे और झिल्लीदार होते हैं। जलग्राही मेंढक का समागम और प्रजनन सामान्य मेंढकों की तरह होता है। इनका समागम काल वर्षा के साथ ही आरंभ हो जाता है और लगभग एक महीने तक चलता है। जलग्राही मेंढक वर्षा आरंभ होते ही कोकून छोड़कर गड्ढे के भीतर से सतह पर आ जाते हैं। ये पहले खूब कीड़े-मकोड़ों का शिकार करते हैं और फिर तेज वर्षा से बनने वाले अस्थाई जलकुण्डों में पहुंच जाते हैं तथा वहीं समागम करते हैं। मादा मेंढक पानी में ही अंडे देती है। 
जलग्राही मेंढक का समागम एवं प्रजनन सामान्य मेंढकों के समान होता है, किन्तु इसके अंडों और टेडपोल का विकास सामान्य मेंढक से भिन्न होता है। जलग्राही मेंढक के अंडों से टेडपोल बहुत जल्दी निकल आते हैं तथा बड़ी तेजी से बढ़ते हैं। जलग्राही मेंढक का टेडपोल 15 दिन के भीतर टेडपोल से बच्चा बन जाता है, जबकि सामान्य मेंढक के टेडपोल को मेंढक का बच्चा बनने में लगभग ढ़ाई माह का समय लगता है। इसके बच्चों का भी बड़ी तीव्र गति से विकास होता है। ये बहुत अधिक भोजन करते हैं तथा त्वचा द्वारा ढेर सारा पानी अपने शरीर के भीतर भर लेते हैं। 
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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