कॅरियर में सक्सेस का सीक्रेट अच्छे लिसनर बनें

हाल में भारतीय क्रिकेट के सफल कप्तानों में गिने जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा है, ‘मैं बहुत अच्छा लिसनर हूं। भले मैं कई विषयों पर बोल सकने में सक्षम न होऊं, लेकिन मैं सभी विषयों में सुनने को लेकर सहज हूं।’ महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी बात बताते हुए यह सुझाव भी दिया है कि जिस विषय में आपकी जानकारी कम हो, उसमें और ज़रूरी है कि आप बेहतर श्रोता बन जाएं। सुनने में यह बात मामूली या आम लग सकती है, लेकिन ऐसा है नहीं। यह बात इतनी खास है कि अगर इसे सफलता का ‘गुप्त मंत्र’ कहें तो भी यह अतिश्योक्ति नहीं होगी। अगर धोनी न भी कहें तो उनके साथ के लोग कहते हैं कि धोनी बहुत कम बोलते थे, लेकिन वह किसी भी बात को बहुत ध्यान से सुनते हैं। दरअसल आज के दौर में ऐसे लोगों को तलाशना मशक्कत भरा काम है, जो ज्यादा बोलने की जगह ज्यादा समय चुपचाप रहते हैं। क्योंकि आज के दौर में हर कोई बोलना चाहता है, हर कोई अपनी राय देना चाहता है। क्योंकि हर कोई हर समय, खुद को साबित करने की फिराक में रहता है लेकिन दुनिया के सफल लोगों की एक खास आदत होती है, वे बोलने से ज्यादा सुनने में रुचि रखते हैं। यही आदत उन्हें न सिर्फ गम्भीर और सम्मान पाने वाला बनाती है बल्कि अपनी इसी आदत के कारण ऐसे लोग बेहतर निर्णय लेने वाले, बेहतर टीम प्लेयर और बेहतर टीम लीडर होते हैं। 
सुनना इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
यह सहज सवाल है कि आखिर सुनना हमारे जीवन में इतना महत्वपूर्ण रोल क्यों अदा करता है? दरअसल सुनना एक कौशल है। इसमें आप सिर्फ सामने वाले की बात या उसकी बातों के भाव अथवा बतायी जा रही समस्या भर को नहीं सुनते, इस सबके दौरान आप उसके निजी अनुभव को भी सुनते हैं और इससे बहुत कुछ सीखने की कोशिश भी करते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं जब हम किसी बात को ध्यान से सुनते हैं, तो उसके तीन फायदे होते हैं। पहला यह कि हमें नई जानकारी मिलती है, दूसरा यह कि गलतियां कम होती हैं और तीसरा यह कि हम जिसकी बात को ध्यान से सुनते हैं, उससे बहुत अच्छे रिश्ते बन जाते हैं। कॅरियर में ये तीनों ही बातें महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। 
सुनने वाले तेजी से सीखते हैं
जो लोग किसी को महत्व देते हुए उसे ध्यान से सुनते हैं, वे बहुत तेजी से सीखते हैं। याद रखिए, कोई भी व्यक्ति हर चीज नहीं जानता। नौकरी के शुरुआती दिनों में तो लगभग हर कर्मचारी को संस्थान में पहले से मौजूद कर्मचारी से छोटी-छोटी चीजें सीखनी पड़ती हैं। ऐसे में यदि कोई नया कर्मचारी सुनता कम, बोलता ज्यादा है तो वह अपने साथी कर्मचारियों से सीखने के अवसर खो देता है। माही की बात इस मायने में बिल्कुल सही है कि जिस विषय में हमारी जानकारी कम हो, उस पर जबर्दस्ती कोई राय देने से बेहतर है, ध्यान लगाकर विशेषज्ञों को सुना जाए और समझा जाए कि आखिर वह विषय या बात क्या है? दरअसल ऐसा रवैय्या किसी भी व्यक्ति को न सिर्फ नई चीजें सीखने को प्रेरित करता है बल्कि उसके सीखने की गति भी बढ़ाता है। किसी नये कर्मचारी और अनुभवी कर्मचारी के बीच सबसे बड़ा फर्क ज्ञान का नहीं बल्कि सीखने की इच्छा का होता है। 
अच्छे लिसनर गलतियां कम क्यों करते हैं?
