ओलम्पिक खेलों में अपना योगदान बढ़ाएगा पंजाब

एक साहसी राज्य का नागरिक होने के नाते, मैं आपको बताना चाहता हूं कि खेल मेरे, समूह पंजाब और पंजाबियों के लिए क्या मायने रखते हैं। पंजाब कृषि प्रधान राज्य होने के साथ-साथ शुरू से ही योद्धाओं और शूरवीरों की धरती भी रहा है। कड़ी मेहनत और खून-पसीना ऐसे शब्द हैं जो कृषि और खेलों दोनों क्षेत्रों में एक समान लागू होते हैं। यही हमारे अस्तित्व और पहचान का सबूत हैं।
जब मैंने मुख्यमंत्री के रूप में पद संभाला था तो पंजाब में खेल संस्कृति को फिर से जीवित करना मेरी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक था। यही मुख्य कारण है कि मैंने खेल विभाग को मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन अपने पास ही रखने का फैसला किया। खेलों के संबंध में हमारे पास गर्व से कहने के लिए बहुत कुछ है।
भारत की ओलम्पिक पदक सूची में पंजाब के योगदान को और तेज़ी से बढ़ाने के संबंध में हमारी योजनाओं के बारे में जानकारी साझा करने से पहले मैं मोहाली, पटियाला और बठिंडा के निवासियों का दिल से धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने एक के बाद एक आयोजित करवाई मैराथन दौड़ में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। हाल ही में बठिंडा में हुई मैराथन दौड़ में हर उम्र वर्ग के लगभग 20,000 से ज़्यादा धावकों ने हिस्सा लेकर अपने शहर और राज्य का नाम रोशन किया। हम आने वाले महीनों में पूरे राज्य में ऐसी और मैराथन आयोजित करवाने की योजना बना रहे हैं।
पंजाब की खेल संस्कृति की शुरुआत ज़मीनी स्तर से ग्रमीण ओलम्पिक्स और वर्तमान चल रहीं ‘खेडां वतन पंजाब दीयां’ के ज़रिए होती है। पंजाब के समूह गांवों और शहरों में 38 खेलों के माध्यम से खेल प्रतिभा को बेहतर बनाना और जश्न मनाना हमारा एक अहम प्रयास है। ‘खेडां वतन पंजाब दीयां’ जैसी इतनी विशाल पहलकदमी साल 2022 से पहले पंजाब में कभी भी देखने को नहीं मिली।  हम ऐसा ही माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पंजाब सरकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पैदा करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है। पिछले पांच ओलम्पिक खेलों में भारत का सबसे ज़्यादा पदक विजेता आंकड़ा 7 से ज़्यादा नहीं हो सका। पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर मैं अपने अधिकार क्षेत्र में वह सब कुछ करूंगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वर्ष 2036 के ओलम्पिक खेलों में भारत की पदक सूची में पंजाबियों का योगदान कहीं अधिक हो। मैं 2036 के ओलंपिक खेलों में पंजाबियों को भारत के लिए कम से कम तीन से चार स्वर्ण पदक जीतते देखना चाहता हूं। खेलों में पंजाब का योगदान पहले ही शानदार रहा है। हांग्जू में हुए 2023 के एशियाई खेलों में पंजाब के खिलाड़ियों ने भारत के लिए 20 पदक जीते, जिसमें आठ स्वर्ण, छह रजत और छह कांस्य पदक शामिल थे, जो एशियाई खेलों के 72 साल के इतिहास में पंजाब का सबसे सर्वोत्तम प्रदर्शन था। अब हमारा कार्य ऐसी सुविधाएं, कोचिंग और अवसर प्रदान करना है, जो इस प्रतिभा को और ऊंचाई तक ले जाएं।
वर्ष 2022 से हमने बड़े शहरों और कस्बों के साथ-साथ ज़िला और गांव स्तर पर भी सबसे बेहतरीन स्टेडियम, खेल सुविधाएं और मैदान उपलब्ध करवाने के लिए खेलों के आधारभूत ढांचे में व्यापक स्तर पर निवेश किया है। हम 3,000 आधुनिक ग्रामीण खेल मैदान तैयार कर रहे हैं, जिनमें लेज़र-लेवल के मैदान, चेन-लिंक फेंसिंग वाली चारदीवारी, फ्लड लाइटें, जॉगिंग ट्रैक और अलग-अलग खेलों के लिए सुविधाएं शामिल हैं। हम फुटबॉल, वालीबाल, क्रिकेट और अन्य खेलों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली खेल किटें भी उपलब्ध करवा रहे हैं ताकि युवाओं के पास अभ्यास के लिए ज़रूरी सामान हो। हम शारीरिक तंदुरुस्ती और खेल प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य भर के गांवों में इनडोर जिम स्थापित कर रहे हैं। ये खेल मैदान और जिम का कार्य पूरा करने के बाद हम फिर आगे 3,000 गांवों की ओर बढ़ेंगे और यह कोशिश तब तक जारी रहेगी, जब तक हम पंजाब के हर गांव को इसके तहत कवर नहीं कर लेते। 
हम खेलों को नशे के अभिशाप के खिलाफ  पंजाब की लड़ाई का एक अहम हिस्सा भी मानते हैं। खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से हमारे युवाओं की ऊर्जा को एक रचनात्मक दिशा मिलती है। खेल मैदान सिर्फ  अभ्यास और प्रतियोगिता की जगह नहीं हैं, बल्कि ये ऐसे स्थान हैं जहां युवा एक साथ इकट्ठे और सक्रिय हो सकते हैं और अपने भीतर अनुशासन की भावना पैदा कर सकते हैं। खेल प्रतियोगिताएं उन्हें स्थानीय और राज्य स्तर पर उपलब्धियां हासिल करने के लिए उत्साहित करती हैं। पंजाब को लंबे समय से देश की खेल नर्सरी के तौर पर जाना जाता रहा है। हमारे युवाओं में इस विरासत को और आगे ले जाने के लिए पूरी ऊर्जा और प्रतिभा है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हमें सिर्फ उन्हें सही आधारभूत ढांचा, कोचिंग और उचित अवसर प्रदान करने की ज़रूरत है।
इस साल ‘खेडां वतन पंजाब दीयां’ 5 सितम्बर को अध्यापक दिवस पर शुरू की गईं। यह हमारे अध्यापकों से लेकर खेल मैदानों के कोचों और प्रशिक्षकों के प्रति हमारे सम्मान को दर्शाता है।  ‘खेडां वतन पंजाब दीयां’ चाहे पंजाब की मिट्टी से जुड़ा एक स्थानीय प्रयास है, लेकिन इसका प्रभाव राष्ट्रीय और अंतर्राष्टीय स्तर तक है।
मैं उम्मीद करता हूं कि ‘खेडां वतन पंजाब दीयां’ के ये 75 दिन हम सभी को एक-दूसरे के और करीब लाएंगी और भारत की ओलम्पिक पदक सूची में नई उपलब्धियां जोड़ने के लिए पंजाब का सही मार्गदर्शन करेंगी। यही मेरे मन की इच्छा, मेरी उम्मीद और मेरा वायदा है कि पंजाब देश का मार्गदर्शक बनेगा।
हमारा ़ख्वाब, रंगला पंजाब।

#ओलम्पिक खेलों में अपना योगदान बढ़ाएगा पंजाब