लोकतंत्र की मज़बूती के लिए

भारतीय चुनाव आयोग ने देश भर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एस.आई.आर.) करवाने की घोषणा 24 जून, 2025 को की थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने दो सहयोगी चुनाव आयुक्तों के साथ एक विशेष प्रैस कान्फ्रैंस करके इसका विवरण दिया था। इसके पहले चरण के रूप में शुरुआत बिहार से की गई थी। दूसरे चरण में 9 राज्यों और तीन केन्द्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन संशोधन किया जाना था और इसके बाद अब पंजाब के साथ-साथ 15 और अन्य राज्यों और तीन केन्द्र शासित प्रदेशों में यह काम शुरू कर दिया गया है। बिहार और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के संशोधन के दौरान बहुत से विवाद उठे थे। शुरू की गई इस प्रक्रिया के शीघ्र बाद इन दोनों राज्यों में प्रादेशिक चुनाव हुए थे, जिस कारण इस प्रक्रिया में ऊहापोह की स्थिति बनने का अधिक खतरा पैदा हो गया था।
चुनाव नज़दीक थे, यह काम बेहद जटिल और विस्तारपूर्ण था, जिससे बड़ी दुविधा पैदा हो गई थी। तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने भाजपा पर यह आरोप लगाया था कि चुनाव निकट होने के कारण ऐसे संशोधन अनेक तरह से संदेह खड़े करने वाले हैं। विपक्षी नेताओं ने यह आरोप भी लगाया था कि बड़ी संख्या में एक विशेष योजना के तहत मत काटे जा रहे हैं, जो चुनाव को प्रभावित करेंगे। यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष भी गया था, जहां लम्बे विचार-विमर्श के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के पक्ष में फैसला देते हुए इस संवैधानिक प्रक्रिया को जारी रखने के आदेश दिए थे परन्तु इस प्रक्रिया के दौरान समय की कमी के कारण या अन्य कारणों के दृष्टिगत लाखों ही वोट कट गए और लाखों ही लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं किए गए। दोनों प्रदेशों के ये चुनाव इस मामले पर विवादास्पद बने रहे थे। ऐसी आशंकाएं और विवाद अभी तक जारी हैं। पहली बार वर्ष 1952 में मतदाता सूची के संशोधन करवा कर यह विवरण जारी किया गया था। उस समय मात्र लगभग 17.3 करोड़ मतदाता थे, जिनकी संख्या अब बढ़ कर 100 करोड़ हो चुकी है। अब मतदाता सूचियों के गहन संशोधन का काम 23 वर्ष के बाद किया जा रहा है। नि:संदेह यह बेहद जटिल काम है, जिसके लिए विशेष योजनाबंदी और व्यापक स्तर पर समर्पित टीमों की ज़रूरत होती है।
पंजाब में तो यह स्थिति इसलिए और भी बेहद कठिन बनी हुई है, क्योंकि पिछले दशकों में लाखों ही लोग देश के अन्य भागों में या विदेशों में पलायन कर गए हैं और इस समय में अलग-अलग प्रदेशों में से लाखों ही लोग पंजाब आकर बसे हैं। इस अवधि के दौरान बड़ी संख्या में मर चुके लोगों को भी इन मतदाता सूचियों से हटाना ज़रूरी होगा। यह भी सुनिश्चित करना पड़ेगा कि किसी व्यक्ति के एक से अधिक वोट न बने हों। पहले उठे विवादों के कारण इस बार चुनाव आयोग अधिक सतर्क होकर यह योजनाबंदी कर रहा है। पंजाब में मुख्य चुनाव आयुक्त अनंदिता मित्रा ने इस संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए यह कहा है कि देश में लोकतांत्रिक नैतिक-मूल्यों की मज़बूती के लिए मतदाता सूची की स्टीकता बेहद ज़रूरी है। उन्होंने तीसरा चरण, जो 25 जून से शुरू हो रहा है, संबंधी विवरण देते हुए बताया कि विशेष संशोधन के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं से फार्म भरवाए जाएंगे। प्रदेश के 117 विधानसभा क्षेत्रों में यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए संबंधित कर्मचारियों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक तरह के कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब में 85 प्रतिशत से भी अधिक मैपिंग (2003 की मतदाता सूची के साथ मिलान) हो चुका है और बूथ स्तर के अधिकारियों को प्रत्येक तरह का प्रशिक्षण दिया गया है। इस संबंध में ऑनलाइन सुविधा भी दी गई है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पंजाब की सभी राजनीतिक पार्टियों को इस प्रक्रिया संबंधी अवगत कराया गया है और उन्हें भी इसे पारदर्शी ढंग से सफल बनाने में सहयोग करने का निवेदन किया गया है। पहला चरण 26 जून को शुरू होगा, जो 14 जुलाई तक चलेगा। एक अक्तूबर तक मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। प्रदेश के 2.14 करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए बूथ स्तर के कर्मचारी गणना फार्म भरवा कर मतदाताओं की पहचान करेंगे और 3 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूचियां प्रकाशित की जाएंगी, जोकि पोलिंग बूथ, चुनाव रजिस्ट्रेशन कार्यालयों, ऑनलाइन पोर्टल पर भी उपलब्ध होंगी। 3 अगस्त से 2 सितम्बर तक दावा और एतराज़ दायर करके नए नाम शामिल किए जाएंगे और एक अक्तूबर, 2026 तक पंजाब की अंतिम संशोधित हुईं मतदाता सूचियां प्रकाशित कर दी जाएंगी।
बूथ स्तर तक सम्पर्क करने के लिए सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ राजनीतिक पार्टियों को भी यह अपील की गई है कि वे इन कर्मचारियों के साथ अपने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को भी लगाएं ताकि वे प्रत्येक पक्ष से पूरी देख-रेख कर सकें। चुनाव आयोग की इन  पुख्ता तैयारियों के बाद हम राजनीतिक पार्टियों को भी इस काम में सक्रियता से भाग लेने की अपील करते हैं। मतदाताओं को भी इसके प्रति जागरूक होने की ज़रूरत होगी, ताकि इस प्रक्रिया को निर्विघ्न और पारदर्शी ढंग से सफल बनाया जा सके। हम उम्मीद करते हैं कि सभी पक्षों द्वारा दिखाई जाने वाली दिलचस्पी और किए जाने वाले सहयोग से सन्तोषजनक ढंग से इस प्रक्रिया को पूरा किया जा सकेगा, जो स्वयं में लोकतंत्र की मज़बूती के लिए एक बड़ा कदम होगा।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द 

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