गदर पार्टी का गठन कब हुआ था ?

‘दीदी, भारत को पूर्ण स्वतंत्रता व समानता का मार्ग दिखलाने के उद्देश्य से गठित पहली पार्टी कौन सी थी?’
‘़गदर पार्टी थी। 15 जुलाई 1913 में लाला हरदयाल व बाबा सोहन सिंह भकना के नेतृत्व में हिंदी ज़िलावतनी देशभक्तों, किसान, मजदूरों, बुद्धिजीवियों व हिंदी विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयास से एस्टोरिया (ओरेगन), अमरीका में ़गदर पार्टी की स्थापना हुई थी।‘’ 
‘यानी विदेश में रहने वाले भारतीयों ने सबसे पहले पूर्ण स्वतंत्रता का सपना देखा।’
‘हां, दिलचस्प यह है कि इसका मूल नाम ़गदर पार्टी नहीं था बल्कि पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन था।’
‘फिर इसे ़गदर पार्टी क्यों कहा जाता है?’
‘दरअसल, यह पार्टी ‘़गदर की गूंज’ के नाम से एक अखबार निकाला करती थी, जोकि पहले उर्दू में निकलना शुरू हुआ और फिर पंजाबी व हिंदी में भी निकलने लगा। इस अखबार की वजह से यह ‘़गदर पार्टी’ के नाम से विख्यात हो गई। इस अखबार को मुफ्त वितरित किया जाता था और इसमें कोई विज्ञापन नहीं लिया जाता था। हां, कभी-कभी पार्टी का ही विज्ञापन छपता था।’
‘उसमें क्या लिखा होता था?’
‘ज़रूरत है- भारत में ़गदर करने के लिए दिलेर सिपाहियों की। वेतन- मौत। सम्मान- शहादत और आज़ादी। कार्यक्षेत्र- हिंदुस्तान।’
‘यह अखबार जब बिना विज्ञापन के मुफ्त में बांटा जाता था, तो इसका खर्च कैसे निकलता था?’
‘सब सदस्यों का आपसी सहयोग होता था। अखबार में युवाओं से उठने, युग बदलने व कर्तव्य पूरा करने का आह््वान किया जाता कि एकता का फल- शक्ति व स्वतंत्रता; अनेकता का परिणाम- दुर्बलता व परतंत्रता; एकता का मूल- समाजवाद; अनेकता का मूल- साम्राज्यवाद; हर प्रकार की दास्ता- चाहे आर्थिक हो या राजनैतिक या सामाजिक- उसे जड़ से उखाड़ दो। मानवता ही सच्चा धर्म है।’
‘यह तो बहुत अच्छे उद्देश्य थे।’
‘लेकिन किसी के लिए भी ़गदरी बनना आसान नहीं था; क्योंकि व्यक्ति को धर्म व जाति से दूर समानता के आधार पर व्यवहार करते हुए सहजीवन जीना और देश के लिए हर बलिदान देना होता था। ़गदर पार्टी का कार्यालय सहजीवन का प्रतीक ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत की प्रयोगशाला था। उसमें न जातिगत ऊंच-नीच थी और न ही धर्म के आधार पर कोई भेदभाव। हिन्दू, मुस्लिम व सिख साथ-साथ रहते थे, सब मिलकर काम करते, एक सा भोजन करते और सबको समान मासिक जेब खर्च मिलता।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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