भारतीय परियों ने एशियन गेम्स में दूसरी बार जीता गोल्ड
कोरओगी स्पोर्ट्स पार्क में 22 सितम्बर 2026 को ही खेले गये एशियन गेम्स महिला क्रिकेट फाइनल में भारत की परियों ने श्रीलंका के खिलाफ क्लिनिकल परफॉरमेंस देते हुए प्रभावी जीत दर्ज की और आइची-नागोया में खेल जा रहे 20वें एशियाई खेल 2026 का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मौजूदा एशियाई खेलों में भारत का यह पहला स्वर्ण पदक है। इस लिहाज़ से देखा जाये तो इन खेलों में आगे भी अच्छे प्रदर्शन व पदकों के लिए भारतीय महिलाओं पर विश्वास किया जा सकता है। सानो के विपरीत आइची-नागोया के कोरओगी स्पोर्ट्स पार्क में मंगलवार (22 सितम्बर 2026) को धूप खिली हुई थी। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फैसला किया और स्मृति मंधाना व शेफाली वर्मा की भरोसेमंद सलामी जोड़ी ने एक बार फिर शानदार शुरुआत दी, जिसकी बदौलत भारत ने अपने निर्धारित 20 ओवर में मात्र 3 विकेट खोकर 216 रन बनाये। जवाब में श्रीलंका की टीम सिर्फ 69 रन ही बना सकी। भारत ने रिकॉर्ड 147 से फाइनल में जीत दर्ज की, जोकि रनों के अंतर के हिसाब से महिला टी-20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक है।
हरमनप्रीत का प्रसन्न होना स्वाभाविक था कि भारत ने आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स का अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। हरमनप्रीत ने कहा, ‘हमारे लिए यह बहुत बड़ी बात है क्योंकि हमारा उद्देश्य गोल्ड घर ले जाना था। इससे भी महत्वपूर्ण यह कि हम अपना झंडा सबसे ऊपर लहराता हुआ देखना चाहती थीं। हां, हमने यह नहीं सोचा था कि हम अपने देश के लिए पहला गोल्ड जीतेंगी। मुझे यकीन है कि हमारे एथलीट्स और भी गोल्ड जीतेंगे।’ गौरतलब है कि क्रिकेट की अन्य प्रतियोगिताओं के विपरीत यहां कोई ट्राफी उठानी नहीं थी लेकिन हरमनप्रीत ट्राफी की जगह स्वर्ण पदक गले में पहनने को लेकर भी अधिक प्रसन्न थीं। उन्होंने कहा, ‘जब हम ट्राफी जीतती हैं, तो वह बीसीसीआई के ऑफिस में चली जाती हैं। हमारे लिए सबसे बड़ी बात यह है कि गेम्स का हिस्सा बनीं, गोल्ड जीता, जिसे फ्रेम करके अपने घर में लगाया जा सकता है।’
यह गोल्ड सिर्फ पदक का सफलतापूर्वक बचाव नहीं था। यह एक शाम को याद दिलाना था कि भारतीय दल के जो एथलीट्स शहर व उससे अलग बिखरे हुए थे, वह एक साथ आकर जश्न में शामिल होंगे। स्मृति का कहना है, ‘मैं वास्तव में खुश हूं कि हमने भारत की मेडल टैली में इज़ाफा किया। हर किसी ने बहुत अच्छी क्रिकेट खेली। जब आप पदक जीतते हैं तो आप भारतीय दल में योगदान करते हैं। भारतीय तिरंगे को राष्ट्रगान के साथ ऊपर जाते हुए देखने का अनुभव एकदम अलग एहसास है। यह गौरान्वित करने वाला पल होता है। हमें अपने आपको निरंतर बेहतर करना होगा अगले डेढ़ दो वर्ष में ताकि हम ओलंपिक पदक जीतने की सबसे अच्छी स्थिति में हों।’ स्मृति की मेहनत करने वाली बात एकदम सही है। फिलहाल एशिया में भारत को छोड़कर किसी देश की महिला क्रिकेट टीम अंतर्राष्ट्रीय स्तर की नहीं है लेकिन इससे भारत की उपलब्धि कम नहीं हो जाती है। गेंद अगर फुलटॉस भी है, तो भी उसे मारकर सीमा रेखा के बाहर तो पहुंचाना ही पड़ता है। ओलंपिक में पदक हासिल करना वास्तव में बहुत बड़ी बात होगी; क्योंकि मुकाबले पर ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड व न्यूज़ीलैंड जैसी मज़बूत टीमें होंगीं।
