सेल और जीन थैरेपी टेक्नीशियन में बनाएं करियर
एक समय था जब अधिकांश दवाईयां केवल बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित करती थीं लेकिन चिकित्सा विज्ञान अब एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां बीमारी की जड़ कोशिकाओं (सेल) और जीन (आनुवंशिक ईकाईयों) को ठीक करने की कोशिश की जा रही है। इसी नई चिकित्सा क्रांति का सबसे महत्वपूर्ण पेशा उभर रहा है- सेल और जीन थैरेपी टेक्नीशियन। भारत में कैंसर, थैलेसीमिया, सीकल सेल एनीमिया, कुछ दुर्लभ आनुवंशिक रोगों और प्रतिरक्षा संबंधी बीमारियों के उपचार में सेल और जीन थैरेपी पर तेजी से काम हो रहा है। केन्द्र सरकार की बायो-ई3 नीति में भी कोशिकाओं और जीन आधारित उपचार को भविष्य की जैव-अर्थव्यवस्था का प्रमुख क्षेत्र माना है। यह ऐसा कॅरियर है जिसमें प्रयोगशाला, जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा विज्ञान एक साथ मिलते हैं।
क्या होती है सेल और जीन थैरेपी?
हमारे शरीर की हर कोशिका में जीन मौजूद होते हैं। कई बीमारियां इन्हीं जीनों में बदलाव या खराबी के कारण होती हैं। सेल थैरेपी में रोगी की कोशिकाओं को प्रयोगशाला में तैयार या संशोधित करके उन्हें वापस शरीर में पहुंचाया जाता है। जबकि जीन थैरेपी में खराब जीन को सुधारने, बदलने या नया जीन जोड़ने की तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया को सुरक्षित और सटीक तरीके से तैयार करने वाले प्रशिक्षित विशेषज्ञ ही सेल और जीन थैरेपी टेक्नीशियन कहलाते हैं।
इस पेशे का काम क्या होता है?
इस पेशे से जुड़े लोगों का काम केवल प्रयोग करना नहीं होता बल्कि अत्यंत नियंत्रित वातावरण में जैविक नमूनों को संभालना होता है। इनकी मुख्य जिम्मेदारियां इस प्रकार से होती हैं- रोगी से प्राप्त कोशिकाओं का संग्रह और संरक्षण, * कोशिकाओं की प्रयोगशाला में वृद्धि और परीक्षण, जीन संशोधन की प्रक्रिया में तकनीकी सहायता, जैव सुरक्षा मानकों का पालन, गुणवत्ता जांच और अभिलेख तैयार करना, चिकित्सकों और वैज्ञानिकों के साथ समन्वय, कौन बन सकता है सेल और जीन थैरेपी टेक्नीशियन, यह कॅरियर विज्ञान विषय के विद्यार्थियों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इन क्षेत्रों में जाने के इच्छुक विद्यार्थी 12वीं के बाद इन क्षेत्रों में पढ़ाई कर सकते हैं। जैव प्रौद्योगिकी, सूक्ष्मजीव विज्ञान, जैव रसायन, जीवन विज्ञान, औषधि विज्ञान, चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी, विशेष प्रशिक्षण या उच्च अध्ययन के माध्यम से सेल और जीन थैरेपी की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
किन कौशलों की आवश्यकता होती है?
इस क्षेत्र में सफलता के लिए केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। कुछ खास तरह के कौशलों की भी ज़रुरत पड़ती है। ये कौशल इस प्रकार से हैं- प्रयोगशाला उपकरणों का संचालन, कोशिका संवर्धन की तकनीक, जैव सुरक्षा नियमों की समझ, सूक्ष्म अवलोकन क्षमता, वैज्ञानिक अभिलेखन, टीम में काम करने की क्षमता इसके अलावा इस क्षेत्र के लिए ज़रूरी कौशलों में शामिल है- धैर्य और शुद्धता। वास्तव में ये इस पेशे की सबसे बड़ी जान है।
वेतन और उन्नति की संभावना
शुरुआती स्तर पर प्रशिक्षित तकनीशियनों को अच्छे अस्पतालों, जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों में अवसर मिल सकते हैं। अनुभव बढ़ने के बाद उन्हें वरिष्ठ प्रयोगशाला विशेषज्ञ बनने का अवसर मिल सकता है, ये गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारी हो सकते हैं, अनुसंधान सहयोगी बन सकते हैं, उत्पादन विशेषज्ञ हो सकते हैं, प्रशिक्षण विशेषज्ञ भी बन सकते हैं, विदेशों में भी इस क्षेत्र के प्रशिक्षित लोगों की मांग लगातार बढ़ रही है।
भविष्य क्यों उज्जवल है?
भविष्य में सीकल सेल रोग, दुर्लभ आनुवंशिक रोग और कैंसर उपचार के लिए नई जैविक तकनीकों पर निवेश बढ़ रहा है। सरकार जैव निर्माण और उन्नत जैव उपचार को बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशकों में कोशिका और जीन आधारित उपचार आधुनिक चिकित्सा के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल होंगे।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर




