भयग्रस्त होने पर हमारे बाल क्यों खड़े हो जाते हैं ?
हम जब भयग्रस्त होते हैं तब हमारे शरीर में कुछ विशेष परिवर्तन होते हैं। इन्हीं परिवर्तनों में से एक परिवर्तन ‘बाल खड़े’ होना भी है। हमारे सिर या शरीर के अन्य भागों के बाल एकदम सीधे नहीं होते हैं बल्कि वे खाल से एक न्यून कोण पर किले होते हैं।
हमारे शरीर के बाल क्यों किसी विशेष परिस्थिति में ही खड़े होते हैं। सामान्य अवस्था में इन पर कोई प्रभाव क्यों नहीं पड़ता हैं? बालों के खड़े होने का मुख्य कारण अरेखित तन्तुओं की बनी एक पेशी रोम-हर्षणी (एरेक्टर पिली) है जो डर्मिस के ऊपरी भाग से रोम-पुटक (हेयर फोलिकल) के आधार भाग तक उस ओर फैली होती है जिधर को बाल ढालू होता है। यह पेशी बाल के आधार को खींचती है जिससे बाल खड़े हो जाते हैं। सामान्यत: यह क्रिया भय को सामने पाकर प्रत्येक प्राणी में होती है।
बालों की रचना भी एक विशेष प्रकार की होती है जिसके कारण रोम हर्षणी (एरेक्टर पिली) का सीधा प्रभाव बाल के आधार पर पड़ता है और बाल सीधे खड़े हो जाते हैं। हमारे बाल रूपांतरित शल्क नहीं होते बल्कि केवल एपिडर्मिस की नयी बहिवृद्धियां होते हैं।
बाल का एक ऊपरी बाहर को निकला हुआ शैट केवल मृत केरेटिनित कोशिकाओं का बना होता है। रोम पुटक के आधार पर जड़ फूलकर एक बल्ब बना लेती है और बाल की वृद्धि केवल जड़ से होती है जहां मेल्पीजी परत की कोशिकाएं सक्रिय रूप में विभाजित होती रहती हैं। बल्ब के नीचे एक डर्मिसी पैपिला होता है जिसमें योजी ऊतक (कनेक्टिव टिश्यू) और रक्त वाहिकाएं होती हैं। यह बाल को पोषण प्रदान करता है। बल्ब के आगे कोशिकाएं धीरे-धीरे मरती जाती हैं जिसके फलस्वरूप शैल मृत श्रृंगीय कोशिकाओं का बना होता है।
बाल के शैल पर बाहर एक क्यूटिकल बना होता है जो पारदर्शी कोरछादी कोशिकाओं द्वारा निर्मित होता है। इन कोशिकाओं के केंद्रक समाप्त को गये होते हैं। क्यूटिकल में एक कार्टेक्स और एक केंद्रीय अंत भाग अथवा मेड़ला होता है। कार्टेक्स में उसकी श्रृंगित कोशिकाओं में वर्णक और कुछ वायु अवकाश होते हैं।
रोम पुटक की भीतरी जड़ के चारों ओर रोम आच्छद कोशिकाओं की दो परतें बनी होती हैं। इनमें बाहरी मूल आच्छद एवं भीतरी मूल आच्छद होते हैं। एक सिवेशस ग्रंथि पुटक में खुलती है ताकि बाल में तेल दिया जाता रह सके। इन्हीं भागों में यह पेशी रोम-हर्षणी (एरेक्टर पिली) भी रोम पुटक के अधर पर फैली होती है।
अरेखित तंतुओं की बनी इसी पेशी के कारण मानव शरीर के बाल भयग्रस्त होने पर सीधे खड़े हो जाते हैं। (उर्वशी)



