लॉरेंस बिश्नोई पर क्यों लगाया अमरीका ने निज्जर की हत्या का आरोप ?

अमरीका के न्याय विभाग ने 8 जुलाई, 2026 को पंजाब से जुड़े तीन अंतर्देशीय संगठित अपराध सिंडिकेटों के खिलाफ आरोप-पत्र की घोषणा की जो भारत, कनाडा, अमरीका व यूरोप में सक्रिय हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि पंजाब में जन्मा 33 वर्षीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ ने खालिस्तान-समर्थक एक्टिविस्ट हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करायी थी, साल 2023 में सर्रे, ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा में। बिश्नोई इस समय अहमदाबाद गुजरात की उच्च-सुरक्षा जेल में बंद है, बराड़ अमरीका में वांछित भगौड़ा है, जबकि निज्जर को भारत सरकार ने आतंकवादी घोषित किया हुआ था। इस जांच के दौरान जहां अनेक गिरफ्तारियां हुई हैं, वहीं बड़ी मात्रा में ड्रग्स भी बरामद हुईं, फिरौती, जबरन वसूली, भाड़े पर हत्याएं और ड्रग तस्करी के मामले भी दर्ज हुए हैं। अमरीकी विभाग का कहना है अभी तक 37 लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल हुए हैं। उसके अनुसार, भारत-आधारित तीनों सिंडिकेट के 24 आरोपियों को अमरीका, कनाडा व स्पेन में गिरफ्तार किया जा चुका है। अब 10 भगौड़ों की तलाश है- 7 अमरीका में, 2 भारत में व एक यूरोप में। 
अमरीका में दायर केस के केन्द्र में लॉरेंस बिश्नोई संगठित अपराध गुट (ओसीजी) है। वकीलों के अनुसार यह अंतर्देशीय अपराध गिरोह है, जिसका मुख्यालय भारत में है, लेकिन वह कनाडा, अमरीका, इंग्लैंड, यूरोप व ऑस्ट्रेलिया में अधिक सक्रिय है। आरोप-पत्र के मुताबिक इस गिरोह का संस्थापक व संचालक बिश्नोई है, जो जेल में रहते हुए भी गिरोह को चला रहा है। बराड़ उत्तरी अमरीका में गिरोह का प्रबंधन करता था, जबकि रोहित गोदारा यूरोप में गतिविधियों को देखता था। दूसरा सिंडिकेट का सरगना 38 वर्षीय जगतार सिंह उर्फ जग्गू भगवानपुरिया है, जो असम की सिलचर जेल में बंद है। अमरीका के अनुसार यह अलग अंतर्देशीय अपराध गिरोह है जो मुख्यत: भारत, कनाडा, अमरीका व अन्य देशों में सक्रिय है। वकीलों के मुताबिक इस नेटवर्क के दुनियाभर में 1,000 से अधिक सदस्य व सहयोगी हैं। यह बिश्नोई गिरोह के प्रतिद्वंदी के रूप में उभरा और फिर इसने अपना ही अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर लिया। भगवानपुरिया बिश्नोई का पूर्व साथी है। तीसरे मुख्य सिंडिकेट का संबंध 57 वर्षीय रविन्द्र सिंह ढांडा से है, जो कनाडा-स्थित है और विशाल क्रॉस-बॉर्डर नारकोटिक्स ऑप्रेशन चलाता है। इस गिरोह का मुख्य फोकस बड़े पैमाने पर ड्रग्स एक देश से दूसरे देश में पहुंचाना है, विशेषकर अमरीका व कनाडा में। 
रिकार्ड्स से मालूम होता है कि बिश्नोई गैंग के खिलाफ आरोप-पत्र फरवरी 2026 में अमरीका के केलिफोर्निया अदालत में दाखिल किया गया था। अमरीका के न्याय विभाग का कहना है कि बिश्नोई ने सोशल मीडिया पोस्ट्स व न्यूज़ आर्गेनाइजेशंस में इंटरव्यू के माध्यम से अपने आपको ‘देशभक्त’, ‘राष्ट्रवादी’ व ‘अत्यधिक धार्मिक व्यक्ति’ के रूप में प्रस्तुत किया और फिर इस सार्वजनिक छवि का प्रयोग अपनी अपराध सिंडिकेट के लिए भारत, अमरीका व अन्य जगहों पर सदस्य व सहयोगी रिक्रूट करने के लिए किया। अमरीका के न्याय विभाग ने बिश्नोई नेटवर्क पर टारगेट