फिल्म ‘परवाना’ से करियर की शुरुआत करने वाली योगिता बाली
निर्माता निर्देशक कमाल अमरोही से अनबन होने के कारण मीना कुमारी ने फिल्म ‘पाकीज़ा’ बीच में ही छोड़ दी थी, लेकिन कमाल अमरोही इस सब्जेक्ट पर हर हाल में फिल्म बनाना चाहते थे। उन्होंने किसी अन्य अभिनेत्री को लेकर फिल्म बनाना तय किया। इस बीच उनकी मुलाकात योगिता बाली से हुई, जो उस समय थीं तो मात्र 13 वर्ष की, लेकिन अपने जिस्म के उठान के कारण किशोरी की जगह जवान लड़की दिखायी देती थीं। कमाल ने उन्हें ‘पाकीज़ा’ में लीड भूमिका ऑफर की। यह 1966 की बात है। कमाल योगिता बाली को 3 वर्ष के कॉन्ट्रैक्ट में रखना चाहते थे और इस दौरान उन्हें उर्दू बोलने व नृत्य सीखने आदि में मदद भी करना चाहते थे। योगिता बाली ने इस ऑफर को स्वीकार कर लिया। लेकिन इस बीच कमाल व मीना कुमारी का मनमुटाव दूर हो गया, वह वापस फिल्म में आ गईं और योगिता बाली ‘पाकीज़ा’ बनते बनते रह गईं।
आप सोच रहे होंगे कि कमाल अमरोही की मुलाकात योगिता बाली से कैसे संभव हो पायी? दरअसल, योगिता बाली का फिल्मोद्योग से बहुत गहरा रिश्ता है। वह अपने ज़माने की टॉप हीरोइन गीता बाली की भांजी हैं। चूंकि गीता बाली ने शम्मी कपूर से शादी की थी, इसलिए उनके बेटे एक्टर आदित्य राज कपूर योगिता बाली के कज़न हैं। गीता बाली की बहन हरिदर्शन कौर ने सैय्यद इरशाद हुसैन से शादी की थी, जो जसवंत के स्क्रीन नाम से फिल्मों में चरित्र अभिनेता थे। कौर और जसवंत ही योगिता बाली के माता पिता थे। जसवंत डायलॉग व पटकथा लेखक अबरार अल्वी के भाई थे और इस लिहाज़ से योगिता बाली अबरार अल्वी की भतीजी हैं। जसवंत का जब करियर फेल हो गया तो वह अपनी पत्नी व बच्चों को छोड़कर पाकिस्तान चले गये। योगिता बाली का एक छोटा भाई योगेश बाली भी था, जो कुछ फिल्मों में दिखायी भी दिया, लेकिन लम्बी बीमारी के बाद 1988 में मात्र 34 वर्ष की आयु में उसका निधन हो गया। योगेश ने गायिका हेमलता से शादी की थी, जोकि अभिनेत्रियों सुलक्षणा पंडित व विजेता पंडित की कजिन हैं।
इसमें कोई दो राय नहीं कि योगिता बाली अच्छी अदाकारा थीं, लेकिन वह अपनी प्रतिभा के अनुरूप बॉलीवुड में सफलता अर्जित न कर सकीं। यह अकारण न था। उन्हें अच्छे बैनरों व स्थापित कलाकारों के साथ बड़ी फिल्में मिलीं, लेकिन उनमें से अधिकतर अधूरी बनकर डिब्बे में बंद हो गईं यानी कभी रिलीज़ नहीं हुईं, जैसे कबीर बेदी के साथ ‘शेरा’ (1976) व ‘हाईवे स्मगलर्स- डीएलजी 9211’, जितेंद्र व विनोद खन्ना के साथ ‘पिंकू और रिंकू’ (1977), जॉनी वॉकर के साथ ‘चंडाल चौकी’ (1977) आदि। इन डिब्बा बंद फिल्मों की एक लम्बी सूची है।
बहरहाल, 13 अगस्त 1952 को मुंबई में जन्मी योगिता बाली ने अपना फिल्मी सफर 1971 में फिल्म ‘परवाना’ से आरंभ किया था और सहायक भूमिकाओं में उन्हें काफी पसंद किया गया, जिससे उनकी प्रतिभा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। उन्होंने 70 से अधिक फिल्मों में काम किया। बतौर अदाकारा उनकी अंतिम फिल्म ‘आखिरी बदला’ थी, जो 1989 में आयी थी। फिर लम्बे अंतराल के बाद उन्होंने 2013 में बतौर निर्माता फिल्म ‘एनिमी’ बनायी। वैसे योगिता बाली इस वजह से भी बॉलीवुड में कोई खास जगह न बना सकीं; क्योंकि उनकी समकालीनों में वहीदा रहमान, राखी, मुमताज़, शर्मीला टैगोर, हेमा मालनी, रेखा, जया बच्चन, जीनत अमान जैसी अदाकाराएं थीं। ‘दिलदार’, ‘बीवी ओ बीवी’, ‘परवाना’ आदि योगिता बाली की चर्चित फिल्में हैं।
योगिता बाली की दो शादियों ने भी उनके फिल्मी करियर को प्रभावित किया, जिनमें से पहली असफल और दूसरी भी असफल रही। एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में जब योगिता बाली की गायक किशोर कुमार से मुलाकात हुई तो वह उनसे बहुत अधिक प्रभावित हुईं। दोनों ने 1976 में शादी कर ली। लेकिन यह शादी सिर्फ दो साल तक ही चल सकी। बाद में किशोर कुमार ने इस शादी को ‘जोक’ कहा और इसके टूटने का कारण योगिता बाली में गंभीरता का अभाव, उनका अपनी मां के साथ अत्यधिक लगाव और एक्टर मिथुन चक्रवर्ती से उनका रोमांटिक संबंध बताया। 1978 में तलाक होने के बाद योगिता बाली ने 1979 में मिथुन चक्रवर्ती से शादी कर ली और इस विवाह से उनके चार बच्चे हैं, तीन लड़के और एक गोद ली हुई लड़की। किशोर कुमार इस शादी से इतने नाराज़ थे कि कुछ समय के लिए उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती के लिए गाना छोड़ दिया था।
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