अगर सम्पूर्ण कैलेंडर को और भारतीय महिला क्रिकेटरों की उपलब्धि को देखा जाये तो हरमनप्रीत के अनुसार, लड़कियां हमेशा से ही एशियन गेम्स, राष्ट्रकुल खेलों व ओलंपिक का हिस्सा बनना चाहती थीं। भारतीय लड़कियों ने हमेशा ही द्विपक्षीय श्रृंखलाएं, विश्व कप व एशिया कप ही खेले हैं, पिछले एशियन गेम्स तक। उन्हें नहीं मालूम था कि पदक के लिए कड़ी मेहनत करने का क्या एहसास होता है। यह खुशकिस्मती है कि अब उन्हें यह अवसर मिल रहे हैं। इसलिए हरमनप्रीत इससे पॉजिटिव ही लेना चाहती हैं। बहरहाल, पिछले एशियन गेम्स की तरह इस बार भी फाइनल में भारत के सामने श्रीलंका थी। हाइब्रिड पिच पर खेले गये फाइनल में स्पिनर्स को काफी मदद मिल रही थी लेकिन स्मृति ने काउंटर अटैक करते हुए 5 चैक्के व 7 छक्के लगाये और मात्र 45 गेंदों में 79 रन बनाये, जबकि शेफाली ने 3 चैक्के व इतने ही छक्कों की मदद से 29 गेंदों में 48 रन बनाये (ध्यान रहे कि बांग्लादेश के खिलाफ सेमीफाइनल में शेफाली ने अपना पहला टी-20 शतक लगाया था)। इसके बाद ऋचा घोष ने 22 गेंदों में 49 नाबाद रन बनाये और भारत का स्कोर 216 तक पहुंचा दिया। जवाब में श्रीलंका घुमाव लेती गेंदों पर दीप्ति शर्मा (3/6), शेफाली (2/3), श्रेयांका पाटिल (2/9) व श्री चरणी (2/13) के सामने संघर्ष ही करती रही और उसकी पूरी टीम 15.4 ओवर में 69 रन पर ही सिमट गई।
वैसे भारत के लिए पहले बल्लेबाज़ी करना फायदेमंद रहा। शुरू में गेंद बल्ले पर आ रही थी, जिसका लाभ स्मृति व शेफाली को मिला और उन्होंने पहले विकेट के लिए 99 रन जोड़े। यह दोनों टी-20 अंतर्राष्ट्रीय में पहले विकेट की साझेदारी में 4,000 से भी अधिक रन बना चुकी हैं। फिर जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ता रहा, पिच स्पिन को बहुत अधिक मदद करने लगी। एक बार जब श्रीलंका की कप्तान चमारी अट्टापट्टू 29 रन बनाकर आउट हो गईं तो शेष बैटर्स कुल मिलाकर 40 रन ही जोड़ सकीं। भारत को रिकॉर्ड 147 रन से जीत हासिल हुई। इस प्रकार भारत की परियों ने श्रीलंका पर अपने दबदबे को बरकरार रखा है। गौरतलब है कि 13 सितम्बर 2026 को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की स्पिन लेती पिच पर एशिया कप के फाइनल में भी भारत (5 विकेट खोकर 183 रन) ने श्रीलंका (111 रन) को 72 रन से पराजित करके रिकॉर्ड आठवीं बार यह प्रतियोगिता अपने नाम की थी। महिला एशिया कप का इतिहास देखें तो उसमें अनेक बार फोर्मेट्स बदले गये हैं, प्रतियोगिता का विस्तार किया गया है और अलग-अलग देशों में खेला गया है। लेकिन एक बात बार-बार दोहरायी गई है कि खिताबी मुकाबले में वही जानी पहचानी टीमें आमने सामने रही हैं। पहले चार सत्रों में फाइनल भारत व श्रीलंका ने ही खेले, फिर 14 साल तक यह दोनों टीमें फाइनल में एक-दूसरे के सामने नहीं आयीं, लेकिन 2022 से फिर वही सिलसिला आरंभ हो गया कि एशिया कप के लिए भारत व श्रीलंका ही आपस में भिड़े।
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