हमें प्यास क्यों लगती है ?
बच्चो, प्यास हमारे शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने में अहम योगदान डालती है। परन्तु हमें प्यास लगती क्यों है? आओ इस बारे में गहराई से जानते हैं। बच्चो, हमारे शरीर का लगभग 60 प्रतिशत भाग पानी का बना हुआ है। पानी शरीर में पौष्टिक तत्वों की ढुलाई, तापमान को नियंत्रण करना, फोक्ट पदार्थों का निकास करना, जोड़ों की लूबरिकेशन आदि जैसी महत्वपूर्ण क्रियाओं का निभाता है। हमें प्यास मुख्य तौर पर तब लगती है जब हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिसको डिहाईड्रेशन कहा जाता है। हम जानते हैं कि हमारे खून में पानी और नमक हमेशा मौजूद रहते हैं।
आम स्थिति में इन दोनों का खून में अनुपात बराबर होता है। यदि किसी कारण खून में पानी की मात्रा कम हो जाए या इन दोनों का अनुपात बदल जाए तो इस स्थिति में हमारे दिमाग में प्यास का केन्द्र (थरस्ट सैंटर) गले को संकेत भेजता है। इसके निष्कर्ष के तौर पर गला सिकुड़ना शुरू हो जाता है। इस सिकुड़न के कारण गला सूख जाता है और प्यास लग जाती है। यहां यह भी वर्णनीय है कि जब हमारे शरीर में पानी की कमी होती है तो खून में सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है और खून का आयतन कम हो जाता है। यह बदलाव दिमाग के एक हिस्से जिसको हाईपोथैलमस कहा जाता है, द्वारा महसूस किया जाता है। हाईपोथैलमस में विशेष सैल होते हैं जिसको आसमू रिसैप्टर कहा जाता है। ये सैल हमारे खून में नमक और पानी के संतुलन की निगरानी करते हैं जब भी खून में नमक की मात्रा बढ़ जाती है या पानी की मात्रा कम हो जाती है तो यह सैल सक्रिय हो जाते हैं और प्यास की भावना को उत्तेजित करते हैं और हमें पानी पीने के लिए संकेत भेजते हैं। इसके साथ ही हाईपोथैलमस ग्रंथी में से एंटीडायुरैटिक हारमोन भी निकलता है जो गुर्दों को पानी को सुरक्षित रखने का संकेत देता है ताकि पेशाब कम बने और शरीर में पानी का निकास कम हो। अंत में हम यह कह सकते हैं कि प्यास हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण संकेत है जो हमें हाईड्रेटिड रहने और स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए जब भी प्यास महसूस हो पानी ज़रूर पीएं।
-सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्मार्ट स्कूल गग्गोबूआ ज़िला तरनतारन।