हत्याओं, शूटिंग, अपहरण, हमले करना और धमकियां देने के आरोप लगाये हैं, जिससे व्यापारियों, सेलिब्रिटीज व भारतीय आप्रवासियों में भय का वातावरण व्याप्त हुआ। बिश्नोई नेटवर्क पर यह भी आरोप है कि उसने पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की, गायक गिप्पी ग्रेवाल को धमकी दी और 2023 व 2026 के बीच एक्टर सलमान खान पर हमले की योजनाएं बनायीं। यह सब हरकतें उस समय हुई हैं, जब बिश्नोई अहमदाबाद के उच्च-सुरक्षा जेल में बंद है, जिससे मालूम होता है कि वह जेल में रहते हुए भी अपने गैंग को चला रहा है। इन सब हरकतों का उद्देश्य, जांचकर्ताओं के अनुसार, फिरौती की रकम वसूल करना और गैंग के दबदबे में वृद्धि करना है। आरोप-पत्र में यह भी कहा गया है कि बिश्नोई नेटवर्क उत्तरी अमरीका में कोकीन व मेथाम्पेथामाइन ट्रांसपोर्ट करने में भी शामिल था और उसने प्रतिद्वंदी तस्करी गुटों के नारकोटिक्स शिपमेंट्स की भी चोरी की। आरोप-पत्र में यह भी कहा गया है कि जो लोग बिश्नोई गैंग के लिए रिक्रूटमेंट करते हैं वह ‘भारत में गरीब नाबालिगों को गैंग ज्वाइन करने के लुभावने ऑफर देते हैं, जिनमें अन्य चीज़ों के अतिरिक्त पैसा, बदनामी व सुरक्षा’ भी शामिल हैं। भारत में बिश्नोई गैंग में जो नये सदस्य शामिल होते हैं, उन्हें नेटवर्क के लिए अपराध करने पर बहुत मामूली पैसे ही दिये जाते हैं। बिश्नोई गैंग अपने वफादार सदस्यों को अमरीका व कनाडा सहित अन्य देशों में छात्र व वर्क वीज़ा पर भेजता है, जो गलत सूचनाएं देकर हासिल किये जाते हैं, ताकि उन देशों में सिंडिकेट के आपराधिक ऑप्रेशनों में मदद की जा सके। 
दूसरी ओर वकील रजनी खत्री का कहना है कि बिश्नोई साबरमती जेल में 2023 से एकांत कारावास में है और उस पर 24/7 सीसीटीवी निगरानी रहती है। गृह मंत्रालय ने उस पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 303 लगायी हुई है, जिसका अर्थ है कि वह जेल से बाहर नहीं जा सकता। वह अदालती सुनवायी में भी वीडियो कांफ्रैंस के ज़रिये हिस्सा लेता है और अगर राज्य से बाहर की पुलिस को उससे पूछताछ करनी होती है, तो उसे जेल में ही आना होता है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 2022 में बिश्नोई व अन्यों के खिलाफ जो आरोप-पत्र दाखिल किया था, उसके अनुसार, दिल्ली, चंडीगढ़, राजस्थान व पंजाब में उसके खिलाफ 84 केस दर्ज हैं, जिनमें से पहला केस 2010 में दर्ज हुआ था। रजनी खत्री का कहना है कि बिश्नोई 40 अन्य केसों में बरी हो चुका है। एनआईए का आरोप-पत्र अमरीका के न्याय विभाग के आरोप-पत्र जैसा ही प्रतीत होता है कि बिश्नोई अपना नेटवर्क जेल से ही चला रहा है।
बहरहाल, अमरीकी न्याय विभाग ने बिश्नोई नेटवर्क पर निज्जर की हत्या का जो आरोप लगाया है, उससे यह गैंग भारत व कनाडा के बीच जो सबसे संवेदनशील राजनयिक विवाद है, उसके केंद्र में आ जाता है। कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार ने तो निज्जर की हत्या में ‘भारत सरकार के एजेंट्स’ के शामिल होने के आरोप लगाये थे और जांच में भारतीय डिप्लोमेट्स को ‘पर्सन्स ऑ़फ इंटरेस्ट’ कहा था। इस बीच रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस भी दक्षिण एशियाई संगठित अपराध की समानांतर जांच कर रही है।

-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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