राम उदगार डाइट पर चल रहे हैं

राम उदगार जब भी खाने बैठते, तो पूरे दमखम के साथ भोजन का डोज़ लेते। जब तक उनका पेट रूपी हौज पूरी तरह भरकर फूल न जाता और उनकी आत्मा तृप्त, या यूं कहें ‘कूल’ न हो जाती, तब तक वे लगातार अपने पवित्र कार्य में जुटे रहते।
वैसे उम्र कोई ज्यादा नहीं थी- महज़ बाइस-तेईस वर्ष। लेकिन उनके खाने का चॉइस प्रतिदिन बदलता रहता था। अच्छी नौकरी थी, अच्छी कमाई थी, इसलिए जी-भरकर खाते थे। नतीजा यह हुआ कि उनका शरीर धीरे-धीरे हाथी जैसा विशालकाय होता चला गया। जब शरीर पूरी तरह फैल गया, तो मामला अधर में लटक गया। जो पेट पहले स्लिम था, वह आगे की ओर लटकने लगा। चेहरे की रौनक भी गायब हो गई।
कारण साफ था। उनके सभी मित्र अब अपनी-अपनी पत्नियों के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालते और जमकर लाइक बटोरते। लेकिन जब राम उदगार अपनी तस्वीर डालते, तो मित्र लंबी सांस लेकर कहते- ‘अरे मित्र राम उदगार! यह क्या हाल बना लिया? अब तो तेरी शादी में बड़ी दिक्कत होगी। बड़ी मुश्किल से कोई लड़की तेरे पल्ले पड़ेगी।’
मित्र की यह बात सुनते ही उन्हें ज़ोर का झटका धीरे से वाला एहसास हुआ और यह बात उनके दिल की फाइल में हमेशा के लिए सेव हो गई।
अब राम उदगार को अपना अकेलापन खलने लगा। उनके सभी मित्र शादीशुदा हो चुके थे। कोई एक का पति था, तो कोई दो बच्चों का पिता भी बन गया था। लेकिन राम उदगार अब भी कुंवारे ही घूम रहे थे।
जब भी कोई लड़की वाला उन्हें देखने आता, पहले उन्हें देखकर थोड़ा कुनमुनाता। लेकिन जब तक नाश्ते और मिठाइयों पर पूरा न्याय न कर लेता, तब तक उसकी बातें पूरी तरह सकारात्मक रहतीं। उधर किचन से एक के बाद एक स्वादिष्ट व्यंजन निकलते रहते। ऐसा लगता मानो आज राम उदगार की शादी का पपलू फिट हो ही जाएगा।
भोजन का भरपूर आनंद लेने के बाद मेहमान विदा होते समय बड़े फिदा होकर राम उदगार का बायोडाटा मांगते और कहते- ‘मेरी लड़की बहुत शर्मीली है। वह कभी मना नहीं करेगी। रिश्ता लगभग तय ही समझिए।’
जैसे ही वे तय समझिए कहते, राम उदगार का मन भय से भर जाता। उन्हें अच्छी तरह पता था कि इस तरह के मीठे वाक्य अक्सर रिश्ते को मंज़िल तक नहीं, बल्कि पेंडिंग फाइल तक ही पहुंचाते हैं। पहले भी दो-तीन परिवार यही संवाद बोलकर मामला लटका चुके थे।
मेहमानों के जाते ही उनके पिता जी और बड़े भाई उनकी खूब प्रशंसा करने लगते- ‘वाह! आज तो एक नंबर के मेहमान थे। रिश्ता पक्का समझो।’
राम उदगार अपने मन की आशंका बताकर उनके अरमानों पर पानी नहीं फेरना चाहते थे। उन्हें पूरा विश्वास था कि दो-तीन घंटे के भीतर ही नकारात्मक उत्तर आ जाएगा।
और हुआ भी वही। अभी दो घंटे भी नहीं बीते थे कि पिता जी और भैया के चेहरों की सारी खुशी उड़ चुकी थी।
वैसे राम उदगार को देखने बहुत से मेहमान आए। सभी अपनी पहचान छोड़ गए, भरपेट खा-पीकर टंच हुए और रिश्ते को पंच करके निकल गए।
लेकिन इस बार जो नया मेहमान आया, उसने राम उदगार के सामने ही साफ-साफ अपनी बात रख दी। उसने कहा- ‘सब कुछ ठीक है। मेरी लड़की और राम उदगार की जोड़ी अच्छी लगेगी, लेकिन तब जब राम उदगार अपना वजन कम करके दिखाएं। लड़का पढ़ा-लिखा है, अच्छी नौकरी करता है। बस यही एक कमी है। इसे दूर कर दीजिए। मैं एक साल तक इंतज़ार करूंगा।’
मेहमान की बात राम उदगार को दिल से जंच गई।
बस, उसी दिन से उन्होंने अपने वजन को कम करने की मुहिम छेड़ दी। अब भोजन का डोज़ पहले से काफी कम हो गया है। इन दिनों वे पूरी तरह डाइट पर चल रहे हैं। रोज़ लंबी दौड़ लगाते हैं, योग करते हैं और नियमित कसरत भी करते हैं, ताकि उनकी वर्षों पुरानी हसरत पूरी हो सके।
जब से उन्होंने नियम, कायदा और अनुशासन को अपनाया है, तब से उन्हें उसका भरपूर लाभ भी दिखाई देने लगा है, फायदा हो रहा है। जिस गति से उनका वजन घट रहा है, उसे देखकर लगता है कि एक वर्ष पूरा होने से पहले ही वे अपना लक्ष्य हासिल कर लेंगे।
-मो. 8329680650
 

#राम उदगार डाइट पर चल रहे हैं