किसान आत्महत्याएं, ज़िम्मेदार कौन ?


भारत में हर वर्ष 12 हज़ार किसान अपनी ज़िन्दगी खत्म कर रहे हैं। कज़र् में डूबे, खेती में हो रहे घाटे को किसान बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।  किसान आत्महत्याएं क्यों कर रहे हैं?  क्योंकि उन्हें उनकी फसल का पूरा मूल्य नहीं मिलता है। देश का अन्नदाता (किसान) इतना दुखी हो जाता है, इतना लाचार हो जाता है कि वह खुदकुशी कर लेता है। यह बहुत गम्भीर समस्या है। राज्यों में किसानों को नुक्सान के बदले सही मुआवज़ा मिलना चाहिए। सबसे ज्यादा आत्महत्याएं उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसान कर रहे हैं। वैसे आत्महत्या महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब  और हरियाणा आदि राज्यों के किसानों ने भी की हैं। यह देश में क्या हो रहा है? देश में कई किसान ऐसे हैं, जो किराये पर, उधार पर ज़मीन खेती के लिए लेते हैं और उसके बाद बीज, खाद आदि उधार पर लेकर खेती शुरू करते हैं और जब उनकी फसलें बर्बाद हो जाती हैं तो कर्ज चुकाने का कोई रास्ता उन्हें दिखाई नहीं देता है, इसलिए वह खुदकुशी कर लेते हैं।  सरकारें दु:ख प्रकट करती हैं लेकिन पूर्ण रूप से मुआवज़ा नहीं देती हैं।  किसानों की चिंता सरकारों को है लेकिन किसानों को खुदकुशी करने से सरकारें रोक नहीं पाती हैं क्योंकि योजनाएं सही नहीं हैं, किसानों के लिए।  राज्य सरकारें केन्द्र सरकार को दोषी बता रही हैं और केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को दोषी मान रही है। राहत का पैकेज जारी किया जाता है, ऐसा सुनने को मिलता है लेकिन किसानों तक सही वक्त पर पूरा मुआवज़ा नहीं पहुंचता है। इसके लिए राज्य और केन्द्र सरकारें ज़िम्मेदार हैं।