दुनिया में फैलने लगा एक और घातक नशा—ज़ोम्बी 

इस समय दुनिया के देश एक बहुत ही भयानक नशे ज़ोम्बी से भयभीत हैं, जो बहुत तेज़ी से फैल रहा है। इस नए और खतरनाक नशे ने दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सरकारों और समाज को गहरी चिंता में डाल दिया है। अमरीका के कई प्रांतों, कनाडा, मैक्सिको और कुछ अन्य देशों में फैल चुके ज़ोम्बी नशे के कुछ मामले यूरोपियन देशों में भी सामने आने के कारण दुनिया की स्वास्थ्य एजेंसियां हरकत में आ गई हैं, क्योंकि यह नशा बहुत तेज़ी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है।
ज़ोम्बी का क्या अर्थ है : ज़ोम्बी फिल्मों में एक ऐसा काल्पनिक मरा हुआ इंसान/किरदार होता है, जो मरने के बाद भी अपनी कब्र में से उठ खड़ा होता है। वह कुछ बोलता नहीं, कुछ सोचता नहीं है, लेकिन अधमरी हालत में होते हुए भी वह सनसनीखेज़ मानव विरोधी घटनाओं को अंजाम देता है। इसे खासकर पश्चिमी फिल्मों में दूसरे लोगों को नुकसान पहुंचाते हुए और लोगों को मारकर उनका मांस खाते हुए दिखाया जाता है, जो अजीब और अनहोनी हरकतें करता है। इसे कुछ उपन्यासों या हॉलीवुड फिल्मों में वायरस फैलाते हुए दिखाया जाता है। असल में ज़ोम्बी एक ऐसी लाश को कह सकते हैं, जिसे काल्पनिक तरीके से जीवित किया गया हो। जब यह किसी अन्य इंसान को काटता है या अपने प्रभाव में लेता है, तो दूसरा अच्छा-भला इंसान भी ज़ोम्बी बन कर अजीब हरकतें करने लगता है। 
क्या है ज़ोम्बी नशा : दो दवाओं के मिश्रण से बनने वाले इस नशे का कोई पक्का नाम नहीं है, लेकिन पूरी दुनिया इसे ‘ज़ोम्बी’ कहने लगी है, जिसे लेने के बाद इंसान एक तरह से ज़िंदा लाश बन जाता है। हम कह सकते हैं कि ‘ज़ोम्बी नशा’ आम लोगों का बनाया और प्रचारित किया हुआ नाम है। इस नशे का असली नाम ‘ज़ाइलाज़ीन’ है। जो विशेषकर बड़े जानवरों—हाथी, गैंडे, घोड़े और गाय आदि का उपचार करते समय बेहोश करने हेतु दी जाने वाली दवा है, इस दवा के साथ एक अन्य दवा ‘फेंटानिल’ के साथ मिलाकर ज़ोम्बी नशा तैयार किया जाता है। हालांकि, कई बार इसमें अन्य नशीले पदार्थ—हैरोइन, कोकीन तथा अन्य गैर-कानूनी रसायन भी मिलाए जाते हैं। यह मिश्रण इस नशे को बहुत घातक और जानलेवा बना देता है, कुछ देशों के युवा इस नशे को लेने लग पड़े हैं। 
इंसानों पर ज़ोम्बी का असर : इस नशे को लेने वाला इंसान घंटों तक पत्थर के बुत्त की तरह एक ही जगह पर खड़ा रहता है, क्योंकि इसकी वजह से दिमाग पूरी तरह सुन्न हो जाता है। उसके शरीर की हर हरकत धीमी हो जाती है और आस-पास की समझ तक खत्म हो जाती है। दिल की धड़कन धीमी होने के कारण सांस लेने की प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है और रक्तचाप भी कम हो जाता है। यह नशा लेने वाले लोग अपना होश खो देते हैं, रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने की वजह से पूरे शरीर और त्वचा में ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने से त्वचा पर घाव होने लगते हैं। शरीर के टिशू धीरे-धीरे मरने लगते हैं, हाथों-पांवों में सूजन आने से मांस सड़ने लगता है।        -मो.98550-51099

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