दफ्तर में ज्यादातर समय गलतफहमियां, कम जानकारी से नहीं बल्कि संचार की कमी से पैदा होती हैं। बॉस ने कुछ दिशा निर्देश दिया, कर्मचारी ने कुछ और समझा या उसे ध्यान से नहीं सुना, नतीजा यह कि बेध्यानी में सुने गये निर्देश के जवाब में किया गया काम गैर-ज़रूरी तो होगा ही, इसके कारण जो लोग बॉस की बात को ध्यान से नहीं सुनते, उन्हें या तो पहले से किये गये काम की जगह नया काम करना होता है या सही काम न कर पाने के लिए बातें सुननी पड़ती हैं। जो लोग ऑफिस में बॉस की या किसी की भी बात को बहुत ध्यान से सुनते हैं, वे न सिर्फ ऑफिस के दिशा निर्देशों को बेहतर समझते हैं बल्कि किस व्यक्ति से, किस समय, किस तरह का व्यवहार करना चाहिए, इस बात को भी अच्छी तरह से समझते हैं। कुछ लोगों की आदत होती है कि जब कोई ज़रूरी बात हो रही हो, तो वह बात खत्म होने के पहले ही उससे संबंधित सवाल पूछने से बाज नहीं आते। ऐसे में ज्यादातर समय वह पूरी बात को अच्छी तरह से सुन नहीं पाते और सही से समझ नहीं पाते। कई बार ऐसे लोग अपने साथ-साथ दूसरों के लिए भी संकट बनते हैं, जब उनकी वजह से दूसरे भी ज़रूरी बात को सही तरह से नहीं सुन पाते। कई बार ऐसे लोग उसी बात के लिए फिर बार-बार सवाल पूछते हैं और ज़रूरत पड़ने पर स्पष्टीकरण मांगते हैं। ऐसे में ज्यादातर समय किसी बात को दोबारा बताने वाला व्यक्ति चिढ़ जाता है या चिड़चिड़ा हो जाता है और आपके प्रति वह अच्छे भाव नहीं रखता। इससे गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं। लोगों को लगता है फला व्यक्ति मेरे से ईर्ष्या करता है या मुझे चैन से नहीं रहने देता। जबकि बात ये होती है कि वही व्यक्ति सही समय पर अपनी सही प्रतिबद्धता नहीं दर्शायी होती। 
सुनना टीम लीडर की पहली शर्त
जो लोग किसी बात को ध्यान से सुनते हैं, तो उन्हें वह बात जल्दी और बेहतर तरीके से समझ में आती है। इसलिए यह गुण ऐसे लोगों में खास करके बहुत ज़रूरी होता है, जिन्हें दूसरे लोगों से काम कराना होता है या दूसरे शब्दों में जो लोग टीम लीडर होते हैं। क्योंकि जो व्यक्ति किसी बात को बेहतर तरीके से खुद समझता है, वही अच्छी तरह से किसी दूसरे को समझा पाता है। याद रखिए कि इस समस्या का समाधान तभी सही तरीके से हासिल होता है, जब हम उस समस्या को गंभीरता से और ध्यानपूर्वक सुनते हैं। कई लोगों की आदत होती है कि वह किसी समस्या को पूरी तरह से सुने बिना ही समाधान देने लगते हैं। ऐसी स्थिति में वह तो उलझकर रह ही जाते हैं, ऐसे लोग दूसरों को भी कंफ्यूज करते हैं। इसलिए टीम लीडर होने की पहली शर्त है कि न सिर्फ आप किसी बात को बहुत ध्यानपूर्व सुनें बल्कि उतने ही गंभीरता और फोकस के साथ किसी दूसरे को बताएं। जो व्यक्ति पहली बात को ध्यानपूर्वक और मनोयोग से सुनता है, वह बहुत आसानी से समस्या की जड़ तक पहुंच जाता है। इसलिए उसकी सलाह और निर्णय प्रभावी होते हैं। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

#कॅरियर में सक्सेस का सीक्रेट अच्छे लिसनर बनें