पानी में चलने वाला इंद्रधनुष
बच्चो! क्या आपने कभी पानी में चलने वाला रेनबो या इंद्रधनुष देखा है? मुझे मालूम था कि आप में से अधिकतर का जवाब ‘न’ में ही आयेगा। कोई बात नहीं। आज मैं आपको इस बहुत ही आसान व सुंदर विज्ञान प्रयोग के बारे में बताती हूं, जिसे आप घर पर मौजूद चीज़ों से आसानी से कर सकते हैं। इस प्रयोग को करते हुए आपको केशिका क्रिया या केपिलरी एक्शन का सिद्धांत भी समझ में आ जायेगा।
इस प्रयोग को करने के लिए हमें ज़रुरत होगी- सात पारदर्शी कांच या प्लास्टिक के गिलास, जो सभी एक ही आकार के होने चाहिएं। पानी, लिक्विड फूड कलर यानी खाने वाले प्राइमरी कलर्स जैसे लाल, पीला व नीला। सात टिश्यू पेपर और रंग मिलाने के लिए चम्मच।
यह सामग्री एकत्र करने के बाद हमें इस प्रयोग को निम्न क्रम से करना है :-
सबसे पहले सभी 7 गिलासों को एक सीधी रेखा या गोल घेरे में पास-पास रखें।
इसके बाद आपको हर दूसरे गिलास में पानी भरना है, जिसका अर्थ यह है कि पहले गिलास में पानी भरें, दूसरे गिलास को खाली छोड़ दें। तीसरे गिलास में पानी भरें और चौथे को खाली छोड़ दें। पांचवें गिलास में पानी भरें और छठे गिलास को खाली छोड़ दें। सातवें गिलास में पानी भरें।
अब रंग मिलाना है। पानी वाले गिलासों में फूड कलर की 4-5 बूंदें डालनी हैं। पहले गिलास में लाल रंग। तीसरे गिलास में पीला रंग। पांचवें गिलास में नीला रंग। सातवें गिलास में फिर लाल रंग। ध्यान रहे कि अगर आप गोल घेरा बना रहे हैं तो 6 गिलास भी काफी हैं, जहां आखिरी और पहला गिलास मिलकर चक्र पूरा करेंगे। चम्मच से रंगों को अच्छी तरह से मिला लें।
टिश्यू पेपर के टुकड़ों को लम्बाई में मोड़ लें, स्ट्रिप या पट्टी की तरह। प्रत्येक टिश्यू पेपर के एक सिरे को पानी वाले गिलास में और दूसरे सिरे को उसके बगल वाले खाली गिलास में डालें। इस तरह सभी गिलासों को टिश्यू पेपर की मदद से आपस में जोड़ दें।
अब शांत बैठकर जादू देखें। कुछ ही मिनटों में रंग टिश्यू पेपर पर ऊपर चढ़ने लगेंगे। पूरा इंद्रधनुष बनने में 20 से 30 मिनट का वकत लगेगा। कुछ समय बाद, खाली गिलासों में दोनों तरफ रंगीन पानी रिसकर एकत्र होने लगेगा। लाल और पीला रंग मिलकर खाली गिलास में नारंगी रंग बना देंगे। पीला और नीला रंग मिलकर खाली गिलास में हरा रंग बना देंगे। नीला और लाल रंग मिलकर खाली गिलास में बैंगनी रंग बना देंगे। इस प्रकार, सभी गिलासों में मिलकर एक सुंदर चलता-फिरता इंद्रधनुष दिखायी देने लगेगा।
यह सब केशिका क्रिया के कारण हुआ। टिश्यू पेपर पौधों के रेशों (सेलुलोज) से बने होते हैं, जिनमें बहुत छोटे-छोटे छेद होते हैं। पानी के अणु या मोलिक्यूल आपस में और टिश्यू पेपर से चिपक जाते हैं। गुरुत्वाकर्षण के विपरीत, पानी इन छोटे छेदों के सहारे ऊपर की ओर चढ़ता है और खाली गिलासों में चला जाता है। ठीक इसी प्रक्रिया से पेड़-पौधे ज़मीन से पानी खींचकर अपने पत्तों तक पहुंचाते हैं।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



