गुरुद्वारा मिलवुड्स, एडमंटन , कनाडा


एडमंटन, कनाडा का पॅ्रसिद्ध शहर है। यह अल्बर्टा की राजधानी है। एडमंटन में कई मशहूर गुरुद्वारे हैं। उनमें से एक है गुरुद्वारा साहिब मिलवुड्स। यह गुरुद्वारा साहिब रामगढ़िया गुरु सिख सोसायटी, एडमंटन की सकारात्मक नेतृत्व द्वारा सिखी के प्रचार, सभ्याचार, मां-बोली पंजाबी, विरसा, विरासत तथा गुरु-साहिबान की गुरुवाणी के उद्देश्य तथा उपदेश के लिए कार्यरत है। विदेश में रहकर सिख कौम के अनुयायियों ने अपने सभ्याचार के समस्त तत्वों को जीवित रखने के लिए दीर्घ स्तर के विशेष प्रयास आरम्भ किए हुए हैं, ताकि पंजाबी सभ्याचार तथा इतिहास नवयुवकों में उजागर रहें। इस गुरुद्वारे में चौबीस घंटे लंगर चलता रहता है, जिसमें कई तरह के मिष्ठान्न व्यंजन, लंगर के रूप में मिलते हैं। इस गुरुद्वारे की कमेटी पंजाबी भाईचारे को ही नहीं बल्कि समूचे भारत, कनाडा तथा विश्वव्यापी सोच को साथ लेकर चल रही है। प्रत्येक धर्म-जाति, रंग-नस्ल के लोग यहां आते हैं। पंजाबियों ने अपने विरसे की खुशबू को दूर-दूर तक फैलाने के लिए अपनी मेहनत और ईमानदारी के परचम बुलंद किए हुए हैं। इस स्थान पर पंजाबी भाईचारे के लोग अपने निजी कारोबार को बढ़ाने के लिए यहां के नोटिस बोर्ड पर अपने कारोबार संबंधी इश्तिहार आदि टंकित कर जाते हैं, जिसको पढ़ कर लोग अपनी ज़रूरत के अनुसार सहयोग दे देते हैं। इस स्थान पर पंजाबी सभ्याचार तथा मातृ-भाषा को और प्रफुल्लित करने के लिए पंजाबी पढ़ाना, सिखाना, लिखना, बोलना आदि का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। श्रद्धालु प्रत्येक रीति-रिवाज़ के अनुसार श्री अखण्ड पाठ साहिब रखवाते हैं। दसवंध की मर्यादा का पूरा-पूरा सत्कार किया जाता है। शनिवार तथा रविवार के दिनों के अतिरिक्त भी महत्वपूर्ण दिन -त्यौहारों पर संगत का तांता लगा रहता है। यहां आकर यह महसूस होता है कि जैसे पंजाब के किसी मेले, धार्मिक स्थान पर पंजाबी श्रद्धालु एकत्रित हुए हों। सारा पंजाब यहां देखने को मिलता है।धूमधाम से नगर कीर्तन निकाले जाते हैं तथा हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, ताकि बच्चों में पंजाबियत कायम रहे। बच्चों को दिन-त्यौहारों से जोड़ा जाता है। कीर्तन दरबार, ढाडी जत्थे, कवीशरी तथा सिख इतिहास और गुरुवाणी से संबंधित व्याख्यान, कथा प्रचार, भाषण अपनी मर्यादानुसार चलते रहते हैं। गुरुद्वारों में पवित्रता की मर्यादा को अनुशासन तथा नियमों के अनुसार अलंकारित किया जाता है। विदेशों में गुरुद्वारा साहिब सभ्याचार, गुरुवाणी तथा मातृ भाषा को सदैव जीवंत रख रहे हैं।

—बलविन्दर ‘बालम’ 
ओंकार नगर, गुरदासपुर (पंजाब)