अनेक चरणों से निकला हमारा राष्ट्रीय ध्वज
बच्चो, हमारे देश के ध्वज की बहुत दिलचस्प कहानी है। यह ध्वज आम तौर पर राष्ट्रीय दिवस पर लहराया जाता है। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री झंडे की रस्म अदा करते हैं और 26 जनवरी को देश के राष्ट्रपति ध्वज लहराते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि प्रधानमंत्री देश के राजनीतिक प्रमुख होते हैं, जबकि राष्ट्रपति देश के संविधानिक प्रमुख है।
भारत में सबसे पहले कलकता (अब कोलकाता) के एक समारोह में सुरिन्दर नाथ बैनर्जी ने 7 अगस्त, 1906 ई. को एक राष्ट्रीय ध्वज के प्राथमिक वजूद के तौर पर झंडा लहराया, जिसमें तीन पट्टी गहरी हरी, गहरी पीली और गहरी लाल रंग की थीं। हरी पट्टी पर आठ सफेद कमल के फुलों के निशान थे। लाल पट्टी पर सूर्य और चांद के निशान थे और पीली पट्टी पर ‘वंदे मातरम्’ लिखा हुआ था। इसके बाद हमारी जंग-ए-आज़ादी की लड़ाई में भाग लेने वाली मैडम भीमा जी कामा ने 18 अगस्त, 1907 में जर्मनी के एक समारोह में भारतीय झंडे को लहराया था। इस ध्वज में लाल, पीले और हरे रंग की तिरछी धारियों को दर्शाया गया था। ऊपर की लाल पट्टी में सात तारे और एक कमल का फुल बना हुआ था। मध्य की पीली पट्टी पर नीले रंग के साथ ‘वंदे मातरम्’ लिखा हुआ था और नीचे हरी पट्टी में तारा और चांद बनाया गया था।
सन् 1920 में विश्व युद्ध के बाद जब अंग्रेज भारत को स्वतंत्र करने से मुकर गये थे तो भारत की राजनीति में भारी परिवर्तन हुआ। इस बात को मुख्य रखते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने नये ध्वज की रचना की। इसमें तीन रंग की पट्टियां शामिल की गई थीं। सबसे ऊपर सफेद, मध्य में हरी और नीचे नीले रंग की पट्टी जोड़ी गई। इस ध्वज में चरखे का निशान भी बना हुआ था। कुछ समय बाद इस ध्वज के बारे में विवाद खड़े हो गये। इस विवादों के हल के लिए 1931 में इसमें सुधार करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी में सात सदस्य शामिल किए गए। इस कमेटी ने भी तीन रंगों वाले झंडे की सिफारिश की। ये तीन रंग थे केसरी, सफेद और हरा। ध्वज की सबसे ऊपर की पट्टी केसरी, मध्य में सफेद और नीचे हरे रंग की थी। इसके मध्य की पट्टी पर चरखा बना हुआ था।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद एक बार फिर इस ध्वज में थोड़ा सा परिवर्तन किया गया। इसकी मध्य की पट्टी पर बने चरखे के निशान के स्थान पर सारनाथ की मशहूर शेरों वाली लाठ के मध्य अशोक चक्र को शामिल किया गया।
बच्चो, इस ध्वज के मध्य रंगों और अशोक चक्र का अपना महत्व है, केसरी रंग वीरता और त्याग का, सफेद रंग शांति, सच्चाई और पवित्रता का और हरा रंग विश्वास, खुशहाली और हरियाली का प्रतीक है। चौबीस लाइनों वाले अशोक चक्र का भाव है कि देश दिन-रात तरक्की की ओर बढ़ता रहे। संविधान सभा में फैसला किया गया कि राष्ट्रीय ध्वज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हरमन प्यारे कपड़े खादी का होगा। 15 अगस्त, 1947 को यही ध्वज राष्ट्रीय ध्वज के रूप में दिल्ली में लहराया गया था।
-गांव और डाक- खोसा पांडो (मोगा) -142048



