सम्पूर्ण सुधार से ही होगी दुर्घटनाओं में कमी


मात्र चार दिन के भीतर सिर्फ  दो राज्यों (हरियाणा व ओडिशा) में  ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के लिए चालानों के ज़रिये 1.41 करोड़ रुपए एकत्र किये गये हैं। हरियाणा में 3430 चालान कटे, जिनसे 52.32 लाख रुपए एकत्र हुए। ओडिशा में 4080 चालान काटकर 88.90 लाख रुपए जमा किये गये। चालानों की संख्या कम है, लेकिन पैसा काफी एकत्र किया गया है, जिससे यह अंदाज़ा एकदम सही है कि नये संशोधित कानून में जुर्माना का प्रावधान बहुत अधिक रखा गया है।  इस वजह से जनता के एक बड़े वर्ग ने इस अत्याधिक जुर्माने की आलोचना करते हुए इसे कम करने की मांग की है, कुछ राज्यों ने इसी कारण से अभी इस कानून को लागू करने की अधिसूचना भी जारी नहीं की है। यह कहकर भी इसकी आलोचना की जा रही है कि पुलिस को ज्यादा दो नंबर की कमाई करने का अवसर प्रदान कर दिया गया है कि पहले जहां मात्र 200 रुपए से मुट्ठी गर्म करके काम चल जाता था, अब 2000 रुपए से कम में बात नहीं बन रही है। एक कार्टून में तो इस नये कानून को पुलिस का आठवां वेतनमान बताकर कटाक्ष किया गया है। कुछ जगह से ऐसी भी खबरें आयी हैं कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर जो जुर्माना थोपा गया, वह वाहन की कीमत से भी अधिक था। लेकिन ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी ने पूर्णतया स्पष्ट कर दिया है कि उनका मंत्रालय किसी दबाव में नहीं आयेगा और न ही निर्धारित किये गये जुर्माने में कोई कमी लायी जायेगी। गडकरी का कहना है कि सरकार भारी जुर्माना लागू नहीं करना चाहती, लेकिन कानून के सम्मान व डर के लिए ऐसा करना आवश्यक हो गया था। विशेषकर इसलिए कि लोगों की जानें सुरक्षित रखी जा सकें। गडकरी का कहना है कि अधिक जुर्माना अगले कुछ माह में अच्छे नतीजे बरामद करेगा।  गौरतलब है कि 31 जुलाई को संसद ने मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 पारित किया, जिसमें सख्त व भारी जुर्माना का प्रावधान है ताकि सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सके। 9 अगस्त को राष्ट्रपति ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी और यह 1 सितम्बर से पूरे देश में लागू हो गया। हालांकि कुछ राज्यों ने अभी इस संदर्भ में अधिसूचना जारी नहीं की है। नये कानून में 24 ट्रैफि क अपराध कंपाउंडएबल हैं, जिसका अर्थ यह है कि चालक मौके (ऑन द स्पॉट) पर ही जुर्माना अदा कर सकता है, उसे अदालत जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इन अपराधों में जुर्माना 500 रुपए से लेकर 10,000 रुपए तक का है और कई मामलों में दोबारा जुर्म करने पर जुर्माना दोगुना हो जाता है। मसलन हाथ में फोन पकड़कर ड्राइविंग करने पर जुर्माना 5000 रुपए है और इसी हरकत में दोबारा पकड़े जाने पर 10,000 रुपए बिना परमिट (कमर्शियल) के वाहन चलाने पर पहले व दूसरे अपराध के लिए 10,000 रुपए का ही जुर्माना है। लेकिन तीसरी बार अपराध करने पर एक वर्ष की कैद का प्रावधान है। ट्रैफिक के 24 कंपाउंडएबल अपराध नये कानून की धारा 200 के तहत दिए गये हैं। 24 अपराधों की जो यह श्रेणियां हैं, इन्हें किसी भी स्तर पर कंपाउंड किया जा सकता है। इनके लिए संबंधित राज्य सरकार अपनी जुर्माना राशि व अन्य सज़ा भी निर्धारित कर सकती है। इन 24 अपराधों के अतरिक्त नये कानून के तहत जो अन्य ट्रैफिक अपराध हैं वह सभी गैर कंपाउंडएबल हैं, जिसका अर्थ यह है कि आरोपी को चालान अदा करने के लिए अदालत में जाना होगा। इस मामले में राज्य सरकार केंद्र द्वारा निर्धारित जुर्माना से कम जुर्माना तय नहीं कर सकती। ट्रांसपोर्ट मंत्रालय के अनुसार देश में हर साल लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इनमें मरने वाले 65 प्रतिशत लोग 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं। इस भयावह संख्या को सख्त कानून के ज़रिये ही शून्य या कम किया जा सकता है। ऐसा गडकरी का कहना है। इस तर्क में काफी दम प्रतीत होता है, अगर अन्य देशों की स्थिति को देखा जाये, जहां ट्रैफिक के सख्त नियम सख्ती से लागू हैं। सड़क की जो खराब स्थितियां हैं, फौल्टी साइन व ट्रैफि क सिग्नलों का खराब प्रबंधन आदि को पूरी तरह से संबोधित नहीं किया गया है। रोड ओनिंग एजेंसीज के विरुद्ध मात्र एक प्रावधान है कि खराब डिज़ाइन की वजह से अगर कोई घातक दुर्घटना होती है तो उन पर सिर्फ  एक लाख रुपए का जुर्माना है। खराब साइन, खराब मेंटेनेंस आदि के लिए भी मोटा जुर्माना होना चाहिए। सम्पूर्ण सुधार से ही दुर्घटनाएं कम की जा सकती हैं। साल 2017 में सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ रोहित बलुजा ने जो अध्ययन किया था, उससे मालूम होता है कि दिल्ली में 75 प्रतिशत सड़क संकेतक यात्रियों के लिए त्रुटिपूर्ण व भ्रामक थे। उनका कहना है कि जब तक कानून में हर चीज की स्पष्ट रूप से व्याख्या नहीं की जायेगी तब तक वह विषयात्मक ही लागू हो सकेगा। बहरहाल, नये कानून को लागू किये जाने के बाद जो शुरूआती संकेत सामने आये हैं उनके आधार पर इतना तो कहा ही जा सकता है कि भारी जुर्माना के कारण जनता को अपनी ज़िम्मेदारी का कुछ एहसास अवश्य हुआ है। मसलन, लोगों में अपने वाहनों का बीमा कराने की होड़ लग गयी है। पिछले तीन दिन में जो पालिसी बिकी हैं उनमें 90 प्रतिशत उन ग्राहकों ने खरीदी है जिनकी योजना लैप्स हो गयी थी। हेलमेट की बिक्री में भी जबरदस्त इज़ाफा हुआ है। सरकार अगर साथ ही सड़कों की मरम्मत, सिग्नलों आदि पर भी विशेष ध्यान दे तो सड़क दुर्घटनाएं काफी कम की जा सकती हैं।

-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर