यह रास्ता ठीक नहीं
कुलभूषण के मम्मी बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ उसे अच्छी बातें सिखाती रहती थी। उसे जब भी समय मिलता तो वह कुलभूषण को बातों-बातों में या फिर महान लोगों के उपदेश सुना कर बताती रहती थी कि बुरी संगति, झूठ बोलना, दूसरे को धोखा देना, पाप और पुण्य और गलत तथा ठीक में फर्क ना समझना मनुष्य को कभी आगे नहीं बढ़ने देते। जैसे-जैसे वह बड़ा होने लगा तब उसकी मामी ने उसकी ओर अधिक ध्यान देना शुरू कर दिया। बड़ा होने के कारण वह अपनी मां की नसीहत भरी बातों से उबने लगा। जब उसका मन तंग होता तो कभी न कभी वह अपने मम्मी को कह देता, मां-अब मैं बच्चा तो नहीं जो कि अपना बुरा भला नहीं समझता। तुम हर समय मुझे उपदेश देती रहती हो।
उसके मम्मी उसे समझाते हुए कहते, बच्चे, मैं तुम्हारी मां हूँ। तुम्हें अच्छी बातें सिखाना और बुरी बातों से दूर रखना मेरा कर्तव्य है, जब तक तुम बड़े होकर कुछ बन नहीं जाते तब तक मैं तुम को समझाती रहूंगी। जब तुम बड़े होकर कुछ बन जाओगे तो तुझे मेरी नसीहत अवश्य याद आएगी। कुलभूषण अपने मम्मी की बातें सुनकर चुप हो जाता। वह दसवीं कक्षा में पढ़ता था। वह पढ़ाई में भी होशियार था। एक दिन उसे विद्यालय से गणित विषय का टेस्ट मिला हुआ था। उसे शाम को अपने मम्मी-पापा के साथ विवाह पर जाना था। उसके मम्मी ने उसे विद्यालय से आते ही कह दिया था कि यदि उसने शाम को उनके साथ विवाह पर जाना है तो वह विद्यालय से मिला काम और टेस्ट याद कर ले।
कुलभूषण ने सभी विषयों का काम कर लिया परन्तु उसने गणित का टेस्ट विवाह से आकर याद करने का मन बना लिया। विवाह से देरी से लौटने के कारण वह गणित का टेस्ट याद नहीं कर सका। उनके गणित अध्यापक बहुत सख्त स्वभाव के थे। वह टेस्ट याद ना करने पर सजा भी देते थे और घर पर फोन भी कर देते थे। वह अपने मुहल्ले के बच्चों के साथ घर से विद्यालय जा रहा था। उन बच्चों ने भी गणित का टेस्ट याद नहीं किया हुआ था स वे एक-दूसरे के साथ योजना बना रहे थे कि वे विद्यालय जाने की बजाए पार्क में क्रिकेट खेलते रहेंगे और छुट्टी के समय घर लौट जायेंगे। कुलभूषण ने भी विद्यालय जाने की बजाए उन बच्चों के साथ पार्क में क्रिकेट खेलते का मन बना लिया।
जैसे ही वह पार्क की ओर जाने लगा तो उसे अपने मम्मी की यह नसीहत याद आ गई कि दूसरे को धोखा देने का अर्थ अपने आप को धोखा देना होता है। उस ने सोचा कि विद्यालय जाने की बजाए पार्क में क्रिकेट खेलना मेरा ही अहित करेगा। वह पार्क में जाने की बजाए विद्यालय चला गया। उसने अपने कक्षा अध्यापक से स्वीकृति लेकर प्रार्थना सभा में जाने की बजाए गणित का टेस्ट याद कर लिया। उसका टेस्ट बहुत अच्छा हुआ। वह अपनी गलती को सुधार कर बहुत खुश था।
उसने देखा जो बच्चे टेस्ट से बचकर पार्क में खेलने चले गए थे, उनके पापा को स्कूल बुला लिया गया था क्योंकि गणित अध्यापक को उनके बारे में कक्षा के अन्य बच्चों ने बता दिया था। कुलभूषण ने घर लौट कर सारी बात अपने मम्मी को बताई। उसके मम्मी ने उसकी पीठ थपथपाते हुए कहा, बेटा तुम भविष्य में भी मेरी नसीहत याद रखना।
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